हल्दी और कैंसर: कर्क्यूमिन को लेकर साइंस क्या कहती है?

oncare team
Updated on Aug 10, 2026 12:27 IST

By Dr. Gajendra Kumar Himanshu

हल्दी और कैंसर

जब घर में किसी का कैंसर का इलाज चल रहा होता है, तब परिवार हर जगह उम्मीद ढूंढने लगता है। कोई रिश्तेदार कोई घरेलू नुस्खा बता देता है, कोई इंटरनेट पर वीडियो भेज देता है। पिछले कुछ समय में हल्दी का नाम भी बहुत ज्यादा सुनने को मिलने लगा है। कई लोग कहते हैं कि हल्दी कैंसर में बहुत फायदेमंद होती है। कुछ लोग तो यह तक बोल देते हैं कि इससे कैंसर रुक सकता है।

ऐसी बातें सुनकर मरीज और परिवार दोनों सोच में पड़ जाते हैं। खासकर तब, जब इलाज पहले से ही मुश्किल चल रहा हो। कई लोग हल्दी वाला दूध पीना शुरू कर देते हैं। कुछ लोग बाजार से कर्क्यूमिन कैप्सूल खरीद लेते हैं। लेकिन सवाल वही रहता है, क्या सच में हल्दी इतनी असरदार है जितनी लोग बताते हैं?

असल बात यह है कि हल्दी को लेकर रिसर्च जरूर हुई है, लेकिन इंटरनेट पर जो बातें दिखाई जाती हैं, वे हमेशा पूरी सच्चाई नहीं होतीं।

हल्दी में ऐसा क्या होता है जिसकी इतनी चर्चा होती है

हल्दी में एक चीज पाई जाती है जिसे कर्क्यूमिन कहा जाता है। इसी वजह से हल्दी का रंग पीला होता है।

वैज्ञानिकों ने जब इस पर रिसर्च शुरू की, तब उन्हें लगा कि यह शरीर की कुछ प्रक्रियाओं पर असर डाल सकती है। इसके बाद हल्दी को लेकर बातें बढ़ने लगीं।

लेकिन लैब में किसी चीज पर असर दिखना और इंसानों में वही असर होना अलग बात होती है। यही कारण है कि डॉक्टर हर वायरल वीडियो की बात को सही नहीं मानते।

रिसर्च में क्या पता चला है

लोगों को क्या सुनने को मिलता है

डॉक्टर क्या कहते हैं

हल्दी कैंसर खत्म कर देती है

अभी ऐसा साबित नहीं हुआ

कर्क्यूमिन इलाज की जगह ले सकता है

इलाज बंद करना सही नहीं माना जाता

ज्यादा हल्दी ज्यादा फायदा देती है

जरूरत से ज्यादा लेना नुकसान भी कर सकता है

कुछ रिसर्च में यह देखने की कोशिश हुई कि कर्क्यूमिन शरीर के अंदर कैसे काम करता है।

जैसे:

  • क्या यह सूजन पर असर डालता है
  • क्या यह कुछ कोशिकाओं को प्रभावित करता है
  • क्या यह शरीर की प्रतिक्रिया बदल सकता है

लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सिर्फ हल्दी खाने से कैंसर ठीक हो जाएगा।

सोशल मीडिया पर बहुत बढ़ा-चढ़ाकर बातें कही जाती हैं

आजकल इंटरनेट पर कोई भी चीज बहुत जल्दी “चमत्कारी इलाज” बन जाती है। हल्दी के साथ भी यही हुआ।

कुछ वीडियो में कहा जाता है:

  • “कीमो की जरूरत नहीं”
  • “घर की हल्दी काफी है”
  • “दवा छोड़कर यह अपनाइए”

ऐसी बातें सुनकर कई लोग डर या उम्मीद में गलत फैसला ले लेते हैं। लेकिन डॉक्टर साफ कहते हैं कि कैंसर जैसी बीमारी में इलाज बीच में छोड़ना खतरनाक हो सकता है।

सामान्य खाने में हल्दी लेना अलग बात है

भारत में लगभग हर घर में हल्दी का इस्तेमाल होता है। दाल, सब्जी और कई घरेलू चीजों में लोग इसे रोज लेते हैं। ज्यादातर लोग इसे इन तरीकों से इस्तेमाल करते हैं:

  • सब्जी में
  • दाल में
  • हल्दी वाले दूध में
  • घर के खाने में

सामान्य मात्रा में हल्दी खाना अलग बात है। लेकिन बहुत ज्यादा मात्रा में कैप्सूल या पाउडर लेना अलग माना जाता है।

बिना डॉक्टर से पूछे सप्लीमेंट लेना सही नहीं माना जाता

कई लोग इंटरनेट देखकर खुद से कर्क्यूमिन कैप्सूल लेना शुरू कर देते हैं। लेकिन इलाज के दौरान ऐसा करना हर बार सुरक्षित नहीं होता। कुछ सप्लीमेंट दवाइयों के असर को बदल सकते हैं। इसलिए अगर मरीज:

  • कीमो ले रहा हो
  • दूसरी दवाइयाँ ले रहा हो
  • ऑपरेशन की तैयारी में हो

तो पहले डॉक्टर से बात करना जरूरी माना जाता है।

सिर्फ हल्दी पर भरोसा करना सही नहीं होता

जब कोई व्यक्ति कैंसर से गुजर रहा होता है, तब परिवार जल्दी उम्मीद ढूंढने लगता है। लेकिन सिर्फ एक चीज पर भरोसा करना सही नहीं माना जाता। इलाज के दौरान लोग आमतौर पर इन बातों पर ध्यान देते हैं:

  • अच्छा खाना
  • पानी
  • आराम
  • डॉक्टर की सलाह
  • समय पर दवाइयाँ

यही चीजें ज्यादा जरूरी मानी जाती हैं।

सबसे जरूरी बात क्या है

इलाज के दौरान इंटरनेट पर बहुत कुछ दिखाई देता है। लेकिन हर बात सही हो, यह जरूरी नहीं होता। इसलिए सबसे जरूरी बात यही मानी जाती है:

  • इलाज बंद न करें
  • खुद से सप्लीमेंट शुरू न करें
  • डॉक्टर से खुलकर बात करें
  • सोशल मीडिया की हर बात पर भरोसा न करें

यही चीजें मरीज को सुरक्षित रखने में मदद करती हैं।

यदि आप कैंसर के बारे में और अधिक जानकारी पढ़ना चाहते हैं, तो आप National Library of Medicine की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं।

आज ही परामर्श लें

हल्दी को लेकर लोगों में काफी उम्मीद दिखाई देती है और इस पर रिसर्च भी हुई है। लेकिन अभी तक इसे कैंसर का पक्का इलाज नहीं माना गया है। सामान्य खाने में हल्दी लेना अलग बात है, लेकिन इलाज छोड़कर सिर्फ घरेलू चीजों पर भरोसा करना सही नहीं माना जाता।

बेहतर कैंसर उपचार और मरीज सहायता सेवाओं के लिए Oncare Cancer Hospital जैसे अनुभवी कैंसर केंद्रों की जानकारी लेना उपयोगी हो सकता है।

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Written and Verified by:

Dr. Gajendra Kumar Himanshu

Dr. Gajendra Kumar Himanshu Exp: 10 Yr

Medical Officer

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