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कैंसर इलाज में सेक्स और रिश्ते: पति-पत्नी के लिए जरूरी बातचीत
कैंसर का इलाज शुरू होने के बाद जिंदगी पहले जैसी नहीं रहती। शुरुआत में पूरा ध्यान रिपोर्ट, डॉक्टर और इलाज पर रहता है, लेकिन धीरे-धीरे इसका असर रिश्तों पर भी दिखने लगता है। खासकर पति-पत्नी के बीच। कई लोग इस बारे में खुलकर बात नहीं करते, लेकिन सच्चाई यह है कि कैंसर इलाज के दौरान भावनात्मक और शारीरिक दोनों तरह की दूरी महसूस हो सकती है।
कुछ लोगों के लिए यह बदलाव अचानक होता है। जो रिश्ता पहले सामान्य था, उसमें चुप्पी बढ़ने लगती है। मरीज थका हुआ महसूस करता है, जबकि पार्टनर अंदर ही अंदर चिंता और डर से गुजर रहा होता है। ऐसे समय में दोनों लोग एक-दूसरे की परवाह तो करते हैं, लेकिन कई बार समझ नहीं पाते कि बात कहाँ से शुरू करें।
सेक्स और रिश्तों से जुड़े विषयों पर हमारे समाज में पहले ही खुलकर बात कम होती है। इसलिए कैंसर इलाज के दौरान आने वाली परेशानियाँ और भी ज्यादा अंदर ही अंदर दब जाती हैं। कई कपल्स को यह लगता है कि शायद सिर्फ उनके साथ ऐसा हो रहा है, जबकि असल में बहुत से लोग इसी स्थिति से गुजरते हैं।
इलाज का असर सिर्फ शरीर पर नहीं, रिश्तों पर भी पड़ सकता है
कैंसर के इलाज के दौरान शरीर में कई बदलाव आते हैं। थकान बढ़ सकती है, कमजोरी महसूस हो सकती है, बाल झड़ सकते हैं या वजन बदल सकता है। लेकिन इनके साथ मानसिक असर भी जुड़ा होता है।
कई मरीज पहले जैसे सहज महसूस नहीं करते। कुछ लोग अपने शरीर को लेकर असुरक्षित महसूस करने लगते हैं। कुछ लोगों को लगता है कि उनका पार्टनर अब उन्हें पहले जैसा नहीं देखेगा।
इसी दौरान रिश्तों में ये बदलाव महसूस हो सकते हैं
- बातचीत कम होना
- मूड में बदलाव
- शारीरिक दूरी
- आत्मविश्वास कम होना
- छोटी बातों पर तनाव
- अकेलापन महसूस होना
हर रिश्ता अलग होता है, इसलिए हर कपल का अनुभव भी अलग हो सकता है।
सेक्स लाइफ में बदलाव आना बहुत सामान्य बात मानी जाती है
कई लोग इस बारे में बात करने से बचते हैं, लेकिन इलाज के दौरान सेक्स में रुचि कम होना काफी सामान्य माना जाता है।
कुछ मरीजों को इलाज की वजह से लगातार थकान रहती है। कुछ लोगों में दर्द या कमजोरी ज्यादा होती है। वहीं कई लोग मानसिक रूप से इतने तनाव में होते हैं कि वे खुद को भावनात्मक रूप से बंद महसूस करने लगते हैं।
कुछ उपचारों का असर इस तरह देखा जा सकता है
इलाज | संभावित बदलाव |
|---|---|
कीमोथेरेपी | थकान और कमजोरी |
हार्मोन थेरेपी | सेक्स ड्राइव में कमी |
सर्जरी | शरीर को लेकर असहजता |
रेडियोथेरेपी | संवेदनशीलता या दर्द |
हर मरीज में ये बदलाव अलग हो सकते हैं। किसी को ज्यादा असर महसूस होता है, तो किसी को कम।
कई बार चुप्पी रिश्ते को ज्यादा मुश्किल बना देती है
बहुत से पति-पत्नी अपनी परेशानियों के बारे में खुलकर बात नहीं करते। मरीज सोचता है कि पार्टनर परेशान न हो, जबकि पार्टनर सोचता है कि मरीज पर और दबाव न पड़े।
धीरे-धीरे दोनों लोग अपनी भावनाएँ अंदर ही रखने लगते हैं। इसी वजह से दूरी बढ़ने लगती है। कई कपल्स बाद में यह महसूस करते हैं कि जब उन्होंने खुलकर बात करनी शुरू की, तब चीजें थोड़ी आसान होने लगीं।
कभी-कभी सिर्फ इतना पूछ लेना भी काफी होता है
- “तुम कैसा महसूस कर रहे हो?”
