क्या मैमोग्राम की रेडिएशन से कैंसर हो सकता है? जानें कितनी सुरक्षित है यह जांच

oncare team
Updated on Oct 7, 2026 17:53 IST

By Dr. Gajendra Kumar Himanshu

क्या मैमोग्राम की रेडिएशन से कैंसर हो सकता है?

मैमोग्राम में एक्स-रे की बहुत कम मात्रा वाली रेडिएशन का इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए इससे रेडिएशन के कारण कैंसर होने का जोखिम पूरी तरह शून्य नहीं माना जाता, लेकिन यह जोखिम बहुत कम होता है। विशेषज्ञ संस्थाओं के अनुसार, मैमोग्राफी (Mammography) से शुरुआती ब्रेस्ट कैंसर (Breast Cancer) का पता लगाने का फायदा आमतौर पर इस छोटे रेडिएशन जोखिम से कहीं ज्यादा होता है। आधुनिक मैमोग्राफी मशीनें जरूरी तस्वीर लेने के लिए कम से कम आवश्यक रेडिएशन का इस्तेमाल करती हैं।

आज के इस ब्लॉग में हम समझेंगे कि मैमोग्राम में कितनी रेडिएशन होती है, क्या इससे कैंसर का खतरा बढ़ सकता है, बार-बार मैमोग्राम करवाना कितना सुरक्षित है और डॉक्टर इस जांच को क्यों महत्वपूर्ण मानते हैं। साथ ही यह भी जानेंगे कि किन महिलाओं को मैमोग्राफी की जरूरत पड़ सकती है और जांच से पहले किन बातों की जानकारी डॉक्टर को देनी चाहिए।

मैमोग्राम में रेडिएशन क्यों इस्तेमाल होती है?

मैमोग्राफी एक विशेष प्रकार की एक्स-रे जांच है, जिसमें स्तन के अंदर के टिश्यू की तस्वीर ली जाती है। इसकी मदद से ऐसी छोटी गांठ या असामान्य बदलाव भी दिखाई दे सकते हैं जिन्हें हाथ से महसूस करना मुश्किल हो सकता है।

इस जांच में इस्तेमाल होने वाली एक्स-रे की मात्रा सामान्य एक्स-रे जांचों की तुलना में भी कम रखी जाती है। उदाहरण के लिए, स्क्रीनिंग डिजिटल मैमोग्राफी की सामान्य प्रभावी रेडिएशन डोज लगभग 0.28 मिलीसीवर्ट मानी जाती है। वास्तविक मात्रा मशीन, तकनीक और व्यक्ति के शरीर के आकार जैसी बातों के अनुसार बदल सकती है।

अगर आप मैमोग्राफी को पहली बार समझना चाहते हैं, तो मैमोग्राफी क्या है और यह ब्रेस्ट कैंसर की जांच में कैसे मदद करती है भी पढ़ सकते हैं।

क्या मैमोग्राम की रेडिएशन से कैंसर हो सकता है?

सैद्धांतिक रूप से एक्स-रे जैसी आयनाइजिंग रेडिएशन (Ionizing Radiation) से लंबे समय में कैंसर का बहुत छोटा जोखिम हो सकता है। लेकिन मैमोग्राम में रेडिएशन की मात्रा बहुत कम होती है। इसलिए एक सामान्य मैमोग्राम से रेडिएशन के कारण कैंसर होने की संभावना बहुत कम मानी जाती है।

अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के अनुसार, मैमोग्राफी में रेडिएशन का जोखिम बहुत छोटा है और शुरुआती ब्रेस्ट कैंसर का पता लगाने के फायदे इस जोखिम से अधिक हैं।

इसका मतलब यह नहीं है कि रेडिएशन का कोई जोखिम ही नहीं है। सही बात यह है कि जोखिम बहुत कम है और जरूरत के अनुसार की गई जांच का फायदा आमतौर पर उससे कहीं ज्यादा होता है।

एक मैमोग्राम में कितनी रेडिएशन होती है?

