कीमोथेरेपी के दौरान सनस्क्रीन और धूप से बचाव क्यों जरूरी है

oncare team
Updated on Sep 30, 2026 15:20 IST

By Dr. Gajendra Kumar Himanshu

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कीमोथेरेपी के दौरान सनस्क्रीन और धूप से बचाव जरूरी हो सकता है, क्योंकि कुछ कीमोथेरेपी दवाएं त्वचा को सूरज की किरणों के प्रति ज्यादा संवेदनशील बना सकती हैं। इसे धूप के प्रति संवेदनशीलता (Photosensitivity) कहा जाता है। ऐसी स्थिति में थोड़ी देर धूप में रहने पर भी त्वचा लाल, गर्म या जलन वाली हो सकती है। त्वचा पर दाने (Rash) या धूप से जलने जैसी समस्या भी हो सकती है। इसलिए कीमोथेरेपी के दौरान बाहर निकलते समय धूप से बचना, शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनना और डॉक्टर की सलाह से सनस्क्रीन लगाना त्वचा की सुरक्षा में मदद कर सकता है।

हर कीमोथेरेपी (Chemotherapy) दवा से त्वचा धूप के प्रति संवेदनशील नहीं होती और हर मरीज में त्वचा की समस्या भी नहीं होती। यह दवा, उसकी मात्रा और आपकी त्वचा की स्थिति पर निर्भर करती है। इस ब्लॉग में हम समझेंगे कि कीमोथेरेपी के दौरान त्वचा धूप के प्रति संवेदनशील क्यों हो सकती है, सनस्क्रीन कैसे मदद करता है, इसे सही तरीके से कैसे लगाएं और किन त्वचा संबंधी लक्षणों में डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।

कीमोथेरेपी के दौरान त्वचा धूप के प्रति संवेदनशील क्यों हो सकती है?

कीमोथेरेपी का उपयोग कैंसर की कोशिकाओं को खत्म या नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। लेकिन कुछ दवाओं का असर शरीर की सामान्य कोशिकाओं पर भी पड़ सकता है। कुछ कीमोथेरेपी दवाएं त्वचा को सूरज की पराबैंगनी किरणों (UV Rays) के प्रति ज्यादा संवेदनशील बना सकती हैं।

इस वजह से धूप में थोड़ी देर रहने के बाद भी त्वचा लाल हो सकती है। जलन, खुजली या दाने जैसी समस्या भी हो सकती है। कुछ मरीजों में कीमोथेरेपी के दौरान त्वचा पहले से ही सूखी और संवेदनशील हो सकती है।

अगर कीमोथेरेपी के साथ विकिरण उपचार (Radiation Therapy) भी चल रहा है, तो जिस जगह पर विकिरण दिया जा रहा है, वहां की त्वचा को विशेष देखभाल की जरूरत हो सकती है।

अगर आप कीमोथेरेपी के दूसरे सामान्य दुष्प्रभावों के बारे में जानना चाहते हैं, तो हमारा ब्लॉग कीमोथेरेपी के साइड इफेक्ट पढ़ सकते हैं।

धूप के प्रति संवेदनशीलता (Photosensitivity) क्या होती है?

धूप के प्रति संवेदनशीलता का मतलब है कि त्वचा सूरज की रोशनी, खासकर पराबैंगनी किरणों के प्रति सामान्य से ज्यादा संवेदनशील हो जाती है। कुछ दवाएं इस समस्या की संभावना बढ़ा सकती हैं।

इसके कारण धूप में कम समय रहने के बाद भी:

  • त्वचा लाल या गर्म हो सकती है।
  • जलन या चुभन हो सकती है।
  • खुजली या दाने हो सकते हैं।
  • त्वचा पर धूप से जलने जैसी समस्या हो सकती है।
  • कुछ मामलों में त्वचा का रंग बदल सकता है।

हर व्यक्ति में इसका असर अलग हो सकता है। इसलिए अगर आपकी कीमोथेरेपी की दवा धूप के प्रति संवेदनशीलता बढ़ा सकती है, तो अपनी डॉक्टर की टीम से त्वचा की सुरक्षा के बारे में जरूर पूछें।

कीमोथेरेपी के दौरान सनस्क्रीन क्यों उपयोगी है?

