कीमो से हाथ-पैरों में झुनझुनी और सुन्नपन (न्यूरोपैथी): कारण और राहत

oncare team
Updated on Oct 12, 2026 17:20 IST

By Dr. Gajendra Kumar Himanshu

कीमो से हाथ-पैरों में झुनझुनी और सुन्नपन

कीमोथेरेपी के दौरान कुछ मरीजों को हाथों और पैरों में झुनझुनी, सुन्नपन, जलन या दर्द महसूस हो सकता है। इसे कीमोथेरेपी से होने वाली नसों की समस्या या परिधीय न्यूरोपैथी (Chemotherapy-Induced Peripheral Neuropathy) कहा जाता है। यह समस्या कुछ खास कीमोथेरेपी दवाओं के कारण हो सकती है और इसकी गंभीरता हर मरीज में अलग हो सकती है। लक्षण शुरू होते ही कैंसर विशेषज्ञ को बताना जरूरी है, क्योंकि समय पर उपचार और दवा में जरूरी बदलाव से परेशानी को संभालने में मदद मिल सकती है।

इस लेख में हम आसान भाषा में समझेंगे कि कीमोथेरेपी के दौरान हाथ-पैरों में झुनझुनी और सुन्नपन क्यों होता है, इसके कौन-कौन से लक्षण हो सकते हैं और यह रोजमर्रा के काम को कैसे प्रभावित कर सकता है। साथ ही, जानेंगे कि इस परेशानी में राहत के लिए डॉक्टर कौन से उपाय अपना सकते हैं और मरीज घर पर किन बातों का ध्यान रख सकता है।

कीमोथेरेपी से न्यूरोपैथी क्यों होती है?

कुछ कीमोथेरेपी दवाएं कैंसर कोशिकाओं के साथ-साथ शरीर की नसों को भी प्रभावित कर सकती हैं। नसों पर असर पड़ने से हाथों और पैरों में झुनझुनी, सुन्नपन, जलन या दर्द महसूस हो सकता है। यह समस्या अक्सर हाथों और पैरों से शुरू होती है और कुछ मामलों में हाथों या पैरों के दूसरे हिस्सों तक बढ़ सकती है।

हर कीमोथेरेपी दवा से न्यूरोपैथी नहीं होती। कुछ दवाओं में इसका जोखिम अधिक होता है, इसलिए डॉक्टर इलाज शुरू करने से पहले मरीज की स्वास्थ्य स्थिति और पहले से मौजूद नसों की समस्या जैसी बातों को ध्यान में रखते हैं।

कीमोथेरेपी और उसके अलग-अलग दुष्प्रभावों को समझने के लिए कीमोथेरेपी के साइड इफेक्ट्स भी पढ़ सकते हैं।

हाथ-पैरों में न्यूरोपैथी के लक्षण क्या हैं?

न्यूरोपैथी के लक्षण धीरे-धीरे शुरू हो सकते हैं या उपचार के दौरान किसी समय दिखाई दे सकते हैं। कुछ मरीजों में कीमोथेरेपी पूरी होने के बाद भी ये लक्षण कुछ समय तक बने रह सकते हैं।

आम लक्षण

  • हाथों और पैरों में झुनझुनी या चींटी चलने जैसा महसूस होना
  • उंगलियों या पैरों में सुन्नपन
  • जलन या चुभन
  • हल्का या तेज दर्द
  • गर्म और ठंडी चीजों को महसूस करने में परेशानी
  • हाथों में कमजोरी
  • चलने या संतुलन बनाने में परेशानी

कभी-कभी यह समस्या रोजमर्रा के छोटे कामों को भी मुश्किल बना सकती है, जैसे बटन लगाना, लिखना, चीजें पकड़ना या ठीक से चलना।

अगर आपको कीमोथेरेपी के बाद हाथ-पैर में सुन्नपन महसूस हो रहा है, तो कीमोथेरेपी के बाद हाथ-पैर में सुन्नपन के बारे में भी विस्तार से पढ़ सकते हैं।

कौन सी कीमोथेरेपी से न्यूरोपैथी हो सकती है?

