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कैंसर और हाई ब्लड प्रेशर: इलाज के दौरान बीपी का प्रबंधन

Dr. Gajendra Kumar Himanshu
Medical Officer · 10+ years experience
Updated September 23, 2026 · 7 min read
कैंसर और हाई ब्लड प्रेशर

कैंसर के इलाज के दौरान हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने के लिए नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच करना, डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं समय पर लेना, संतुलित भोजन करना और किसी भी असामान्य लक्षण की जानकारी अपनी कैंसर केयर टीम को देना जरूरी है। कुछ कैंसर उपचार, तनाव, दर्द, वजन में बदलाव और पहले से मौजूद हाई ब्लड प्रेशर के कारण इलाज के दौरान BP बढ़ सकता है। इसलिए कैंसर के इलाज के साथ ब्लड प्रेशर की नियमित निगरानी भी जरूरी है।

कैंसर और हाई ब्लड प्रेशर दोनों एक साथ होने पर मरीज को अपनी सेहत पर थोड़ा ज्यादा ध्यान देना पड़ सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि कैंसर का इलाज रुक जाता है। सही जांच और डॉक्टर की सलाह से दोनों स्थितियों को एक साथ संभाला जा सकता है। इस ब्लॉग में हम समझेंगे कि कैंसर के इलाज के दौरान BP क्यों बढ़ सकता है, इसे नियंत्रित रखने के लिए क्या सावधानियां जरूरी हैं और किन लक्षणों पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

कैंसर के इलाज के दौरान ब्लड प्रेशर क्यों बढ़ सकता है?

कैंसर के इलाज के दौरान शरीर और रोजमर्रा की दिनचर्या में कई बदलाव होते हैं। कुछ मरीजों में दर्द, चिंता, तनाव, कम शारीरिक गतिविधि या वजन में बदलाव के कारण BP प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा, कुछ कैंसर उपचार (Cancer treatment) भी ब्लड प्रेशर बढ़ा सकते हैं।

खास तौर पर कुछ लक्षित उपचार और दूसरी कैंसर की दवाओं के दौरान BP की नियमित निगरानी की जरूरत पड़ सकती है। इसका कारण यह है कि कुछ दवाओं के दुष्प्रभावों में हाई ब्लड प्रेशर भी शामिल हो सकता है। इसलिए उपचार शुरू करने से पहले और इलाज के दौरान डॉक्टर BP की जांच कर सकते हैं।

कैंसर के इलाज के दौरान BP को नियंत्रित रखना क्यों जरूरी है?

ब्लड प्रेशर लगातार बढ़ा हुआ रहने पर हृदय, किडनी, आंखों और रक्त वाहिकाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। कैंसर के मरीजों में पहले से मौजूद हाई BP को नियंत्रित रखना इसलिए भी जरूरी है, ताकि इलाज के दौरान सामान्य स्वास्थ्य को बेहतर तरीके से बनाए रखा जा सके।

कुछ कैंसर की दवाएं लेने वाले मरीजों में डॉक्टर BP को पहले से ज्यादा ध्यान से देख सकते हैं। अगर BP काफी बढ़ जाता है, तो डॉक्टर दवा की मात्रा बदलने, BP की दवा शुरू करने या उपचार की योजना में जरूरी बदलाव करने पर विचार कर सकते हैं।

इसलिए घर पर BP की रीडिंग लिखकर रखना भी उपयोगी हो सकता है। इससे डॉक्टर को अलग-अलग दिनों में BP के स्तर को समझने में मदद मिल सकती है।

कैंसर के इलाज के दौरान हाई BP को कैसे नियंत्रित करें?