सनस्क्रीन त्वचा पर सूरज की पराबैंगनी किरणों के असर को कम करने में मदद करता है। कीमोथेरेपी के दौरान इसका इस्तेमाल उन मरीजों के लिए उपयोगी हो सकता है जिनकी त्वचा उपचार के कारण ज्यादा संवेदनशील हो गई है।

आमतौर पर व्यापक सुरक्षा वाला सनस्क्रीन (Broad-Spectrum Sunscreen) यूवीए और यूवीबी दोनों तरह की किरणों से बचाव में मदद करता है। डॉक्टर या त्वचा विशेषज्ञ आपकी त्वचा और उपचार के अनुसार एसपीएफ 30 या उससे अधिक वाला सनस्क्रीन लगाने की सलाह दे सकते हैं।

लेकिन केवल सनस्क्रीन लगाना ही पर्याप्त नहीं है। लंबे समय तक सीधे धूप में रहने से बचना, शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनना और छाया में रहना भी जरूरी है।

कीमोथेरेपी के दौरान सनस्क्रीन कैसे लगाएं?

सनस्क्रीन केवल गर्मियों या समुद्र किनारे जाने पर लगाने की जरूरत नहीं होती। बादल होने पर भी सूरज की पराबैंगनी किरणों का संपर्क हो सकता है।

सनस्क्रीन लगाते समय:

  • बाहर जाने से पहले खुली त्वचा पर पर्याप्त मात्रा में लगाएं।
  • चेहरे, गर्दन, कान, हाथ और शरीर के दूसरे खुले हिस्सों को न भूलें।
  • लंबे समय तक बाहर रहने पर उत्पाद पर दिए निर्देश के अनुसार दोबारा लगाएं।
  • पसीना आने या तैरने के बाद फिर से सनस्क्रीन लगाने की जरूरत हो सकती है।
  • अगर त्वचा पर दाने, घाव या जलन है, तो उस जगह पर सनस्क्रीन लगाने से पहले डॉक्टर से पूछें।
  • सनस्क्रीन लगाने के बाद जलन या दाने बढ़ें, तो उसका इस्तेमाल रोककर डॉक्टर से सलाह लें।

धूप से बचने के आसान तरीके

कीमोथेरेपी के दौरान त्वचा की सुरक्षा के लिए सनस्क्रीन के साथ शरीर को ढककर रखना भी मददगार हो सकता है।

बचाव का तरीका

कैसे मदद करता है?

व्यापक सुरक्षा वाला सनस्क्रीन

यूवीए और यूवीबी किरणों से बचाव में मदद करता है

पूरी आस्तीन वाले कपड़े

त्वचा को सीधे धूप से ढकते हैं

चौड़ी किनारी वाली टोपी

चेहरे, कान और गर्दन को छाया देती है

धूप का चश्मा

आंखों को तेज रोशनी से बचाने में मदद करता है

छाया में रहना

सीधे पराबैंगनी किरणों का संपर्क कम करता है

दोपहर की तेज धूप से बचना

ज्यादा धूप के संपर्क को कम करने में मदद करता है

अगर कीमोथेरेपी के दौरान बाहर जाना जरूरी है, तो संभव हो तो सुबह या शाम का समय चुनें, जब धूप अपेक्षाकृत कम तेज हो सकती है।

क्या हर सनस्क्रीन कीमोथेरेपी के मरीज के लिए सुरक्षित है?

हर सनस्क्रीन हर व्यक्ति की संवेदनशील त्वचा के लिए सही नहीं हो सकता। कीमोथेरेपी के दौरान त्वचा सूखी या संवेदनशील हो सकती है। इसलिए कोई नया त्वचा उत्पाद इस्तेमाल करते समय सावधानी रखना जरूरी है।

बिना खुशबू वाले उत्पाद (Fragrance-Free) और संवेदनशील त्वचा के लिए बनाए गए उत्पाद कुछ लोगों के लिए बेहतर हो सकते हैं। लेकिन अगर आपकी त्वचा बहुत संवेदनशील है, दाने हैं या उपचार के कारण त्वचा में बदलाव हो रहे हैं, तो त्वचा विशेषज्ञ या डॉक्टर की टीम से सही उत्पाद के बारे में पूछें।

डॉक्टर की अनुमति हो तो किसी नए उत्पाद को पहले त्वचा के छोटे हिस्से पर लगाकर देखा जा सकता है कि उससे कोई जलन या एलर्जी तो नहीं हो रही।

कीमोथेरेपी के दौरान त्वचा की देखभाल कैसे करें?

सनस्क्रीन के साथ रोजाना त्वचा की देखभाल भी जरूरी है। बहुत गर्म पानी से न नहाएं और तेज या कठोर साबुन और त्वचा को नुकसान पहुंचाने वाले उत्पादों से बचें, खासकर जब त्वचा पहले से सूखी या संवेदनशील हो।

मॉइस्चराइज़र का इस्तेमाल

कीमोथेरेपी के दौरान त्वचा का सूखापन बढ़ सकता है। डॉक्टर की सलाह से हल्का मॉइस्चराइज़र लगाया जा सकता है। नहाने के बाद त्वचा को जोर से रगड़ने के बजाय धीरे से सुखाएं और जरूरत के अनुसार मॉइस्चराइज़र लगाएं।

त्वचा को खरोंचने से बचें

अगर त्वचा में खुजली हो रही है, तो उसे बार-बार न खुजलाएं। ज्यादा खुजलाने से त्वचा पर छोटे घाव हो सकते हैं और संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।

क्या घर के अंदर भी सनस्क्रीन की जरूरत है?

