कैंसर के इलाज के दौरान नींद न आना: बेहतर नींद के लिए क्या करें

oncare team
Updated on Oct 1, 2026 18:59 IST

By Dr. Gajendra Kumar Himanshu

कैंसर के इलाज के दौरान नींद न आना

कैंसर के इलाज के दौरान नींद न आना (Insomnia) एक आम समस्या हो सकती है। दर्द, चिंता, तनाव, कीमोथेरेपी (chemotherapy) के दुष्प्रभाव, कुछ दवाएं, बार-बार अस्पताल जाना या इलाज को लेकर डर नींद को प्रभावित कर सकते हैं। बेहतर नींद के लिए रोज एक जैसा सोने और जागने का समय रखना, दिन में हल्की शारीरिक गतिविधि करना, शाम के बाद कैफीन कम करना, सोने से पहले मोबाइल और दूसरी स्क्रीन का इस्तेमाल कम करना और कमरे को शांत व आरामदायक रखना मदद कर सकता है। अगर नींद की समस्या लगातार बनी रहती है या दिनभर के काम प्रभावित हो रहे हैं, तो डॉक्टर से बात करना जरूरी है।

कैंसर के इलाज के दौरान शरीर और मन दोनों पर दबाव रहता है। इसलिए कभी-कभी बहुत थकान होने के बावजूद नींद नहीं आती या रात में बार-बार नींद खुल जाती है। कुछ मरीजों को इलाज वाले दिनों में ज्यादा परेशानी हो सकती है, जबकि कुछ में यह समस्या लंबे समय तक बनी रह सकती है। इस ब्लॉग में हम आसान भाषा में समझेंगे कि cancer treatment यानी कैंसर के इलाज के दौरान नींद न आने की समस्या क्यों होती है, कौन-सी आदतें नींद बेहतर करने में मदद कर सकती हैं और कब डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

कैंसर के इलाज के दौरान नींद क्यों नहीं आती?

कैंसर के इलाज के दौरान नींद खराब होने के कई कारण हो सकते हैं। सामान्य कारणों में चिंता, दर्द, मतली, सांस लेने में परेशानी, खुजली या इलाज के कारण होने वाली दूसरी परेशानियां शामिल हैं।

कीमोथेरेपी और कुछ दूसरी कैंसर की दवाएं भी नींद के तरीके को प्रभावित कर सकती हैं। उदाहरण के लिए, इलाज के दौरान दी जाने वाली कुछ स्टेरॉयड दवाएं नींद कम कर सकती हैं या बेचैनी बढ़ा सकती हैं।

इसके अलावा कैंसर की जांच (Cancer Diagnostics) के बाद इलाज के परिणाम, भविष्य, परिवार या आर्थिक स्थिति को लेकर चिंता होना भी स्वाभाविक है। रात में जब आसपास शांति होती है, तो ऐसे विचार ज्यादा परेशान कर सकते हैं।

अगर आप कीमोथेरेपी से होने वाले अलग-अलग दुष्प्रभावों को समझना चाहते हैं, तो कीमोथेरेपी के साइड इफ़ेक्ट के बारे में पढ़ सकते हैं।

नींद की समस्या के कौन-से लक्षण हो सकते हैं?

नींद न आना केवल रात में सोने में परेशानी होने का नाम नहीं है। इसके अलग-अलग लक्षण हो सकते हैं।

कुछ मरीजों में ये लक्षण दिखाई दे सकते हैं:

  • सोने में बहुत समय लग सकता है।
  • रात में बार-बार नींद खुल सकती है।
  • सुबह जरूरत से बहुत पहले नींद खुल सकती है।
  • पर्याप्त समय बिस्तर पर रहने के बाद भी नींद पूरी न हो सकती है।
  • दिन में थकान, चिड़चिड़ापन या ध्यान लगाने में परेशानी हो सकती है।

अगर ये लक्षण लगातार बने रहते हैं, तो अपनी चिकित्सा टीम को इसकी जानकारी देना उपयोगी होता है।

कैंसर के इलाज के दौरान बेहतर नींद के लिए क्या करें?

