गर्भपात (अबॉर्शन) और ब्रेस्ट कैंसर के बीच संबंध को लेकर कई महिलाओं के मन में सवाल होते हैं। वैज्ञानिक शोध के अनुसार, गर्भपात कराने से ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा नहीं बढ़ता है। इस विषय पर किए गए बड़े अध्ययनों में गर्भपात और बाद में ब्रेस्ट कैंसर होने के बीच कोई सीधा संबंध नहीं पाया गया है। इसलिए इस बारे में सही जानकारी जानना जरूरी है, ताकि किसी भी गलत धारणा या डर के कारण चिंता न हो।
इस लेख में हम आसान शब्दों में जानेंगे कि गर्भपात और ब्रेस्ट कैंसर (Breast Cancer) के बारे में विज्ञान क्या कहता है, हार्मोन का क्या असर होता है, स्तन कैंसर के खतरे को कौन-से कारक बढ़ा सकते हैं और स्तन में कोई बदलाव दिखने पर डॉक्टर से कब सलाह लेनी चाहिए।
क्या गर्भपात से ब्रेस्ट कैंसर होता है?
नहीं, उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाण यह नहीं बताते कि गर्भपात कराने से ब्रेस्ट कैंसर होता है। इस विषय पर कई सालों से शोध किया गया है। इन अध्ययनों में उन महिलाओं की जानकारी भी देखी गई है जिन्होंने अपनी इच्छा से गर्भावस्था समाप्त की और उन महिलाओं की भी जिनका प्राकृतिक गर्भपात हुआ।
शोध में इन दोनों स्थितियों और बाद में स्तन कैंसर होने के बीच कोई प्रमाणित संबंध नहीं मिला है।
यह बात भी समझना जरूरी है कि किसी महिला को गर्भपात के बाद स्तन कैंसर हो जाए, तो इसका मतलब यह नहीं है कि कैंसर गर्भपात के कारण हुआ। स्तन कैंसर का खतरा उम्र, परिवार में कैंसर का इतिहास, कुछ आनुवंशिक बदलाव और दूसरे कारणों से प्रभावित हो सकता है।
गर्भपात और ब्रेस्ट कैंसर पर वैज्ञानिक शोध क्या कहते हैं?
शुरुआती कुछ अध्ययनों में गर्भपात और स्तन कैंसर के बीच संभावित संबंध की बात सामने आई थी। लेकिन इन अध्ययनों में कुछ कमियां थीं। उदाहरण के लिए, कुछ शोधों में महिलाओं से कैंसर का पता चलने के बाद उनकी पिछली गर्भावस्था के बारे में पूछा गया था।
बाद में बड़े और बेहतर तरीके से किए गए अध्ययनों में महिलाओं की जानकारी और मेडिकल रिकॉर्ड का अधिक व्यवस्थित तरीके से अध्ययन किया गया। इन शोधों में गर्भपात और स्तन कैंसर के बीच कोई स्पष्ट संबंध नहीं मिला।
अमेरिका के नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट (NCI) ने भी इस विषय पर उपलब्ध शोध की समीक्षा की। उसके अनुसार, गर्भपात या प्राकृतिक गर्भपात से बाद में स्तन कैंसर होने का खतरा बढ़ने के प्रमाण नहीं हैं।
गर्भपात और प्राकृतिक गर्भपात में क्या अंतर है?
दोनों स्थितियों में गर्भावस्था समाप्त हो जाती है, लेकिन इनके बीच अंतर है।
- प्रेरित गर्भपात (Induced Abortion): जब दवाओं या चिकित्सा प्रक्रिया की मदद से गर्भावस्था समाप्त की जाती है।
- प्राकृतिक गर्भपात (Miscarriage): जब गर्भावस्था अपने आप समाप्त हो जाती है।
वैज्ञानिकों ने इन दोनों स्थितियों और स्तन कैंसर के खतरे के बीच संभावित संबंध का अध्ययन किया है। उपलब्ध प्रमाणों में इनमें से किसी को भी स्तन कैंसर का प्रमाणित कारण नहीं माना गया है।
गर्भावस्था के हार्मोन का स्तन कैंसर से क्या संबंध है?
