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कीमो के दौरान दिल की सेहत: कार्डियो-ऑन्कोलॉजी क्या है?
कैंसर के इलाज के दौरान केवल बीमारी का उपचार ही महत्वपूर्ण नहीं होता, बल्कि शरीर के अन्य अंगों की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी होती है। कुछ Chemotherapy और Targeted Therapy दवाएं कुछ मरीजों में हृदय पर प्रभाव डाल सकती हैं। ऐसे मामलों में कार्डियो-ऑन्कोलॉजी (Cardio-Oncology) की मदद से दिल की नियमित जांच, जोखिम का आकलन और समय पर उपचार किया जाता है, ताकि कैंसर का इलाज सुरक्षित रूप से जारी रखा जा सके।
इस लेख में हम आपको बताएंगे कि कार्डियो-ऑन्कोलॉजी क्या है, किन मरीजों को इसकी जरूरत पड़ सकती है, इलाज के दौरान दिल की निगरानी क्यों की जाती है और हृदय को स्वस्थ रखने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
कैंसर के इलाज में दिल की सेहत पर ध्यान देना क्यों जरूरी है?
जब किसी व्यक्ति को कैंसर का पता चलता है, तो उसका पूरा ध्यान इलाज शुरू करने पर होता है। लेकिन आधुनिक कैंसर उपचार का उद्देश्य केवल ट्यूमर का इलाज करना नहीं है, बल्कि मरीज के संपूर्ण स्वास्थ्य की रक्षा करना भी है।
कुछ कैंसर उपचार ऐसे होते हैं जो कुछ मरीजों में हृदय की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। इसका मतलब यह नहीं कि हर मरीज को दिल की समस्या होगी, लेकिन जिन लोगों में जोखिम अधिक होता है, उनके लिए इलाज के दौरान हृदय की निगरानी करना बेहतर माना जाता है। यही कारण है कि आज कई कैंसर केंद्रों में कार्डियो-ऑन्कोलॉजी विशेषज्ञों की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
कार्डियो-ऑन्कोलॉजी क्या है?
कार्डियो-ऑन्कोलॉजी चिकित्सा की एक विशेष शाखा है, जिसमें Oncologist और Cardiologist मिलकर मरीज की देखभाल करते हैं।
यदि किसी मरीज को पहले से हृदय रोग है या इलाज के दौरान दिल से जुड़ी कोई नई समस्या विकसित होने की संभावना है, तो दोनों विशेषज्ञ मिलकर ऐसी उपचार योजना बनाते हैं जिससे कैंसर का इलाज भी प्रभावी रहे और हृदय भी सुरक्षित रहे। इसका उद्देश्य कैंसर का इलाज रोकना नहीं, बल्कि उसे अधिक सुरक्षित तरीके से जारी रखना होता है।
क्या सभी मरीजों को दिल से जुड़ी परेशानी होती है?
नहीं। अधिकांश मरीज बिना किसी गंभीर हृदय संबंधी दुष्प्रभाव के अपना उपचार पूरा कर लेते हैं। हालांकि कुछ विशेष Chemotherapy या Targeted Therapy दवाओं से कुछ मरीजों में दिल की पंपिंग क्षमता प्रभावित हो सकती है, रक्तचाप बढ़ सकता है या दिल की धड़कन में बदलाव आ सकता है।
इसका जोखिम कई बातों पर निर्भर करता है, जैसे मरीज की उम्र, पहले से मौजूद बीमारियां, उपचार का प्रकार और दवाओं की मात्रा। इसलिए हर मरीज के लिए जोखिम अलग-अलग हो सकता है।
किन मरीजों में अधिक सावधानी बरती जाती है?
कुछ मरीजों में हृदय संबंधी जटिलताओं की संभावना अपेक्षाकृत अधिक होती है। उदाहरण के लिए, यदि किसी व्यक्ति को पहले से हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, मधुमेह या उच्च कोलेस्ट्रॉल है, तो डॉक्टर अतिरिक्त निगरानी की सलाह दे सकते हैं।
इसी तरह अधिक उम्र, धूम्रपान की आदत, पहले छाती पर Radiation Therapy लेना या ऐसी दवाएं लेना जिनका हृदय पर प्रभाव पड़ सकता है, जोखिम बढ़ा सकते हैं।
ऐसे मरीजों में इलाज शुरू होने से पहले और उपचार के दौरान समय-समय पर हृदय की जांच की जाती है ताकि किसी भी बदलाव का समय रहते पता चल सके।
उपचार से पहले कौन-सी जांच की जा सकती है?