रेडिएशन की मात्रा को समझने के लिए नीचे एक सामान्य उदाहरण दिया गया है। ये औसत अनुमान हैं, हर व्यक्ति की वास्तविक डोज बिल्कुल समान नहीं होती।

जांच

अनुमानित प्रभावी रेडिएशन डोज

प्राकृतिक रेडिएशन के लगभग बराबर

डिजिटल स्क्रीनिंग मैमोग्राफी

0.28 मिलीसीवर्ट

लगभग 34 दिन

3D मैमोग्राफी

0.34 मिलीसीवर्ट

लगभग 42 दिन

डेंटल एक्स-रे

0.005 मिलीसीवर्ट

लगभग 1 दिन

डीईएक्सए जांच

0.001 मिलीसीवर्ट

लगभग 3 घंटे

ये केवल सामान्य तुलना के लिए दिए गए आंकड़े हैं। वास्तविक रेडिएशन डोज मशीन, तकनीक और मरीज की शारीरिक बनावट के अनुसार अलग हो सकती है।

बार-बार मैमोग्राम करवाना क्या सुरक्षित है?

अगर डॉक्टर ने आपकी उम्र, जोखिम और स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर नियमित मैमोग्राफी की सलाह दी है, तो केवल रेडिएशन के डर से जांच छोड़ना सही नहीं है। स्क्रीनिंग का उद्देश्य ब्रेस्ट कैंसर को उस समय पकड़ना है जब वह छोटा हो और उपचार के विकल्प अधिक हो सकते हैं।

हालांकि, हर महिला को अपनी तरफ से बार-बार मैमोग्राम करवाने की जरूरत नहीं होती। स्क्रीनिंग की उम्र और अंतराल व्यक्ति के जोखिम और डॉक्टर की सलाह के अनुसार तय किए जाते हैं।

अगर स्तन में गांठ या कोई दूसरा बदलाव है, तो इसे केवल नियमित स्क्रीनिंग का मामला मानकर इंतजार नहीं करना चाहिए। डॉक्टर जरूरत के अनुसार डायग्नोस्टिक मैमोग्राफी (Diagnostic Mammography), अल्ट्रासाउंड (Ultrasound) या दूसरी जांच की सलाह दे सकते हैं।

ब्रेस्ट कैंसर के शुरुआती संकेतों को समझने के लिए महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण भी देख सकते हैं।

मैमोग्राफी के फायदे क्या हैं?

मैमोग्राफी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह ब्रेस्ट कैंसर को शुरुआती अवस्था में पहचानने में मदद कर सकती है। कई बार कैंसर इतना छोटा होता है कि महिला को कोई गांठ महसूस नहीं होती, लेकिन मैमोग्राम में असामान्य बदलाव दिखाई दे सकता है।

शुरुआती पहचान से डॉक्टर को बीमारी की स्थिति समझने और उपचार के विकल्पों पर समय रहते विचार करने का मौका मिलता है।

मैमोग्राम और 3D मैमोग्राम में क्या अंतर है?

3D मैमोग्राफी, जिसे डिजिटल ब्रेस्ट टोमोसिंथेसिस (Digital Breast Tomosynthesis) भी कहा जाता है, स्तन की कई कोणों से तस्वीरें लेकर अधिक विस्तृत तस्वीर तैयार करती है। कुछ मशीनों में इसकी रेडिएशन डोज सामान्य मैमोग्राम से थोड़ी अधिक हो सकती है, लेकिन यह भी निर्धारित सुरक्षित स्तरों के भीतर रहती है।

बात

सामान्य मैमोग्राम

3D मैमोग्राम

तस्वीर

स्तन की एक्स-रे तस्वीर

कई कोणों से तस्वीरें

रेडिएशन

कम मात्रा

कुछ प्रणालियों में थोड़ी अधिक

उद्देश्य

कैंसर की शुरुआती पहचान

अधिक विस्तृत तस्वीर में मदद

किसे चाहिए

डॉक्टर की सलाह के अनुसार

डॉक्टर की सलाह के अनुसार

हर महिला के लिए 3D मैमोग्राम जरूरी नहीं होता। डॉक्टर आपकी उम्र, स्तन की बनावट, लक्षण और अन्य जोखिमों को देखकर उचित जांच चुन सकते हैं।

मैमोग्राफी से पहले किन बातों का ध्यान रखें?