महिला के शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन होते हैं। ये हार्मोन मासिक धर्म, गर्भावस्था और स्तनों के विकास में अहम भूमिका निभाते हैं। गर्भावस्था के दौरान इन हार्मोन का स्तर बदलता है।
कुछ हार्मोन स्तन की कोशिकाओं की बढ़त को प्रभावित कर सकते हैं। इसी वजह से वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश करते हैं कि हार्मोन और प्रजनन से जुड़ी घटनाएं स्तन कैंसर के खतरे पर किस तरह असर डाल सकती हैं।
लेकिन हार्मोन में बदलाव होने का मतलब यह नहीं है कि गर्भपात कराने से कैंसर हो जाएगा। उपलब्ध शोध गर्भपात को स्तन कैंसर का प्रमाणित कारण नहीं मानते।
मासिक धर्म कम उम्र में शुरू होना, मेनोपॉज देर से होना और पहली पूर्ण गर्भावस्था अधिक उम्र में होना जैसे कुछ कारक स्तन कैंसर के खतरे को प्रभावित कर सकते हैं। इन बातों को गर्भपात से जुड़े जोखिम के साथ नहीं मिलाना चाहिए।
स्तन कैंसर के खतरे को कौन-से कारक बढ़ा सकते हैं?
स्तन कैंसर किसी एक कारण से नहीं होता। कई कारक इसके खतरे को प्रभावित कर सकते हैं। इनमें से कुछ को बदला नहीं जा सकता, जबकि कुछ के मामले में जीवनशैली में बदलाव मदद कर सकते हैं।
1. बढ़ती उम्र
उम्र बढ़ने के साथ स्तन कैंसर होने की संभावना भी बढ़ती है। हालांकि, यह बीमारी कम उम्र की महिलाओं में भी हो सकती है।
2. परिवार में कैंसर का इतिहास
अगर मां, बहन या बेटी को स्तन कैंसर हुआ है, तो आपका खतरा बढ़ सकता है। लेकिन परिवार में किसी को कैंसर न होने पर भी यह बीमारी हो सकती है।
3. जीन में बदलाव
BRCA1 और BRCA2 जैसे जीन में कुछ बदलाव स्तन कैंसर का खतरा बढ़ा सकते हैं। अगर परिवार में कम उम्र में स्तन या अंडाशय के कैंसर के कई मामले रहे हैं, तो डॉक्टर से आनुवंशिक जांच या परामर्श के बारे में पूछ सकते हैं।
4. मासिक धर्म और गर्भावस्था से जुड़े कारक
बहुत कम उम्र में मासिक धर्म शुरू होना, मेनोपॉज देर से होना और पहली पूर्ण गर्भावस्था अधिक उम्र में होना जैसे कारक खतरे को प्रभावित कर सकते हैं। हर महिला का जोखिम एक जैसा नहीं होता।
5. जीवनशैली और स्वास्थ्य
शराब का सेवन, शारीरिक गतिविधि की कमी और मेनोपॉज के बाद अधिक वजन जैसे कारक स्तन कैंसर के बढ़े हुए खतरे से जुड़े हैं।
इन जोखिम कारकों के बारे में अधिक जानकारी के लिए नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट की आधिकारिक वेबसाइट देखें।
क्या गर्भपात के बाद ब्रेस्ट कैंसर की जांच कराना जरूरी है?