- “क्या मैं किसी तरह मदद कर सकता हूँ?”
- “अगर तुम बात करना चाहो तो मैं हूँ।”
ऐसी छोटी बातें भी रिश्ते में सहारा महसूस करा सकती हैं।
शरीर में बदलाव के बाद आत्मविश्वास प्रभावित होना सामान्य है
कुछ मरीज सर्जरी या इलाज के बाद खुद को आईने में देखने से बचने लगते हैं। खासकर ब्रेस्ट कैंसर या ऐसे कैंसर जिनका असर शरीर के निजी हिस्सों पर पड़ता है, उनमें यह स्थिति ज्यादा देखने को मिलती है।
कई महिलाओं को लगता है कि वे पहले जैसी नहीं दिखतीं। वहीं कुछ पुरुष भी कमजोरी या शारीरिक बदलाव की वजह से असहज महसूस कर सकते हैं।
इस समय पार्टनर का व्यवहार बहुत मायने रखता है। संवेदनशीलता और धैर्य कई बार मरीज को धीरे-धीरे सहज होने में मदद करते हैं।
रिश्तों में नजदीकी सिर्फ शारीरिक नहीं होती
इलाज के दौरान कई बार कपल्स पहले जैसे शारीरिक संबंध नहीं बना पाते। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि रिश्ता कमजोर हो गया है। कुछ लोग इस समय भावनात्मक जुड़ाव को ज्यादा महत्व देने लगते हैं।
जैसे
- साथ बैठना
- हाथ पकड़ना
- साथ खाना खाना
- छोटी बातचीत करना
- अस्पताल में साथ रहना
कई कपल्स बाद में बताते हैं कि मुश्किल समय ने उन्हें पहले से ज्यादा करीब ला दिया।
पार्टनर भी अंदर से थक सकता है
कई बार पूरा ध्यान मरीज पर रहता है, लेकिन जो व्यक्ति लगातार साथ खड़ा होता है, वह भी मानसिक दबाव से गुजर रहा होता है।
अस्पताल की जिम्मेदारी, भविष्य की चिंता और लगातार तनाव पार्टनर को भी प्रभावित कर सकता है। इसलिए रिश्ते में दोनों लोगों की भावनाओं को समझना जरूरी होता है।
यदि आप कैंसर के इलाज के बारे में और अधिक जानकारी पढ़ना चाहते हैं, तो आप National Cancer Institute की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं।
आज ही परामर्श लें
कैंसर इलाज के दौरान रिश्तों और सेक्स लाइफ में बदलाव आना सामान्य बात है। यह समय कई कपल्स के लिए भावनात्मक रूप से कठिन हो सकता है, लेकिन खुलकर बातचीत, धैर्य और सहयोग रिश्ते को संभालने में मदद कर सकते हैं। कई बार लोगों को सिर्फ यह एहसास चाहिए होता है कि वे इस मुश्किल समय में अकेले नहीं हैं।
बेहतर कैंसर उपचार और मरीज सहायता सेवाओं के लिए Oncare Cancer Hospital जैसे अनुभवी कैंसर केंद्रों की जानकारी लेना उपयोगी हो सकता है।
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Frequently Asked Questions
हाँ, कई मरीज इलाज के दौरान ऐसा महसूस करते हैं।
हाँ, लेकिन बातचीत और सहयोग से इसे संभाला जा सकता है।
अगर परेशानी लगातार महसूस हो रही हो, तो विशेषज्ञ से सलाह लेना उपयोगी हो सकता है।
हाँ, कई कपल्स के लिए भावनात्मक सहारा बहुत महत्वपूर्ण बन जाता है।
Written and Verified by:
Dr. Gajendra Kumar Himanshu Exp: 10 Yr
Medical Officer
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