कैंसर के इलाज के दौरान हाई BP को नियंत्रित रखने के लिए नियमित जांच, सही दवा और रोजमर्रा की कुछ आसान सावधानियां मददगार हो सकती हैं।

1. नियमित रूप से BP चेक करें

अगर आपको पहले से हाई ब्लड प्रेशर है या आपका कैंसर उपचार BP को प्रभावित कर सकता है, तो डॉक्टर आपको नियमित BP की जांच करने की सलाह दे सकते हैं। घर पर BP मशीन का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन उसे सही तरीके से इस्तेमाल करना जरूरी है।

BP नापने से पहले कुछ मिनट आराम करके बैठें। हाथ को सही स्थिति में रखें और रीडिंग को लिख लें। रोज लगभग एक ही समय पर BP की जांच करने से अलग-अलग रीडिंग की तुलना करना आसान हो सकता है।

2. BP की दवा समय पर लें

अगर डॉक्टर ने ब्लड प्रेशर की दवा दी है, तो उसे बताए गए समय और मात्रा के अनुसार लें। BP सामान्य आने पर भी दवा को खुद से बंद न करें।

अगर किसी दवा के बाद चक्कर, बहुत ज्यादा कमजोरी, पैरों में सूजन या कोई दूसरी परेशानी महसूस हो, तो दवा बंद करने के बजाय डॉक्टर से बात करें। डॉक्टर आपकी स्थिति देखकर दवा या उसकी मात्रा में बदलाव कर सकते हैं।

कैंसर के इलाज के दौरान दवाओं से जुड़े दुष्प्रभावों को समझने के लिए कीमोथेरेपी के साइड इफेक्ट्स की जानकारी भी उपयोगी हो सकती है।

3. नमक का सेवन कम रखें

ज्यादा नमक खाने से कुछ लोगों में ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। इसलिए भोजन में अतिरिक्त नमक डालने और बहुत ज्यादा नमकीन चीजें खाने से बचना बेहतर है।

आप अपने भोजन में इन बातों का ध्यान रख सकते हैं:

  • पैकेट में मिलने वाले और बहुत ज्यादा नमकीन खाद्य पदार्थों को कम लें।
  • खाने के ऊपर से अतिरिक्त नमक डालने से बचें।
  • ताजे और घर पर बने भोजन को प्राथमिकता दें।
  • अपनी पोषण संबंधी जरूरतों के अनुसार डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लें।

हालांकि, कैंसर के इलाज के दौरान पोषण की जरूरत हर मरीज में अलग हो सकती है। इसलिए खुद से बहुत ज्यादा भोजन संबंधी पाबंदियां न लगाएं।

इलाज के दौरान जीवनशैली का क्या महत्व है?

कैंसर के इलाज के दौरान सही जीवनशैली अपनाने से शरीर को उपचार का सामना करने और BP को बेहतर तरीके से नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

हल्की शारीरिक गतिविधि करें

अगर आपकी सेहत और कैंसर का इलाज इसकी अनुमति देता है, तो हल्की शारीरिक गतिविधि जैसे टहलना फायदेमंद हो सकता है। इससे शरीर को सक्रिय रखने और सामान्य फिटनेस बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

लेकिन कमजोरी, खून की कमी, सर्जरी के बाद ठीक होने की स्थिति या किसी दूसरी स्वास्थ्य समस्या में व्यायाम की जरूरत अलग हो सकती है। इसलिए कोई नया व्यायाम शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से पूछें।

तनाव और नींद का ध्यान रखें

कैंसर का पता चलना और उसका इलाज मानसिक तनाव पैदा कर सकते हैं। लगातार तनाव और अच्छी नींद न आने से BP को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है। इसलिए पर्याप्त आराम, अच्छी नींद और परिवार या करीबी लोगों का भावनात्मक सहयोग महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

अगर चिंता या तनाव बहुत ज्यादा हो रहा है, तो अपनी कैंसर केयर टीम से बात करें। जरूरत पड़ने पर वे उचित मदद की सलाह दे सकते हैं।

किन लक्षणों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?

