मेडिकल, सर्जिकल और रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट में क्या अंतर होता है?

oncare team
Updated on Aug 3, 2026 16:53 IST

By Dr. Gajendra Kumar Himanshu

मेडिकल, सर्जिकल और रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट

कैंसर का इलाज शुरू करते समय मरीज और परिवार के सामने कई नए नाम आते हैं। मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट, सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट और रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट भी इनमें शामिल हैं। तीनों कैंसर विशेषज्ञ हैं, लेकिन इलाज में उनका काम एक जैसा नहीं होता। कोई दवाओं से बीमारी को नियंत्रित करता है, कोई सर्जरी के जरिए ट्यूमर हटाता है और कोई रेडिएशन की मदद से कैंसर कोशिकाओं को निशाना बनाता है।

इस लेख में हम आपको बताएंगे कि इन तीनों ऑन्कोलॉजिस्ट की जिम्मेदारियां कैसे अलग होती हैं, किस डॉक्टर की जरूरत कब पड़ सकती है और कई मामलों में ये विशेषज्ञ मिलकर इलाज की दिशा क्यों तय करते हैं।

एक मरीज के इलाज में कई कैंसर विशेषज्ञ क्यों शामिल होते हैं?

कैंसर का नाम एक है, लेकिन हर मरीज में इसकी स्थिति अलग हो सकती है। किसी व्यक्ति में छोटा ट्यूमर एक ही अंग तक सीमित रहता है, जबकि किसी दूसरे मरीज में बीमारी आसपास के ऊतकों या शरीर के दूसरे हिस्सों तक पहुंच सकती है। कैंसर कोशिकाओं का प्रकार और उनके बढ़ने की गति भी हर मामले में एक जैसी नहीं होती। इसी वजह से कैंसर का कोई एक इलाज सभी मरीजों के लिए सही नहीं माना जा सकता।

मान लीजिए किसी मरीज का ट्यूमर ऑपरेशन से पूरी तरह निकाला जा सकता है। ऐसे मामले में सर्जरी इलाज का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकती है। वहीं, यदि बीमारी शरीर के दूसरे हिस्सों तक पहुंच चुकी है, तो ऐसी दवाओं की जरूरत पड़ सकती है जो पूरे शरीर में काम करें। कुछ स्थितियों में ट्यूमर को छोटा करने या किसी खास हिस्से में मौजूद कैंसर कोशिकाओं को नियंत्रित करने के लिए Radiation Therapy दी जाती है।

कई मरीजों को इनमें से एक से अधिक उपचार की जरूरत पड़ती है। ऐसे में केवल यह तय करना जरूरी नहीं होता कि कौन-सा इलाज दिया जाए। यह भी समझना पड़ता है कि इलाज किस क्रम में शुरू होगा।

मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट: जब कैंसर का इलाज दवाओं से किया जाता है

मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट का काम केवल Chemotherapy देना नहीं होता। वे कैंसर के प्रकार, उसकी Stage और मरीज की सेहत को ध्यान में रखते हुए दवाओं से होने वाले इलाज की योजना बनाते हैं। इसके लिए Biopsy Report, Blood Test, MRI, CT Scan या PET Scan जैसी जांचों को देखा जाता है।

कैंसर की जरूरत के अनुसार Chemotherapy, Immunotherapy, Targeted Therapy या Hormone Therapy की सलाह दी जा सकती है। इलाज शुरू होने के बाद मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट यह भी देखते हैं कि दवाएं कितना असर कर रही हैं और मरीज को किस तरह के Side Effects हो रहे हैं। जरूरत पड़ने पर दवा की मात्रा या इलाज के समय में बदलाव किया जा सकता है। कई मरीज इलाज पूरा होने के बाद भी नियमित Follow-up के लिए उनसे मिलते हैं।

सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट: कैंसर सर्जरी केवल ट्यूमर निकालना नहीं है

सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट ऐसे विशेषज्ञ सर्जन होते हैं जिन्हें कैंसर से जुड़ी सर्जरी का विशेष प्रशिक्षण होता है। ऑपरेशन की योजना बनाते समय वे ट्यूमर के आकार और उसकी जगह के साथ यह भी देखते हैं कि बीमारी आसपास के ऊतकों या अंगों तक पहुंची है या नहीं।

सर्जरी के दौरान ट्यूमर के साथ जरूरत के अनुसार प्रभावित ऊतक या आसपास मौजूद कुछ Lymph Nodes भी निकाले जा सकते हैं। हालांकि, हर कैंसर में ऑपरेशन जरूरी नहीं होता। यदि बीमारी काफी फैल चुकी हो या सर्जरी सुरक्षित न हो, तो दूसरे उपचारों पर विचार किया जा सकता है। कुछ मामलों में ऑपरेशन का उद्देश्य ट्यूमर के कारण होने वाले दर्द, दबाव या रुकावट को कम करना भी हो सकता है।

रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट: जब इलाज एक खास हिस्से पर केंद्रित होता है

रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट Radiation Therapy की पूरी योजना तैयार करते हैं। वे तय करते हैं कि शरीर के किस हिस्से को उपचार देना है, कितनी Radiation Dose की जरूरत होगी और इलाज कितने सत्रों में पूरा किया जाएगा।

Radiation Therapy सर्जरी से पहले ट्यूमर छोटा करने या ऑपरेशन के बाद बची हुई कैंसर कोशिकाओं के जोखिम को कम करने के लिए दी जा सकती है। उन्नत कैंसर में इसका उपयोग दर्द, रक्तस्राव या ट्यूमर के दबाव से राहत देने के लिए भी किया जा सकता है। इलाज के दौरान रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट मरीज की प्रतिक्रिया और संभावित Side Effects की निगरानी करते हैं।

तीन विशेषज्ञ, लेकिन उद्देश्य एक

तीनों ऑन्कोलॉजिस्ट का काम अलग है, लेकिन उनका उद्देश्य मरीज के लिए उपयुक्त और सुरक्षित इलाज तय करना होता है।

तीनों कैंसर विशेषज्ञों की भूमिका एक नजर में

कैंसर विशेषज्ञ

इलाज का प्रमुख तरीका

इलाज में मुख्य भूमिका

मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट

Chemotherapy और अन्य दवा-आधारित थेरेपी

दवाओं से कैंसर का इलाज और उपचार के असर की निगरानी

सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट

कैंसर सर्जरी

ट्यूमर और जरूरत के अनुसार प्रभावित ऊतकों को हटाना

रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट

Radiation Therapy

लक्षित किरणों से कैंसर कोशिकाओं को नियंत्रित या नष्ट करना

किसी मरीज को केवल एक विशेषज्ञ की जरूरत हो सकती है। वहीं, दूसरे मरीज के इलाज में तीनों विशेषज्ञ अलग-अलग समय पर शामिल हो सकते हैं।

इलाज का क्रम कैसे तय किया जाता है?

कैंसर के इलाज में कई बार सबसे कठिन सवाल यह होता है कि शुरुआत कहां से की जाए। पहले सर्जरी होनी चाहिए या दवाएं दी जानी चाहिए? Radiation Therapy ऑपरेशन से पहले बेहतर होगी या बाद में? इन सवालों का जवाब केवल कैंसर के नाम से नहीं मिलता।

डॉक्टर Biopsy Report, कैंसर की Stage, ट्यूमर की जगह, उसके आकार और मरीज की शारीरिक स्थिति को देखते हैं। इसके बाद इलाज का क्रम तय किया जाता है।

उदाहरण के लिए, Breast Cancer के कुछ मरीजों में पहले सर्जरी की जा सकती है और उसके बाद जरूरत के अनुसार Chemotherapy या Radiation Therapy दी जाती है। दूसरी ओर, कुछ मरीजों में पहले दवाओं से ट्यूमर छोटा करने की कोशिश की जा सकती है। इसी तरह कुछ Rectal Cancer मामलों में सर्जरी से पहले दवाओं और रेडिएशन का उपयोग किया जा सकता है।

इसका मतलब है कि एक ही प्रकार के कैंसर वाले दो मरीजों का Treatment Plan भी अलग हो सकता है।

Tumor Board इलाज को बेहतर तरीके से समझने में कैसे मदद करता है?