मैमोग्राम कराने से पहले कुछ छोटी-छोटी बातों की जानकारी रेडियोलॉजी टीम को देना उपयोगी होता है।

  • अगर गर्भावस्था की संभावना है तो पहले बताएं।
  • अगर पहले मैमोग्राम या स्तन की कोई सर्जरी हुई है तो जानकारी दें।
  • परिवार में ब्रेस्ट कैंसर का इतिहास हो तो डॉक्टर को बताएं।
  • अगर स्तन में गांठ, दर्द या निप्पल से स्राव है तो इसे छिपाएं नहीं।
  • जांच वाले दिन स्तन या बगल पर डियोड्रेंट, पाउडर या लोशन लगाने से बचें, क्योंकि कुछ पदार्थ तस्वीर में दिखाई दे सकते हैं।

अगर आपको कैंसर की जांच को लेकर चिंता है, तो कैंसर की जांच और जरूरी टेस्ट के बारे में भी जानकारी ले सकते हैं।

क्या मैमोग्राम में दर्द होता है?

मैमोग्राम के दौरान स्तन को कुछ समय के लिए मशीन के प्लेटफॉर्म के बीच रखा जाता है ताकि साफ तस्वीर मिल सके। इस दौरान दबाव महसूस हो सकता है और कुछ महिलाओं को थोड़ी असुविधा या दर्द भी हो सकता है। यह दबाव आमतौर पर कुछ सेकंड के लिए होता है।

अगर आपको पहले मैमोग्राम के दौरान ज्यादा दर्द हुआ था, तो जांच शुरू होने से पहले तकनीशियन को बता सकती हैं। वह आपकी स्थिति के अनुसार प्रक्रिया को यथासंभव आरामदायक बनाने में मदद कर सकते हैं।

क्या रेडिएशन के डर से मैमोग्राम नहीं करवाना चाहिए?

सिर्फ रेडिएशन के डर से डॉक्टर द्वारा सलाह दी गई मैमोग्राफी को टालना सही नहीं है। हर मेडिकल जांच में संभावित लाभ और जोखिम दोनों देखे जाते हैं। मैमोग्राफी में रेडिएशन की मात्रा कम रखी जाती है और इसका मुख्य उद्देश्य ब्रेस्ट कैंसर को जल्दी पकड़ना है।

साथ ही, बिना जरूरत बार-बार कोई भी रेडिएशन वाली जांच करवाना भी उचित नहीं है। सबसे अच्छा तरीका है कि जांच डॉक्टर की सलाह और सही चिकित्सकीय कारण के आधार पर कराई जाए।

आज ही परामर्श लें

मैमोग्राम में रेडिएशन जरूर होती है, लेकिन इसकी मात्रा बहुत कम होती है और इससे होने वाला संभावित जोखिम बहुत छोटा माना जाता है। ब्रेस्ट कैंसर की शुरुआती पहचान में मैमोग्राफी का फायदा आमतौर पर इस छोटे जोखिम से अधिक होता है। इसलिए केवल रेडिएशन के डर से जरूरी जांच को टालना उचित नहीं है।

अगर आपको ब्रेस्ट में गांठ, निप्पल से असामान्य स्राव, त्वचा में बदलाव या कोई दूसरा नया लक्षण महसूस हो रहा है, तो Oncare Cancer Hospital में विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लें। डॉक्टर आपकी उम्र, लक्षण और व्यक्तिगत जोखिम के आधार पर बता सकते हैं कि आपको मैमोग्राम या किसी दूसरी जांच की जरूरत है।

डिस्क्लेमर

यह ब्लॉग केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है। किसी भी प्रकार के कैंसर, जांच रिपोर्ट या इलाज से संबंधित निर्णय लेने से पहले योग्य कैंसर विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।

Frequently Asked Questions

Written and Verified by:

Dr. Gajendra Kumar Himanshu

Dr. Gajendra Kumar Himanshu Exp: 10 Yr

Medical Officer

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