हर बढ़ी हुई BP रीडिंग आपातकाल नहीं होती, लेकिन बहुत ज्यादा BP या कुछ गंभीर लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

अगर BP बहुत ज्यादा आता है और साथ में सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी, तेज सिरदर्द, अचानक कमजोरी, बोलने में परेशानी, उलझन या दिखाई देने में बदलाव जैसे लक्षण हों, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।

इसके अलावा, अगर कैंसर के इलाज के दौरान BP बार-बार बढ़ रहा है, तो अपनी कैंसर केयर टीम को इसकी जानकारी दें। डॉक्टर यह देख सकते हैं कि BP में बदलाव किसी दवा, दूसरी स्वास्थ्य समस्या या किसी अन्य कारण से जुड़ा है या नहीं।

अगर आप कैंसर के इलाज से जुड़ी अधिक जानकारी पढ़ना चाहते हैं, तो National Cancer Institute की वेबसाइट देख सकते हैं।

कैंसर और हाई ब्लड प्रेशर: क्या करें और क्या न करें?

इलाज के दौरान BP से जुड़ी मुख्य बातें नीचे दी गई तालिका में समझें:

क्या करें

क्या न करें

BP नियमित रूप से जांचें

BP की दवा खुद से बंद न करें

डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं लें

बिना पूछे नई दवा या सप्लीमेंट न लें

नमक का सेवन सीमित रखें

बहुत ज्यादा प्रोसेस्ड और नमकीन चीजें न लें

डॉक्टर की अनुमति से हल्की गतिविधि करें

अपनी क्षमता से ज्यादा व्यायाम न करें

BP की रीडिंग लिखकर रखें

लगातार बढ़ी हुई रीडिंग को नजरअंदाज न करें

सभी दवाओं की जानकारी डॉक्टर को दें

किसी दवा को खुद से शुरू या बंद न करें

आज ही परामर्श लें

कैंसर और हाई ब्लड प्रेशर एक साथ होने पर नियमित निगरानी और सही चिकित्सकीय सलाह जरूरी है। BP को नियंत्रित रखने से इलाज के दौरान आपकी सामान्य सेहत को बेहतर तरीके से संभालने में मदद मिल सकती है। डॉक्टर की सलाह के बिना BP की दवा बंद करना या कैंसर के उपचार में कोई बदलाव करना सही नहीं है।

Oncare Cancer Hospital में कैंसर के इलाज के साथ मरीज की सामान्य स्वास्थ्य स्थिति और उपचार से जुड़े दुष्प्रभावों की निगरानी पर भी ध्यान दिया जाता है। अगर आप या आपके परिवार का कोई सदस्य कैंसर का इलाज ले रहा है और BP को लेकर चिंता है, तो Oncare Cancer Hospital की कैंसर केयर टीम से परामर्श लेकर अपनी स्थिति के अनुसार सही सलाह प्राप्त कर सकते हैं।

डिस्क्लेमर

यह ब्लॉग केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है। किसी भी प्रकार के कैंसर, जांच रिपोर्ट या उपचार से संबंधित निर्णय लेने से पहले योग्य कैंसर विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

Frequently Asked Questions

1. क्या कैंसर की दवाओं से BP बढ़ सकता है?

हां, कुछ कैंसर उपचारों में हाई ब्लड प्रेशर दुष्प्रभाव के रूप में हो सकता है। इसलिए कुछ मरीजों में नियमित BP की जांच की जरूरत होती है।

2. क्या हाई BP होने पर कीमोथेरेपी बंद करनी पड़ती है?

जरूरी नहीं। डॉक्टर BP की स्थिति और कैंसर के उपचार को देखकर तय करते हैं कि इलाज जारी रखना है या उसमें कोई बदलाव करना है।

3. क्या कैंसर मरीज BP की दवा ले सकते हैं?

हां, जरूरत होने पर डॉक्टर BP को नियंत्रित करने के लिए दवा दे सकते हैं। कोई भी BP की दवा खुद से शुरू या बंद न करें।

4. कैंसर के दौरान कितना BP सामान्य माना जाता है?

BP की सही लक्ष्य सीमा व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य और दूसरी बीमारियों पर निर्भर कर सकती है। अपनी स्थिति के अनुसार सही BP सीमा के बारे में डॉक्टर से पूछना सबसे सही है।