आईएचसी (IHC) टेस्ट क्या है: कैंसर का सटीक प्रकार कैसे पता चलता है?

Dr. Gajendra Kumar Himanshu
Medical Officer · 10+ years experience
Updated October 26, 2026 · 7 min read
ihc test in hindi

आईएचसी टेस्ट (Immunohistochemistry) कैंसर की जांच में इस्तेमाल होने वाली एक विशेष लैब जांच है, जो बायोप्सी से लिए गए टिश्यू में खास प्रोटीन या मार्कर की पहचान करने में मदद करती है। इसमें विशेष एंटीबॉडी का इस्तेमाल किया जाता है, जो कैंसर कोशिकाओं में मौजूद खास पदार्थों से जुड़ती हैं। इससे पैथोलॉजिस्ट को कैंसर के प्रकार और उसकी उत्पत्ति को समझने में मदद मिल सकती है। कुछ मामलों में आईएचसी यह पता लगाने में भी मदद करता है कि कौन-सा उपचार मरीज के लिए उपयोगी हो सकता है।

इस लेख में हम आसान भाषा में समझेंगे कि आईएचसी टेस्ट क्या होता है, यह कैसे किया जाता है और कैंसर की सही पहचान में इसकी क्या भूमिका होती है। साथ ही, जानेंगे कि रिपोर्ट में पॉजिटिव या नेगेटिव जैसे परिणामों का क्या मतलब हो सकता है, किन कैंसर में आईएचसी का इस्तेमाल किया जाता है और इलाज तय करने में इसकी रिपोर्ट क्यों महत्वपूर्ण होती है।

आईएचसी टेस्ट क्या होता है?

आईएचसी का पूरा नाम इम्यूनोहिस्टोकेमिस्ट्री (Immunohistochemistry) है। यह आमतौर पर बायोप्सी से मिले टिश्यू पर किया जाता है। इस जांच में विशेष एंटीबॉडी का इस्तेमाल करके यह देखा जाता है कि टिश्यू में कोई खास प्रोटीन या मार्कर मौजूद है या नहीं। एंटीबॉडी उस खास मार्कर से जुड़ती है और एक रासायनिक प्रतिक्रिया के कारण कोशिकाओं का रंग बदल जाता है। इसके बाद पैथोलॉजिस्ट माइक्रोस्कोप से उस बदलाव को देखते हैं।

सरल शब्दों में कहें तो आईएचसी कैंसर कोशिकाओं पर लगे एक तरह के पहचान चिन्ह को खोजने में मदद करता है। इन चिन्हों को देखकर डॉक्टर कैंसर की प्रकृति को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं।

अगर आप बायोप्सी की पूरी प्रक्रिया और उसकी रिपोर्ट को समझना चाहते हैं, तो कैंसर में बायोप्सी टेस्ट क्या है ब्लॉग भी पढ़ सकते हैं।

कैंसर में आईएचसी की जरूरत क्यों पड़ती है?

सिर्फ माइक्रोस्कोप से कोशिकाओं को देखने पर कई बार कैंसर का प्रकार पूरी तरह स्पष्ट नहीं होता। कुछ कैंसर कोशिकाएं एक-दूसरे जैसी दिखाई दे सकती हैं। ऐसे मामलों में आईएचसी अतिरिक्त जानकारी दे सकता है और कैंसर के प्रकार या उसके स्रोत को समझने में मदद कर सकता है।

उदाहरण के लिए, अगर किसी लिम्फ नोड में कैंसर कोशिकाएं मिली हैं, तो आईएचसी से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि कैंसर वहीं से शुरू हुआ है या शरीर के किसी दूसरे हिस्से से फैलकर वहां पहुंचा है। इस जानकारी से आगे की जांच और उपचार की योजना बनाने में मदद मिल सकती है।

आईएचसी टेस्ट कैसे किया जाता है?

आईएचसी के लिए आमतौर पर पहले बायोप्सी के दौरान टिश्यू का छोटा नमूना लिया जाता है। इस नमूने को लैब में तैयार करके बहुत पतली स्लाइड बनाई जाती है। इसके बाद जरूरत के अनुसार अलग-अलग एंटीबॉडी लगाई जाती हैं।

हर एंटीबॉडी एक खास प्रोटीन या मार्कर को पहचानने के लिए तैयार होती है। अगर वह मार्कर टिश्यू में मौजूद है, तो एंटीबॉडी उससे जुड़ती है और स्लाइड पर एक खास रंग दिखाई देता है। पैथोलॉजिस्ट इन परिणामों को मरीज के माइक्रोस्कोपिक निष्कर्ष और दूसरी जानकारी के साथ मिलाकर देखते हैं।

कई बार एक ही आईएचसी मार्कर पर्याप्त नहीं होता। कैंसर के सही प्रकार को समझने के लिए डॉक्टर कई अलग-अलग मार्करों की जांच करवा सकते हैं।

आईएचसी किन कैंसरों में उपयोगी हो सकता है?

