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कीमो के दौरान प्रोबायोटिक्स और पेट की सेहत
कई लोग सोचते हैं कि कीमोथेरेपी का असर सिर्फ बाल झड़ने या कमजोरी तक सीमित होता है, लेकिन इलाज शुरू होने के बाद बहुत से मरीज सबसे पहले पेट से जुड़ी परेशानियों की शिकायत करते हैं। किसी को खाना खाने के बाद भारीपन लगता है, किसी को बार-बार टॉयलेट जाना पड़ता है और कुछ लोग कहते हैं कि अब उनका पेट पहले जैसा काम ही नहीं कर रहा।
कुछ मरीजों की भूख अचानक कम हो जाती है। कुछ लोगों को हर चीज का स्वाद अलग लगने लगता है। वहीं कई लोग ऐसे भी होते हैं जिन्हें गैस, पेट फूलना या दस्त जैसी परेशानी लगातार बनी रहती है। धीरे-धीरे मरीज खाना खाने से भी बचने लगता है क्योंकि उसे लगता है कि खाने के बाद फिर असहजता होगी।
इसी दौरान लोग “प्रोबायोटिक्स” के बारे में सुनना शुरू करते हैं। कोई दही खाने की सलाह देता है, कोई छाछ पीने को कहता है और कुछ लोग बाजार में मिलने वाले सप्लीमेंट लेने लगते हैं। लेकिन इलाज के दौरान हर चीज सोच-समझकर लेना जरूरी माना जाता है।
कीमो के दौरान पेट पहले जैसा क्यों महसूस नहीं होता
कीमोथेरेपी शरीर के अंदर कई बदलाव लाती है। इलाज सिर्फ कैंसर सेल्स पर असर नहीं डालता, बल्कि शरीर के दूसरे हिस्सों को भी प्रभावित कर सकता है। पेट और पाचन तंत्र भी इससे प्रभावित हो सकते हैं।
कुछ मरीजों में ये दिक्कतें देखने को मिलती हैं:
- दस्त
- कब्ज
- गैस
- पेट फूलना
- उल्टी जैसा महसूस होना
- भूख कम लगना
हर मरीज में यह परेशानी एक जैसी नहीं होती। कुछ लोगों को थोड़े समय के लिए दिक्कत होती है, जबकि कुछ मरीज लंबे समय तक परेशान रहते हैं।
प्रोबायोटिक्स का नाम लोग इतना क्यों लेने लगे हैं
चीज | लोग क्यों लेते हैं |
|---|---|
दही | पेट को हल्का महसूस कराने के लिए |
छाछ | पाचन में आराम के लिए |
कुछ फर्मेंटेड फूड | पेट संतुलन के लिए |
सप्लीमेंट्स | डॉक्टर की सलाह पर |
हालांकि हर मरीज को इन चीजों से एक जैसा फायदा महसूस हो, यह जरूरी नहीं माना जाता।
कई मरीजों को हल्का खाना ज्यादा आराम देता है
इलाज के दौरान बहुत ज्यादा तेल या मसाले वाला खाना कुछ लोगों को और परेशान कर सकता है। इसी वजह से कई परिवार हल्का भोजन देना शुरू कर देते हैं।
कुछ मरीज इन चीजों को ज्यादा आरामदायक मानते हैं:
- खिचड़ी
- दही
- सूप
- छाछ
- उबला हुआ हल्का खाना
कई लोग बताते हैं कि जब उन्होंने हल्का खाना शुरू किया, तब पेट थोड़ा कम परेशान महसूस हुआ।
बिना सलाह के प्रोबायोटिक सप्लीमेंट लेना सही नहीं माना जाता
आजकल इंटरनेट पर बहुत लोग खुद से दवाइयाँ और सप्लीमेंट लेना शुरू कर देते हैं। लेकिन कैंसर के इलाज के दौरान ऐसा करना हर बार सुरक्षित नहीं माना जाता।
कुछ मरीजों की इम्यूनिटी काफी कमजोर हो सकती है। ऐसे में डॉक्टर की सलाह के बिना कोई भी सप्लीमेंट लेना जोखिम बढ़ा सकता है।
इसी वजह से विशेषज्ञ से बात करना जरूरी माना जाता है।
शरीर के संकेतों को अनदेखा करना परेशानी बढ़ा सकता है
कुछ मरीज दस्त या पेट दर्द को सामान्य समझकर डॉक्टर को बताते ही नहीं हैं। लेकिन कुछ स्थितियों में तुरंत ध्यान देना जरूरी हो सकता है।
जैसे:
- लगातार दस्त होना
- बहुत ज्यादा कमजोरी
- पानी की कमी महसूस होना
- तेज पेट दर्द
- उल्टी रुक न रही हो
ऐसी स्थिति में डॉक्टर से बात करना जरूरी माना जाता है।
पानी और तरल भी पेट को संभालने में मदद कर सकते हैं
अगर मरीज को दस्त या उल्टी हो रही हो, तो शरीर तेजी से पानी खो सकता है। ऐसे समय में थोड़ी-थोड़ी मात्रा में तरल लेना मददगार हो सकता है।
कुछ लोग इन चीजों को शामिल करते हैं:
- नारियल पानी
- ORS
- छाछ
- हल्का सूप
- नींबू पानी
हर मरीज की जरूरत अलग हो सकती है, इसलिए डॉक्टर की सलाह जरूरी मानी जाती है।
परिवार का सहयोग भी मरीज के लिए राहत बन सकता है
जब कोई व्यक्ति लगातार पेट की परेशानी से गुजर रहा हो, तब परिवार की छोटी चीजें भी मायने रखती हैं।
जैसे:
- समय पर हल्का भोजन देना
- जबरदस्ती खाना न खिलाना
- ताजा भोजन बनाना
- पानी पीने की याद दिलाना
ऐसी बातें मरीज को थोड़ा सहज महसूस करा सकती हैं।
यदि आप प्रोबायोटिक्स के बारे में और अधिक जानकारी पढ़ना चाहते हैं, तो आप National Library of Medicine की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं।
आज ही परामर्श लें
कीमोथेरेपी के दौरान पेट की दिक्कतें काफी सामान्य मानी जाती हैं। कुछ मरीजों को हल्के भोजन और प्रोबायोटिक फूड से राहत महसूस हो सकती है, लेकिन बिना सलाह के सप्लीमेंट लेना सही नहीं माना जाता। सबसे जरूरी बात यह है कि मरीज अपने शरीर के बदलावों को समझे और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से खुलकर बात करे।
बेहतर कैंसर उपचार और मरीज सहायता सेवाओं के लिए Oncare Cancer Hospital जैसे अनुभवी कैंसर केंद्रों की जानकारी लेना उपयोगी हो सकता है।
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Frequently Asked Questions
हाँ, कई मरीजों में यह समस्या देखी जाती है।
कुछ लोगों को दही से आराम महसूस हो सकता है।
नहीं, पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी माना जाता है।
हाँ, शरीर में पानी कम होने पर कमजोरी ज्यादा महसूस हो सकती है।
Written and Verified by:
Dr. Gajendra Kumar Himanshu Exp: 10 Yr
Medical Officer
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