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कीमोथेरेपी के दौरान बुखार क्यों एक इमरजेंसी है: फेब्राइल न्यूट्रोपेनिया को समझें
कीमोथेरेपी के दौरान 38°C (100.4°F) या इससे अधिक बुखार को हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह फेब्राइल न्यूट्रोपेनिया (Febrile Neutropenia) का संकेत हो सकता है। इसमें शरीर को संक्रमण से बचाने वाली न्यूट्रोफिल कोशिकाएं (Neutrophils) बहुत कम हो जाती हैं और साथ में बुखार भी आता है। ऐसी स्थिति में संक्रमण तेजी से गंभीर हो सकता है। इसलिए कीमोथेरेपी के दौरान बुखार आने पर बिना देरी किए अपनी कैंसर उपचार टीम से संपर्क करना या डॉक्टर की सलाह के अनुसार तुरंत चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।
इस ब्लॉग में हम आसान भाषा में समझेंगे कि कीमोथेरेपी (Chemotherapy) के दौरान न्यूट्रोफिल क्यों कम हो जाते हैं, फेब्राइल न्यूट्रोपेनिया क्या है, बुखार को इमरजेंसी क्यों माना जाता है, इसके कौन-कौन से लक्षण दिखाई दे सकते हैं और डॉक्टर इसकी जांच और इलाज कैसे करते हैं। साथ ही, हम यह भी जानेंगे कि कीमोथेरेपी के दौरान संक्रमण के खतरे को कम करने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
फेब्राइल न्यूट्रोपेनिया क्या है?
हमारे खून में कई तरह की सफेद रक्त कोशिकाएं होती हैं। इनमें न्यूट्रोफिल संक्रमण से लड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जब शरीर में इनकी संख्या बहुत कम हो जाती है, तो इसे न्यूट्रोपेनिया (Neutropenia) कहा जाता है।
कीमोथेरेपी के दौरान कैंसर कोशिकाओं के साथ शरीर की कुछ स्वस्थ कोशिकाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। बोन मैरो (Bone Marrow) वह जगह है जहां शरीर में खून की कोशिकाएं बनती हैं। कीमोथेरेपी के कारण कुछ मरीजों में बोन मैरो की गतिविधि प्रभावित हो सकती है और न्यूट्रोफिल की संख्या कम हो सकती है।
अगर न्यूट्रोफिल की संख्या कम होने के दौरान मरीज को बुखार आता है, तो इसे फेब्राइल न्यूट्रोपेनिया कहा जाता है। ऐसी स्थिति में शरीर बैक्टीरिया और दूसरे कीटाणुओं से अच्छी तरह लड़ नहीं पाता।
कीमोथेरेपी के दौरान बुखार क्यों खतरनाक हो सकता है?
जब शरीर में संक्रमण होता है, तो हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली उससे लड़ने की कोशिश करती है। लेकिन कीमोथेरेपी के कारण न्यूट्रोफिल की संख्या कम होने पर शरीर की यह सुरक्षा कमजोर हो सकती है।
ऐसी स्थिति में कई बार बुखार ही संक्रमण का पहला या एकमात्र साफ संकेत हो सकता है। इसलिए कीमोथेरेपी के दौरान बुखार आने पर यह सोचकर इंतजार नहीं करना चाहिए कि यह अपने आप ठीक हो जाएगा।
खासकर 38°C (100.4°F) या इससे अधिक तापमान होने पर तुरंत अपनी चिकित्सा टीम से संपर्क करना जरूरी है। डॉक्टर आपकी कीमोथेरेपी, खून की जांच और स्वास्थ्य की स्थिति देखकर आगे की सलाह देंगे।
फेब्राइल न्यूट्रोपेनिया के लक्षण क्या हैं?