नींद बेहतर करने के लिए सबसे पहले एक नियमित दिनचर्या बनाने की कोशिश करें। रोज लगभग एक ही समय पर सोने और जागने से शरीर की प्राकृतिक नींद की घड़ी को नियमित करने में मदद मिल सकती है।

दिन में डॉक्टर की अनुमति के अनुसार हल्की पैदल चाल या दूसरी शारीरिक गतिविधि करें। लेकिन सोने के बिल्कुल पहले बहुत ज्यादा या कठिन व्यायाम करने से कुछ लोगों को नींद आने में परेशानी हो सकती है।

सोने से पहले आराम देने वाली दिनचर्या बनाएं, जैसे हल्का संगीत सुनना, किताब पढ़ना, गहरी सांस लेना या ध्यान करना।

नींद की दिनचर्या बनाने के आसान तरीके

एक अच्छी नींद की दिनचर्या इलाज के दौरान काफी मददगार हो सकती है। इसके लिए रोजमर्रा की आदतों में छोटे बदलाव करें।

रात को सोने का समय तय करें

हर दिन लगभग एक ही समय पर बिस्तर पर जाने की कोशिश करें। सुबह भी लगभग एक ही समय पर उठें, भले ही पिछली रात नींद थोड़ी कम हुई हो।

दिन में ज्यादा देर न सोएं

अगर दिन में आराम की जरूरत है तो थोड़ी देर की झपकी ली जा सकती है। लेकिन बहुत लंबी या देर शाम की झपकी रात की नींद को प्रभावित कर सकती है।

सोने की जगह आरामदायक रखें

कमरे में बहुत ज्यादा रोशनी, आवाज या गर्मी न हो। जरूरत के अनुसार तकिया और बिस्तर को आरामदायक रखें।

खाने-पीने की आदतों का नींद पर असर

शाम और रात में कैफीन लेने से कुछ लोगों को नींद आने में परेशानी हो सकती है। इसलिए शाम के बाद चाय, कॉफी, ऊर्जा वाले पेय और कैफीन वाले दूसरे पेय कम करना उपयोगी हो सकता है।

सोने से ठीक पहले बहुत ज्यादा खाना भी पेट की परेशानी या एसिडिटी बढ़ा सकता है। हालांकि कैंसर के इलाज के दौरान पोषण महत्वपूर्ण है, इसलिए भोजन को बिना डॉक्टर की सलाह के बहुत ज्यादा कम न करें।

दर्द और दूसरी परेशानियों को नजरअंदाज न करें

कई कैंसर मरीजों में दर्द नींद खराब होने का बड़ा कारण हो सकता है। अगर रात में दर्द बढ़ता है या डॉक्टर द्वारा दी गई दर्द की दवा के बावजूद आराम नहीं मिल रहा है, तो डॉक्टर को बताएं।

इसी तरह मतली, खांसी, सांस लेने में परेशानी, शरीर में गर्मी लगना, खुजली या बार-बार पेशाब आने जैसी समस्याएं भी नींद में रुकावट डाल सकती हैं।

इन लक्षणों को सहते रहने के बजाय चिकित्सा टीम को बताना बेहतर है। कई बार मूल समस्या को नियंत्रित करने से नींद भी बेहतर हो सकती है।

स्क्रीन और मोबाइल का इस्तेमाल कम करें

सोने से पहले मोबाइल फोन, टैबलेट या टेलीविजन का ज्यादा इस्तेमाल दिमाग को सक्रिय रख सकता है और सोने की दिनचर्या को प्रभावित कर सकता है।

सोने से लगभग एक घंटे पहले स्क्रीन का इस्तेमाल कम करने की कोशिश करें। अगर पूरी तरह बंद करना मुश्किल हो, तो स्क्रीन की रोशनी कम करें और आराम देने वाली गतिविधि चुनें।

रात में बार-बार कैंसर से जुड़ी जानकारी पढ़ना भी चिंता बढ़ा सकता है। जरूरी चिकित्सा सवालों को लिखकर अगले डॉक्टर के अपॉइंटमेंट में पूछना ज्यादा उपयोगी हो सकता है।

आराम देने वाली तकनीकें कैसे मदद कर सकती हैं?