यदि डॉक्टर को लगता है कि हृदय की निगरानी आवश्यक है, तो कुछ सामान्य जांच कराई जा सकती हैं।
- ECG (Electrocardiogram) से दिल की धड़कन की जांच की जाती है।
- 2D Echo (Echocardiography) से हृदय की पंपिंग क्षमता का आकलन किया जाता है।
- जरूरत पड़ने पर कुछ Blood Tests भी किए जा सकते हैं, जिनसे हृदय से जुड़े संकेतकों की जानकारी मिलती है।
हर मरीज को सभी जांचें कराने की जरूरत नहीं होती। जांच का निर्णय मरीज की स्थिति के अनुसार लिया जाता है।
किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?
इलाज के दौरान यदि सांस सामान्य से अधिक फूलने लगे, सीने में दर्द महसूस हो, दिल की धड़कन तेज या अनियमित लगे, पैरों या टखनों में सूजन दिखाई दे, अत्यधिक कमजोरी महसूस हो या बार-बार चक्कर आए, तो तुरंत अपने डॉक्टर को बताना चाहिए।
इन लक्षणों का मतलब हमेशा हृदय की बीमारी नहीं होता, लेकिन समय पर जांच से सही कारण का पता लगाया जा सकता है।
दिल को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?
कैंसर उपचार के दौरान कुछ अच्छी आदतें हृदय की सुरक्षा में मदद कर सकती हैं।
- संतुलित और पौष्टिक भोजन लें।
- डॉक्टर की सलाह के अनुसार हल्की शारीरिक गतिविधि जारी रखें।
- धूम्रपान और शराब से बचें।
- रक्तचाप और शुगर को नियंत्रित रखें।
- पर्याप्त नींद लें।
- Follow-up विजिट समय पर कराएं।
- बिना डॉक्टर की सलाह के कोई नई दवा या सप्लीमेंट शुरू न करें।
कार्डियो-ऑन्कोलॉजी से जुड़े मिथक और तथ्य
मिथक | तथ्य |
|---|---|
Chemotherapy लेने वाले हर मरीज को दिल की बीमारी हो जाती है। | ऐसा नहीं है। अधिकांश मरीजों में गंभीर हृदय समस्या नहीं होती। |
यदि पहले दिल की बीमारी है, तो कैंसर का इलाज नहीं हो सकता। | सही निगरानी और विशेषज्ञों की देखरेख में उपचार सुरक्षित रूप से किया जा सकता है। |
दिल की जांच केवल तब होती है जब लक्षण दिखाई दें। | कई मरीजों में लक्षण आने से पहले ही नियमित जांच की जाती है। |
सांस फूलना हमेशा कैंसर की वजह से होता है। | यह हृदय या फेफड़ों सहित कई कारणों से हो सकता है, इसलिए जांच जरूरी है। |
डॉक्टर से कब संपर्क करें?
यदि इलाज के दौरान सीने में दर्द, अचानक सांस फूलना, पैरों में सूजन, धड़कन का असामान्य महसूस होना या लगातार बढ़ती कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत अपने Oncologist से संपर्क करें। आवश्यकता पड़ने पर आपको Cardiologist से भी परामर्श लेने की सलाह दी जा सकती है।
कार्डियो-ऑन्कोलॉजी और कैंसर उपचार के बारे में अधिक जानकारी के लिए National Cancer Institute की आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं।
आज ही परामर्श लें
यदि आपको Chemotherapy शुरू होने वाली है या उपचार के दौरान हृदय से जुड़ी कोई परेशानी महसूस हो रही है, तो समय पर विशेषज्ञ की सलाह लेना महत्वपूर्ण है। Oncare Cancer Hospital में विशेषज्ञ आपकी स्वास्थ्य स्थिति का मूल्यांकन कर आपकी जरूरत के अनुसार सुरक्षित और व्यक्तिगत उपचार योजना बनाने में सहायता कर सकते हैं।
डिस्क्लेमर
यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यह किसी भी प्रकार से डॉक्टर की सलाह, जांच या उपचार का विकल्प नहीं है। उपचार के दौरान यदि हृदय से संबंधित कोई भी लक्षण दिखाई दें, तो योग्य विशेषज्ञ से तुरंत परामर्श लें।
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Frequently Asked Questions
नहीं। यह मरीज के उपचार, स्वास्थ्य स्थिति और हृदय संबंधी जोखिम पर निर्भर करता है।
कुछ दवाएं कुछ मरीजों में हृदय पर प्रभाव डाल सकती हैं, इसलिए जरूरत पड़ने पर नियमित निगरानी की जाती है।
इससे हृदय की शुरुआती कार्यक्षमता का पता चलता है, जिससे उपचार के दौरान किसी भी बदलाव की तुलना करना आसान होता है।
इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज न करें। अपने Oncologist को तुरंत बताएं ताकि जरूरत पड़ने पर हृदय की जांच की जा सके।
Written and Verified by:
Dr. Gajendra Kumar Himanshu Exp: 10 Yr
Medical Officer
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