बुखार इसका सबसे महत्वपूर्ण चेतावनी संकेत है। इसके साथ कुछ दूसरे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।
इनमें शामिल हैं:
- ठंड लगना या कंपकंपी होना
- बहुत ज्यादा कमजोरी या अस्वस्थ महसूस होना
- गले में दर्द
- लगातार खांसी
- सांस लेने में परेशानी
- पेशाब करते समय जलन
- मुंह में छाले
- किसी घाव के आसपास लालिमा, दर्द या पस
हर मरीज में ये सभी लक्षण दिखाई दें, यह जरूरी नहीं है। इसलिए कीमोथेरेपी के दौरान बुखार को केवल इसलिए नजरअंदाज नहीं करना चाहिए क्योंकि इसके साथ कोई दूसरा लक्षण नहीं है।
अगर आप कीमोथेरेपी के दौरान होने वाले दूसरे चेतावनी संकेतों के बारे में जानना चाहते हैं, तो कीमोथेरेपी साइड इफेक्ट्स से जुड़ा हमारा लेख भी उपयोगी हो सकता है।
किन मरीजों में न्यूट्रोपेनिया का खतरा बढ़ सकता है?
हर कीमोथेरेपी मरीज में न्यूट्रोपेनिया का खतरा एक जैसा नहीं होता। इसका खतरा कीमोथेरेपी की दवाओं, उनकी मात्रा, इलाज के समय और मरीज की सामान्य स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर कर सकता है।
कुछ स्थितियों में इसका खतरा बढ़ सकता है, जैसे:
- ज्यादा मात्रा में कीमोथेरेपी
- पहले से कम सफेद रक्त कोशिकाएं
- बोन मैरो से जुड़ी बीमारी
- कैंसर का बोन मैरो तक फैलना
- कमजोर स्वास्थ्य
- कुछ अन्य कैंसर उपचार
इसी वजह से कीमोथेरेपी के दौरान डॉक्टर नियमित सीबीसी और खून की जांच कराने की सलाह दे सकते हैं। इससे सफेद रक्त कोशिकाओं और न्यूट्रोफिल की संख्या में होने वाले बदलाव का पता लगाया जा सकता है।
बुखार आने पर डॉक्टर कौन-सी जांच करते हैं?
जब कीमोथेरेपी के दौरान बुखार आता है, तो डॉक्टर पहले मरीज की स्थिति और खून की जांच देखते हैं। संक्रमण का कारण जानने के लिए जरूरत के अनुसार कुछ दूसरी जांच भी की जा सकती हैं।
जांच | इसका उद्देश्य |
|---|---|
सीबीसी (CBC) / ब्लड टेस्ट | सफेद रक्त कोशिकाओं और न्यूट्रोफिल की संख्या देखना |
एएनसी (ANC) | न्यूट्रोफिल की संख्या का आकलन करना |
ब्लड कल्चर (Blood Culture) | खून में संक्रमण की जांच करना |
यूरिन टेस्ट (Urine Test) | पेशाब के संक्रमण का पता लगाना |
छाती का एक्स-रे या अन्य जांच | जरूरत पड़ने पर संक्रमण की जगह पता करना |
हर मरीज को सभी जांचों की जरूरत नहीं होती। डॉक्टर मरीज के लक्षण, इलाज और स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार जांच तय करते हैं।
फेब्राइल न्यूट्रोपेनिया का इलाज कैसे किया जाता है?
इलाज मरीज की स्थिति और संक्रमण के खतरे पर निर्भर करता है। अगर डॉक्टर को बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण का शक होता है, तो एंटीबायोटिक दवाओं की जरूरत पड़ सकती है। कुछ मरीजों को नस के जरिए तरल पदार्थ, निगरानी और अस्पताल में इलाज की भी जरूरत हो सकती है।
कुछ स्थितियों में डॉक्टर ऐसी दवाएं भी दे सकते हैं जो सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या बढ़ाने या उनकी रिकवरी में मदद करती हैं। लेकिन कौन-सी दवा देनी है और कितने समय तक देनी है, यह मरीज की स्थिति के अनुसार तय किया जाता है।
इसलिए बुखार होने पर घर पर खुद से एंटीबायोटिक या कोई दूसरी दवा शुरू करना सही नहीं है।
कीमोथेरेपी के दौरान संक्रमण से कैसे बचें?