न्यूरोपैथी का जोखिम कीमोथेरेपी की दवा, उसकी मात्रा, इलाज की अवधि और मरीज की व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है। टैक्सेन, प्लैटिनम-आधारित दवाएं और कुछ अन्य कीमोथेरेपी दवाएं नसों को प्रभावित कर सकती हैं।

इसलिए अगर आपको पहले से डायबिटीज, नसों की समस्या या हाथ-पैर में सुन्नपन जैसी परेशानी है, तो कीमोथेरेपी (Chemotherapy) शुरू होने से पहले डॉक्टर को इसकी जानकारी दें।

न्यूरोपैथी की जांच कैसे होती है?

अधिकतर मामलों में डॉक्टर मरीज के लक्षणों और शारीरिक जांच के आधार पर न्यूरोपैथी का पता लगा सकते हैं। डॉक्टर पूछ सकते हैं कि झुनझुनी कब शुरू हुई, कितनी है और क्या इससे चलने या रोजमर्रा के काम करने में परेशानी हो रही है। जरूरत पड़ने पर नसों से जुड़ी दूसरी जांच भी की जा सकती है।

मरीज के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि वह लक्षणों को छिपाए नहीं। शुरुआत में हल्की लगने वाली समस्या बढ़ने पर दैनिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकती है।

न्यूरोपैथी में राहत के लिए क्या किया जा सकता है?

न्यूरोपैथी का इलाज हर मरीज के लिए एक जैसा नहीं होता। डॉक्टर लक्षणों की गंभीरता और कैंसर के इलाज को ध्यान में रखकर योजना बनाते हैं। अगर न्यूरोपैथी बहुत अधिक हो जाए या हाथ-पैरों की कार्यक्षमता प्रभावित होने लगे, तो डॉक्टर कीमोथेरेपी की मात्रा कम करने, उपचार में बदलाव करने या कुछ मामलों में दवा बदलने पर विचार कर सकते हैं।

दर्द वाली न्यूरोपैथी में डॉक्टर कुछ दवाएं दे सकते हैं। वर्तमान दिशानिर्देशों के अनुसार, दर्दनाक कीमोथेरेपी-जनित न्यूरोपैथी में डुलोक्सेटीन एक ऐसी दवा है जिसके उपयोग के समर्थन में प्रमाण उपलब्ध हैं, हालांकि इससे मिलने वाला लाभ हर मरीज में समान नहीं होता।

बिना डॉक्टर की सलाह के दर्द की दवा, विटामिन या कोई सप्लीमेंट शुरू न करें।

घर पर किन बातों का ध्यान रखें?

सुन्नपन होने पर चोट या जलने का पता देर से चल सकता है। इसलिए मरीज को हाथ-पैरों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

कुछ आसान सावधानियां:

  • बहुत गर्म पानी या गर्म वस्तुओं को छूने से पहले तापमान जांच लें।
  • घर में फर्श पर ऐसी चीजें न रखें जिनसे फिसलने या गिरने का खतरा हो।
  • आरामदायक और सही आकार के जूते पहनें।
  • हाथ-पैरों में कट, चोट या छाले रोज देखें।
  • चलते समय संतुलन में परेशानी हो तो परिवार की मदद लें।

न्यूरोपैथी की वजह से संतुलन प्रभावित हो सकता है, इसलिए गिरने से बचाव भी महत्वपूर्ण है।

न्यूरोपैथी कितने समय तक रहती है?