हर व्यक्ति को घर के अंदर रहने पर सनस्क्रीन लगाने की जरूरत नहीं होती। लेकिन अगर आप लंबे समय तक खिड़की के पास बैठते हैं या बार-बार बाहर आना-जाना होता है, तो धूप से बचाव करना उपयोगी हो सकता है।

सबसे जरूरी बात यह है कि आपकी कीमोथेरेपी की दवा त्वचा को धूप के प्रति ज्यादा संवेदनशील बनाती है या नहीं। अपनी दवा के बारे में डॉक्टर की टीम से जानकारी लें।

विकिरण उपचार के साथ कीमोथेरेपी हो तो क्या सावधानी रखें?

अगर कीमोथेरेपी के साथ विकिरण उपचार भी चल रहा है, तो विकिरण दिए जाने वाले हिस्से की त्वचा ज्यादा संवेदनशील हो सकती है।

उस जगह पर बिना डॉक्टर की सलाह के सनस्क्रीन, इत्र, डीओडोरेंट या कोई दूसरा कॉस्मेटिक उत्पाद न लगाएं। विकिरण वाले हिस्से की त्वचा की देखभाल के लिए आपकी विकिरण उपचार टीम जो निर्देश दे, उन्हें प्राथमिकता दें।

त्वचा की समस्या होने पर कब डॉक्टर से संपर्क करें?

हल्की लालिमा या त्वचा का सूखापन कई बार सामान्य जलन हो सकती है, लेकिन कुछ लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

डॉक्टर से संपर्क करें अगर:

  • त्वचा पर तेज या तेजी से बढ़ते दाने हों।
  • त्वचा पर छाले बन रहे हों।
  • त्वचा में बहुत ज्यादा दर्द या जलन हो।
  • त्वचा से पानी या पस निकल रहा हो।
  • बुखार के साथ त्वचा में बदलाव हो।
  • त्वचा की समस्या तेजी से शरीर के दूसरे हिस्सों में फैल रही हो।

कीमोथेरेपी के दौरान शरीर की संक्रमण से लड़ने की क्षमता कम हो सकती है। इसलिए त्वचा पर संक्रमण के संकेत दिखाई देने पर डॉक्टर को बताना जरूरी है।

अगर आप कैंसर के इलाज और कीमोथेरेपी से जुड़ी अधिक जानकारी पढ़ना चाहते हैं, तो National Cancer Institute की वेबसाइट देख सकते हैं।

आज ही परामर्श लें

कीमोथेरेपी के दौरान त्वचा में बदलाव हो सकते हैं और कुछ दवाएं त्वचा को धूप के प्रति ज्यादा संवेदनशील बना सकती हैं। इसलिए सनस्क्रीन और धूप से बचाव को अपनी रोज की दिनचर्या का हिस्सा बनाना उपयोगी हो सकता है। लेकिन हर मरीज की जरूरत अलग होती है।

Oncare Cancer Hospital में कैंसर के इलाज के दौरान विशेषज्ञ परामर्श और कीमोथेरेपी से होने वाली समस्याओं को संभालने के लिए चिकित्सा मार्गदर्शन उपलब्ध है। अगर कीमोथेरेपी के दौरान धूप में जाने के बाद आपकी त्वचा पर तेज लालिमा, जलन, दाने या छाले हो रहे हैं, तो अपनी डॉक्टर की टीम को इसकी जानकारी दें।

डॉक्टर आपकी कीमोथेरेपी की दवाओं और त्वचा के लक्षणों को देखकर सही त्वचा देखभाल और धूप से बचाव की सलाह दे सकते हैं। बिना डॉक्टर की सलाह के कोई दवा वाली क्रीम या स्टेरॉयड क्रीम इस्तेमाल न करें।

डिस्क्लेमर

यह ब्लॉग केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है। किसी भी प्रकार के कैंसर, जांच रिपोर्ट या उपचार से संबंधित निर्णय लेने से पहले योग्य कैंसर विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

Frequently Asked Questions

Written and Verified by:

Dr. Gajendra Kumar Himanshu

Dr. Gajendra Kumar Himanshu Exp: 10 Yr

Medical Officer

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