हर संक्रमण को रोकना संभव नहीं होता, लेकिन कुछ सामान्य सावधानियां संक्रमण के खतरे को कम करने में मदद कर सकती हैं।
- हाथों को नियमित रूप से साबुन और पानी से धोएं।
- बीमार व्यक्ति के बहुत करीब जाने से बचें।
- खाने को अच्छी तरह साफ करके सुरक्षित तरीके से तैयार करें।
- डॉक्टर द्वारा बताए गए तापमान जांचने के निर्देशों का पालन करें।
- कोई नया लक्षण दिखाई दे तो अपनी कैंसर उपचार टीम (Cancer treatment team) को बताएं।
कीमोथेरेपी के दौरान सही खान-पान की जानकारी भी महत्वपूर्ण है। भोजन को सुरक्षित तरीके से तैयार करने और रखने से संक्रमण के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है।
बुखार आने पर क्या नहीं करना चाहिए?
कीमोथेरेपी के दौरान बुखार होने पर सबसे जरूरी बात है कि इलाज में देरी न करें। केवल घर पर आराम करके या अपनी तरफ से बुखार की दवा लेकर लंबे समय तक इंतजार करना सही नहीं है।
अगर डॉक्टर ने आपको कीमोथेरेपी के दौरान बुखार होने पर कोई विशेष इमरजेंसी योजना दी है, तो उसी का पालन करें। तापमान कितना है, बुखार कब से है और साथ में कौन-कौन से लक्षण हैं, इसकी जानकारी डॉक्टर को देना उपयोगी होता है।
अगर आप कीमोथेरेपी से जुड़ी अधिक जानकारी पढ़ना चाहते हैं, तो National Cancer Institute की वेबसाइट देख सकते हैं।
आज ही परामर्श लें
कीमोथेरेपी के दौरान 38°C (100.4°F) या इससे अधिक बुखार को सामान्य दुष्प्रभाव समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह फेब्राइल न्यूट्रोपेनिया या किसी संक्रमण का संकेत हो सकता है, खासकर जब न्यूट्रोफिल की संख्या कम हो। समय पर जांच और जरूरत पड़ने पर इलाज शुरू करने से गंभीर परेशानी के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है।
अगर कीमोथेरेपी के दौरान आपको या आपके किसी करीबी को बुखार, ठंड लगना, सांस लेने में परेशानी, बहुत ज्यादा कमजोरी या संक्रमण के दूसरे संकेत दिखाई देते हैं, तो Oncare Cancer Hospital की कैंसर उपचार टीम से तुरंत संपर्क करें। आपकी कीमोथेरेपी और खून की जांच के आधार पर डॉक्टर आगे की सही प्रक्रिया बता सकते हैं।
डिस्क्लेमर
यह ब्लॉग केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है। किसी भी प्रकार के कैंसर, जांच रिपोर्ट या उपचार से संबंधित निर्णय लेने से पहले योग्य कैंसर विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।
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Frequently Asked Questions
38°C (100.4°F) या इससे अधिक बुखार कीमोथेरेपी के दौरान तुरंत चिकित्सा सलाह लेने का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में अपनी कैंसर उपचार टीम से तुरंत संपर्क करें।
नहीं। हर मरीज में न्यूट्रोपेनिया नहीं होता। इसका खतरा कीमोथेरेपी की दवा, उसकी मात्रा, इलाज की योजना और मरीज की स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है।
हां। मरीज की स्थिति के अनुसार डॉक्टर एंटीबायोटिक, नस के जरिए तरल पदार्थ, निगरानी और दूसरे सहायक उपचार दे सकते हैं।
हां। न्यूट्रोफिल की संख्या कम होने पर कई बार बुखार ही संक्रमण का शुरुआती संकेत हो सकता है। इसलिए कीमोथेरेपी के दौरान बुखार को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
Written and Verified by:
Dr. Gajendra Kumar Himanshu Exp: 10 Yr
Medical Officer
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