आईएचसी का इस्तेमाल कई प्रकार के कैंसर की पहचान और वर्गीकरण में किया जाता है। यह विशेष रूप से तब उपयोगी हो सकता है जब कैंसर की उत्पत्ति स्पष्ट न हो या अलग-अलग प्रकार के कैंसर एक जैसे दिखाई दें।

कुछ उदाहरणों में शामिल हैं:

  • स्तन कैंसर (Breast Cancer)
  • फेफड़ों का कैंसर (Lung Cancer)
  • लिम्फोमा
  • प्रोस्टेट कैंसर
  • गैस्ट्रिक और आंतों के कुछ कैंसर
  • अज्ञात प्राथमिक स्थान वाला कैंसर

कैंसर के प्रकार के अनुसार अलग-अलग मार्कर की जांच की जाती है। इसलिए हर मरीज की आईएचसी रिपोर्ट में एक जैसे मार्कर नहीं होते।

स्तन कैंसर में आईएचसी की भूमिका समझने के लिए स्तन कैंसर की जांच भी पढ़ सकते हैं।

आईएचसी रिपोर्ट में पॉजिटिव और नेगेटिव का क्या मतलब है?

आईएचसी रिपोर्ट में किसी मार्कर के सामने पॉजिटिव या नेगेटिव लिखा हो सकता है। सामान्य तौर पर पॉजिटिव का मतलब है कि जांच में संबंधित मार्कर पाया गया, जबकि नेगेटिव का अर्थ है कि उस खास मार्कर की पहचान नहीं हुई। लेकिन इसका मतलब हर कैंसर में एक जैसा नहीं होता।

उदाहरण के लिए, किसी खास प्रोटीन का पॉजिटिव होना एक विशेष कैंसर की पहचान में मदद कर सकता है या किसी खास उपचार की संभावना के बारे में जानकारी दे सकता है। इसलिए रिपोर्ट को केवल पॉजिटिव या नेगेटिव शब्द देखकर समझना सही नहीं है। परिणाम का अर्थ इस बात पर निर्भर करता है कि कौन-सा मार्कर जांचा गया है।

आईएचसी रिपोर्ट में कौन-कौन से मार्कर हो सकते हैं?

कैंसर के प्रकार के अनुसार पैथोलॉजिस्ट अलग-अलग मार्कर की जांच कर सकते हैं। कुछ मार्कर कैंसर की उत्पत्ति समझने में मदद करते हैं, जबकि कुछ उपचार से जुड़े निर्णयों के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।

मार्कर या जांच

किस तरह की जानकारी मिल सकती है

HER2

कुछ कैंसर में HER2 प्रोटीन की मौजूदगी और उपचार संबंधी जानकारी

ER

स्तन कैंसर कोशिकाओं में एस्ट्रोजन रिसेप्टर की स्थिति

PR

प्रोजेस्टेरोन रिसेप्टर की स्थिति

PSA

प्रोस्टेट से संबंधित कोशिकाओं की पहचान में मदद

TTF-1

कुछ मामलों में फेफड़े या अन्य स्रोत की पहचान में सहायता

CD मार्कर

कुछ ब्लड कैंसर और लिम्फोमा की पहचान में मदद

यह केवल उदाहरण हैं। डॉक्टर मरीज की बायोप्सी और संभावित कैंसर के प्रकार के अनुसार जरूरी मार्कर चुनते हैं।

क्या आईएचसी टेस्ट से कैंसर का इलाज तय होता है?

आईएचसी अकेले इलाज तय नहीं करता, लेकिन यह उपचार की योजना बनाने में महत्वपूर्ण जानकारी दे सकता है। कुछ आईएचसी मार्कर यह बताने में मदद करते हैं कि कैंसर कोशिकाओं में कोई ऐसा प्रोटीन मौजूद है या नहीं जिसे किसी खास दवा से लक्ष्य किया जा सकता है।

उदाहरण के लिए, स्तन कैंसर में HER2 और हार्मोन रिसेप्टर की जांच उपचार के विकल्पों को समझने में मदद कर सकती है। इसी तरह दूसरे कैंसर में भी कुछ विशेष मार्कर उपचार की दिशा तय करने में उपयोगी हो सकते हैं।

हालांकि, डॉक्टर आईएचसी रिपोर्ट के साथ कैंसर का चरण, बायोप्सी की जानकारी, इमेजिंग जांच और मरीज की सामान्य स्वास्थ्य स्थिति को भी देखते हैं।

क्या आईएचसी टेस्ट और बायोप्सी एक ही हैं?