हर मरीज में इसका समय अलग हो सकता है। कुछ लोगों में कीमोथेरेपी पूरी होने के बाद धीरे-धीरे लक्षण कम होने लगते हैं, जबकि कुछ मरीजों में समस्या लंबे समय तक रह सकती है। कुछ मामलों में हाथों की नसों से जुड़ी परेशानी पैरों की तुलना में जल्दी सुधर सकती है।

स्थिति

क्या हो सकता है

हल्की झुनझुनी

इलाज के दौरान निगरानी की जरूरत

लगातार सुन्नपन

डॉक्टर को जानकारी देना जरूरी

जलन या दर्द

लक्षणों के अनुसार दवा की जरूरत हो सकती है

चलने में परेशानी

गिरने से बचाव और डॉक्टर की जांच जरूरी

हाथों की कमजोरी

उपचार में बदलाव पर डॉक्टर विचार कर सकते हैं

इसलिए कीमोथेरेपी के हर चक्र के दौरान अपने लक्षणों के बारे में डॉक्टर को बताना बेहतर है।

कब तुरंत डॉक्टर को बताएं?

अगर झुनझुनी या सुन्नपन तेजी से बढ़ रहा है, तेज दर्द हो रहा है, चीजें पकड़ने में परेशानी हो रही है या चलने और संतुलन बनाने में दिक्कत हो रही है, तो अपने कैंसर विशेषज्ञ को जल्द बताएं। ऐसे लक्षणों को सहते रहना जरूरी नहीं है।

समय पर जानकारी मिलने से डॉक्टर यह तय कर सकते हैं कि मौजूदा उपचार जारी रखना है या उसमें कोई बदलाव जरूरी है।

अगर आप कीमोथेरेपी के बारे में और ज्यादा जानकारी पढ़ना चाहते हैं तो आप National Cancer Institute की ऑफिशियल वेबसाइट को देख सकते हैं।

आज ही परामर्श लें

कीमोथेरेपी के दौरान हाथ-पैरों में झुनझुनी और सुन्नपन आम दुष्प्रभावों में से एक हो सकता है, लेकिन इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लक्षणों की गंभीरता के अनुसार सही देखभाल और उपचार से परेशानी को संभालने में मदद मिल सकती है। Oncare Cancer Hospital के कैंसर विशेषज्ञों से परामर्श लेकर न्यूरोपैथी के कारण, लक्षण और आपके लिए उचित राहत के विकल्पों को समझें।

डिस्क्लेमर

यह ब्लॉग केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है। किसी भी प्रकार के कैंसर, जांच रिपोर्ट या इलाज से संबंधित निर्णय लेने से पहले योग्य कैंसर विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।

Frequently Asked Questions

Written and Verified by:

Dr. Gajendra Kumar Himanshu

Dr. Gajendra Kumar Himanshu Exp: 10 Yr

Medical Officer

Book an Appointment

Related Blogs

क्रोनिक मायलॉइड ल्यूकेमिया

क्रोनिक मायलॉइड ल्यूकेमिया (CML): गोलियों से कंट्रोल होने वाला ब्लड कैंसर

CML क्या है, इसके लक्षण, जांच और TKI दवाओं से इलाज कैसे होता है, जानें। Oncare Cancer Hospital में CML के उपचार और विशेषज्ञ परामर्श की जानकारी पाएं।

Read more

कैंसर के इलाज के दौरान पालतू जानवर

कैंसर के इलाज के दौरान पालतू जानवर: क्या सावधानियां जरूरी हैं?

कैंसर के इलाज के दौरान पालतू जानवरों के साथ रहना कितना सुरक्षित है? जानें संक्रमण से बचने के लिए जरूरी सावधानियां, साफ-सफाई, काटने और खरोंच से बचाव के आसान तरीके।

Read more

क्या मैमोग्राम की रेडिएशन से कैंसर हो सकता है?

क्या मैमोग्राम की रेडिएशन से कैंसर हो सकता है? जानें कितनी सुरक्षित है यह जांच

मैमोग्राम में कितनी रेडिएशन होती है, कैंसर का जोखिम कितना है और 3D मैमोग्राम कितना सुरक्षित है, यह आसान भाषा में Oncare Cancer Hospital से विस्तार से जानें।

Read more