गहरी सांस लेना, ध्यान, मांसपेशियों को धीरे-धीरे ढीला करना और हल्की स्ट्रेचिंग कुछ मरीजों में तनाव कम करने में मदद कर सकती हैं।

उदाहरण के लिए, बिस्तर पर आराम से लेटकर धीरे-धीरे सांस अंदर लें और फिर धीरे-धीरे बाहर छोड़ें। कुछ मिनट तक केवल सांस लेने पर ध्यान देने की कोशिश करें।

अगर किसी तकनीक से चक्कर, बेचैनी या दूसरी परेशानी महसूस हो, तो उसे रोक दें।

नींद सुधारने के आसान उपाय

नीचे दी गई तालिका में नींद से जुड़ी कुछ आम समस्याएं और उनमें मदद कर सकने वाले आसान उपाय दिए गए हैं।

समस्या या आदत

क्या मदद कर सकता है?

अनियमित नींद का समय

रोज लगभग एक ही समय पर सोना और जागना

दिन में ज्यादा सोना

जरूरत हो तो थोड़ी देर की झपकी लेना

कैफीन

शाम के बाद कम करना

मोबाइल और स्क्रीन

सोने से पहले इस्तेमाल कम करना

चिंता और तनाव

गहरी सांस, ध्यान या आराम की तकनीक

दर्द

डॉक्टर से बात करके दर्द को नियंत्रित करने की योजना

कम शारीरिक गतिविधि

डॉक्टर की अनुमति से हल्की पैदल चाल

असुविधाजनक कमरा

शांत, आरामदायक और कम रोशनी वाला वातावरण

क्या नींद की गोलियां लेना सही है?

कैंसर के इलाज के दौरान अपने आप नींद की गोलियां लेना सही नहीं है। कुछ नींद की दवाएं दूसरी दवाओं के साथ असर डाल सकती हैं या बहुत ज्यादा नींद और सुस्ती पैदा कर सकती हैं।

अगर रोजमर्रा की आदतों में बदलाव करने के बाद भी नींद बेहतर नहीं हो रही है, तो डॉक्टर से बात करें। डॉक्टर आपकी दवाओं, लक्षणों और पूरी स्वास्थ्य स्थिति को देखकर तय कर सकते हैं कि किसी दवा की जरूरत है या नहीं।

कुछ मरीजों में नींद के लिए विशेष व्यवहार आधारित उपचार (Cognitive Behavioral Therapy for Insomnia) भी मदद कर सकता है। इसमें नींद से जुड़ी गलत आदतों और परेशान करने वाले विचारों को बदलने पर काम किया जाता है।

अगर आप कैंसर के इलाज से जुड़ी अधिक जानकारी पढ़ना चाहते हैं, तो National Cancer Institute की वेबसाइट देख सकते हैं।

आज ही परामर्श लें

कैंसर के इलाज के दौरान नींद खराब होना आम हो सकता है, लेकिन लगातार नींद न आने की समस्या को केवल इलाज का हिस्सा मानकर सहते रहना जरूरी नहीं है। दर्द, चिंता, दवाओं या किसी दूसरे लक्षण का सही प्रबंधन नींद को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।

Oncare Cancer Hospital में कैंसर मरीजों के लिए विशेषज्ञ परामर्श और इलाज से जुड़े लक्षणों के प्रबंधन की सुविधा उपलब्ध है। अगर नींद की समस्या लगातार बनी हुई है, आपकी रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं या किसी दवा के बाद नींद न आने की समस्या बढ़ गई है, तो अपनी चिकित्सा टीम से बात करें।

डिस्क्लेमर

यह ब्लॉग केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है। किसी भी प्रकार के कैंसर, जांच रिपोर्ट या उपचार से संबंधित निर्णय लेने से पहले योग्य कैंसर विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

Frequently Asked Questions

Written and Verified by:

Dr. Gajendra Kumar Himanshu

Dr. Gajendra Kumar Himanshu Exp: 10 Yr

Medical Officer

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