केवल गर्भपात कराने या प्राकृतिक गर्भपात होने के कारण स्तन कैंसर की जांच कराना जरूरी नहीं होता। जांच की जरूरत आपकी उम्र, पारिवारिक इतिहास, स्वास्थ्य और दूसरे जोखिम कारकों पर निर्भर करती है।
हालांकि, स्तन में कोई नया या असामान्य बदलाव दिखे, तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। इन बदलावों पर ध्यान दें:
- स्तन या बगल में नई गांठ महसूस होना।
- स्तन के आकार या बनावट में बदलाव आना।
- निप्पल का नया बदलाव, जैसे अंदर की ओर मुड़ना।
- निप्पल से अपने आप खून या असामान्य तरल निकलना।
- स्तन की त्वचा पर गड्ढे पड़ना, लालिमा या मोटापन दिखना।
इन लक्षणों का मतलब हमेशा कैंसर नहीं होता। कई बार दूसरे कारणों से भी ऐसे बदलाव हो सकते हैं। फिर भी, इनकी वजह जानने के लिए डॉक्टर से सलाह लेना सही रहता है।
डॉक्टर आपकी उम्र, लक्षण और जोखिम के अनुसार मैमोग्राफी या दूसरी जांच की सलाह दे सकते हैं। स्तन कैंसर के लक्षणों के बारे में विस्तार से जानने के लिए हमारा लेख स्तन कैंसर के लक्षण पढ़ें।
गर्भपात के बाद डर या चिंता होना
गर्भपात एक निजी अनुभव है। कुछ महिलाओं को इसके बाद अपने स्वास्थ्य को लेकर चिंता हो सकती है। इंटरनेट पर गर्भपात और कैंसर के बारे में गलत जानकारी पढ़ने से यह चिंता और बढ़ सकती है।
लेकिन वैज्ञानिक प्रमाण यह नहीं बताते कि गर्भपात कराने से स्तन कैंसर होता है। इसलिए केवल इस वजह से खुद को दोष देने या भविष्य में कैंसर होने का डर पालने की जरूरत नहीं है।
अगर आपको लगातार चिंता हो रही है, तो योग्य डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बात करना मददगार हो सकता है। वे आपकी स्थिति को समझकर सही जानकारी और जरूरी सलाह दे सकते हैं।
निष्कर्ष
उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों के अनुसार, गर्भपात कराने या प्राकृतिक गर्भपात होने से स्तन कैंसर का खतरा बढ़ने का प्रमाण नहीं मिला है। इसलिए इस विषय में गलत जानकारी के आधार पर डरने की जरूरत नहीं है।
स्तन कैंसर के खतरे को समझने के लिए उम्र, परिवार में कैंसर का इतिहास, कुछ आनुवंशिक बदलाव और अन्य स्वास्थ्य संबंधी कारकों पर ध्यान देना अधिक उपयोगी है। अगर स्तन या निप्पल में कोई नया या लगातार बना रहने वाला बदलाव दिखे, तो डॉक्टर से जांच कराएं।
डिस्क्लेमर
यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। यह डॉक्टर की सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। अपनी व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति से संबंधित प्रश्नों के लिए योग्य स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से परामर्श करें।
Frequently Asked Questions
क्या एक बार गर्भपात कराने से ब्रेस्ट कैंसर हो सकता है?
नहीं। उपलब्ध वैज्ञानिक शोध एक बार गर्भपात कराने को स्तन कैंसर का प्रमाणित कारण नहीं मानते। व्यक्तिगत जोखिम दूसरे कारकों से प्रभावित हो सकता है।
क्या बार-बार गर्भपात कराने से स्तन कैंसर का खतरा बढ़ता है?
उपलब्ध शोध गर्भपात और स्तन कैंसर के बीच कोई प्रमाणित कारणात्मक संबंध नहीं दिखाते। बार-बार गर्भपात होने या अन्य स्वास्थ्य संबंधी चिंता होने पर डॉक्टर से सलाह लें।
क्या प्राकृतिक गर्भपात से ब्रेस्ट कैंसर होता है?
नहीं। नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के अनुसार, प्राकृतिक गर्भपात और बाद में स्तन कैंसर होने के बीच कोई प्रमाणित संबंध नहीं मिला है।
क्या गर्भपात की गोलियों से ब्रेस्ट कैंसर होता है?
गर्भपात और स्तन कैंसर पर किए गए शोध में बढ़े हुए खतरे का कोई प्रमाणित संबंध नहीं मिला है। हालांकि, गर्भपात की गोलियों के बारे में अपने व्यक्तिगत सवालों के लिए योग्य स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से सलाह लें और दवाओं का उपयोग चिकित्सा निर्देशों के अनुसार ही करें।
क्या जिन महिलाओं के बच्चे नहीं होते, उन्हें ब्रेस्ट कैंसर का खतरा ज्यादा होता है?
जिन महिलाओं की कभी पूर्ण अवधि की गर्भावस्था नहीं हुई है, उनमें कुछ अन्य महिलाओं की तुलना में स्तन कैंसर का खतरा अधिक हो सकता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उन्हें कैंसर जरूर होगा। गर्भपात कराने और कभी गर्भवती न होने की स्थितियां अलग हैं।
क्या स्तनपान कराने से ब्रेस्ट कैंसर का खतरा कम हो सकता है?
शोध के अनुसार, स्तनपान कराने से स्तन कैंसर का खतरा कुछ कम हो सकता है। लेकिन स्तनपान न कराने का मतलब यह नहीं है कि किसी महिला को कैंसर होगा ही।