नहीं। बायोप्सी एक प्रक्रिया है जिसमें शरीर से टिश्यू का नमूना लिया जाता है। आईएचसी उस टिश्यू नमूने पर की जाने वाली एक अतिरिक्त लैब जांच है। यानी पहले बायोप्सी से टिश्यू लिया जा सकता है और फिर उसी नमूने पर आईएचसी सहित अन्य जांच की जा सकती हैं।

कैंसर का अंतिम निदान केवल एक टेस्ट के आधार पर नहीं किया जाता। डॉक्टर बायोप्सी, माइक्रोस्कोपिक जांच, आईएचसी और जरूरत के अनुसार अन्य जांचों को साथ में देखकर निष्कर्ष तक पहुंचते हैं।

आईएचसी रिपोर्ट मिलने के बाद क्या करें?

आईएचसी रिपोर्ट में कई मेडिकल शब्द और मार्कर के नाम हो सकते हैं, इसलिए मरीज के लिए इसे खुद समझना मुश्किल हो सकता है। रिपोर्ट मिलने के बाद डॉक्टर से यह समझना जरूरी है कि कौन-से मार्कर की जांच हुई है और उसका परिणाम आपके कैंसर के लिए क्या मायने रखता है।

ध्यान रखें:

  • रिपोर्ट को केवल पॉजिटिव या नेगेटिव देखकर निष्कर्ष न निकालें।
  • आईएचसी परिणाम को बायोप्सी और दूसरी जांचों के साथ समझें।
  • डॉक्टर से पूछें कि क्या किसी और जांच की जरूरत है।
  • उपचार शुरू करने से पहले रिपोर्ट का पूरा अर्थ समझ लें।

अगर आप आईएचसी टेस्ट के बारे में और ज्यादा जानकारी पढ़ना चाहते हैं तो आप National Library of Medicine की ऑफिशियल वेबसाइट को देख सकते हैं।

आज ही परामर्श लें

आईएचसी टेस्ट कैंसर के प्रकार और उसकी विशेषताओं को समझने में महत्वपूर्ण जानकारी दे सकता है, लेकिन इसकी रिपोर्ट को दूसरी जांचों के साथ देखकर ही सही निष्कर्ष निकाला जाता है। Oncare Cancer Hospital में कैंसर की जांच रिपोर्ट, बायोप्सी और आईएचसी परिणामों को समझकर मरीज के लिए आगे की उपचार योजना पर चर्चा की जा सकती है। यदि आपकी आईएचसी रिपोर्ट आई है और आप उसका मतलब समझना चाहते हैं, तो Oncare Cancer Hospital के कैंसर विशेषज्ञों से परामर्श लें।

डिस्क्लेमर

यह ब्लॉग केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है। किसी भी प्रकार के कैंसर, जांच रिपोर्ट या इलाज से संबंधित निर्णय लेने से पहले योग्य कैंसर विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।

Frequently Asked Questions

आईएचसी टेस्ट क्यों किया जाता है?

आईएचसी टेस्ट टिश्यू में खास प्रोटीन या मार्कर की पहचान करके कैंसर के प्रकार और उसकी विशेषताओं को समझने में मदद करता है।

क्या आईएचसी टेस्ट बायोप्सी के बाद होता है?

हां। आईएचसी आमतौर पर बायोप्सी से मिले टिश्यू के नमूने पर किया जाता है।

आईएचसी पॉजिटिव होने का क्या मतलब है?

इसका मतलब संबंधित मार्कर टिश्यू में पाया गया है। इसका सही अर्थ इस बात पर निर्भर करता है कि कौन-सा मार्कर जांचा गया है।

क्या आईएचसी से इलाज का पता चलता है?

आईएचसी कुछ मामलों में यह समझने में मदद कर सकता है कि कौन-से उपचार विकल्प उपयोगी हो सकते हैं, लेकिन इलाज का फैसला अन्य जांचों और मरीज की पूरी स्थिति देखकर किया जाता है।