जटिल मामलों में मरीज की रिपोर्ट पर Tumor Board में चर्चा की जा सकती है। यह कोई अलग उपचार नहीं, बल्कि कई विशेषज्ञों द्वारा एक साथ की जाने वाली मेडिकल समीक्षा है।

इस बैठक में मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट, सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट और रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट के साथ रेडियोलॉजिस्ट और पैथोलॉजिस्ट भी शामिल हो सकते हैं। जरूरत के अनुसार अन्य विशेषज्ञों की राय भी ली जाती है।

पैथोलॉजिस्ट Biopsy से मिली जानकारी को समझने में मदद करते हैं, जबकि रेडियोलॉजिस्ट Scan में दिखाई देने वाली बीमारी की स्थिति के बारे में बताते हैं। इसके बाद अलग-अलग उपचार विकल्पों पर चर्चा की जाती है।

इस संयुक्त प्रक्रिया का फायदा यह है कि इलाज को केवल एक नजरिए से नहीं देखा जाता। मरीज की बीमारी और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग विशेषज्ञ अपनी राय देते हैं।

ऑन्कोलॉजिस्ट से मिलने से पहले क्या तैयारी करें?

डॉक्टर से बातचीत के दौरान कई नई बातें सुनने को मिल सकती हैं। इसलिए पहले से कुछ सवाल लिख लेना उपयोगी होता है। अपनी सभी जांच रिपोर्ट, पहले हुए इलाज की जानकारी और वर्तमान में ली जा रही दवाओं की सूची साथ रखें।

परामर्श के दौरान आप ये सवाल पूछ सकते हैं:

  • कैंसर का प्रकार और Stage क्या है?
  • सुझाए गए इलाज का मुख्य उद्देश्य क्या है?
  • इलाज की शुरुआत किस थेरेपी से होगी?
  • क्या सर्जरी, दवाएं और रेडिएशन में से एक से अधिक उपचारों की जरूरत पड़ सकती है?
  • इलाज के संभावित Side Effects क्या हो सकते हैं?
  • क्या इस मामले पर Tumor Board में चर्चा की जरूरत है?
  • इलाज के बाद किस तरह के Follow-up की आवश्यकता होगी?

यदि उपचार के कई विकल्प बताए गए हों या किसी बड़े निर्णय को लेकर संदेह हो, तो Second Opinion लेना भी उपयोगी हो सकता है।

अगर आप कैंसर के बारे में और ज्यादा जानकारी पढ़ना चाहते हैं तो आप National Cancer Institute की ऑफिशियल वेबसाइट पर जा सकते हैं।

आज ही परामर्श लें

यदि कैंसर की जांच के बाद यह स्पष्ट नहीं है कि किस विशेषज्ञ से मिलना चाहिए या इलाज की शुरुआत कैसे होगी, तो Oncare Cancer Hospital में ऑन्कोलॉजी विशेषज्ञ से परामर्श लिया जा सकता है। जांच रिपोर्ट और मरीज की वर्तमान स्थिति की समीक्षा के बाद इलाज के उपलब्ध विकल्पों और आगे की प्रक्रिया को समझने में मदद मिल सकती है।

डिस्क्लेमर

यह लेख सामान्य जानकारी और जागरूकता के लिए है। इसमें दी गई जानकारी किसी डॉक्टर की जांच, व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। कैंसर की जांच या इलाज से जुड़े निर्णय योग्य ऑन्कोलॉजिस्ट की सलाह के आधार पर लें।

Frequently Asked Questions

Written and Verified by:

Dr. Gajendra Kumar Himanshu

Dr. Gajendra Kumar Himanshu Exp: 10 Yr

Medical Officer

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