त्वचा कैंसर: शुरुआती पहचान से रिकवरी के बेहतर मौके

oncare team
Updated on Feb 13, 2026 18:30 IST

By Prashant Baghel

त्वचा कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसमें हमारी त्वचा की कोशिकाएं अनियमित तरीके से बढ़ने लगती हैं। आमतौर पर हमारी त्वचा की कोशिकाएं एक तय समय पर बनती और मरती हैं, लेकिन जब ये प्रक्रिया बिगड़ जाती है, तो कोशिकाएं बिना रुके बढ़ने लगती हैं और कैंसर बन सकता है। यह कैंसर अक्सर त्वचा पर किसी तिल, मस्से या घाव के रूप में दिखाई देता है, जो धीरे-धीरे बड़ा हो सकता है या रंग और आकार बदल सकता है। कभी-कभी इसमें खुजली, जलन या खून भी आ सकता है।

त्वचा कैंसर के मुख्य तीन प्रकार होते हैं – बेसल सेल कार्सिनोमा, स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा और मेलानोमा। इनमें से मेलानोमा सबसे खतरनाक माना जाता है, लेकिन अगर सही समय पर इसका पता चल जाए, तो इलाज संभव है और व्यक्ति पूरी तरह ठीक हो सकता है।

यह बीमारी ज़्यादातर उन लोगों में पाई जाती है जो बहुत ज़्यादा धूप में रहते हैं, खासकर बिना सनस्क्रीन के। गोरी त्वचा वालों में इसका खतरा थोड़ा ज्यादा होता है, लेकिन ये किसी को भी हो सकता है।

इस लेख में हम जानेंगे कि त्वचा कैंसर कैसे होता है, इसके शुरुआती लक्षण क्या हो सकते हैं, किस तरह की जांच की जाती है, इलाज के क्या-क्या विकल्प हैं, और सबसे जरूरी इससे कैसे बचा जा सकता है। साथ ही, इलाज के बाद सही देखभाल और जीवनशैली में बदलाव से कैसे दोबारा होने से रोका जा सकता है, इस पर भी चर्चा करेंगे।

त्वचा कैंसर क्या है?

त्वचा मानव शरीर की सबसे बाहरी कोट है, जो हमें बाहरी चोटों, सूरज की रोशनी, कीटाणुओं से बचाती है। इसमें कई तरह की कोशिकाएँ होती हैं जैसे कि बेसल सेल, स्क्वैमस सेल, और मेलेनोमा कोशिकाएँ। यदि इन कोशिकाओं में किसी कारण से खराबी हो जाए जैसे कि उनका विभाजन अनियमित हो जाए तो कैंसर शुरू हो सकता है।

तीन मुख्य प्रकार के त्वचा कैंसर होते हैं:

  1. बेसल सेल कार्सिनोमा (Basal Cell Carcinoma): यह सबसे आम प्रकार है, लेकिन अक्सर कम खतरनाक रहता है। यह धीरे‑धीरे बढ़ता है और बहुत जल्दी फैलता नहीं है स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा (Squamous Cell Carcinoma): थोड़ा अधिक गंभीर हो सकता है, और यदि समय पर न इलाज हो तो आसपास के हिस्सों में फैल सकता है।
  2. मेलेनोमा (Melanoma): यह सबसे खतरनाक रूप है। यह जल्दी फैलता है और यदि जल्दी न पकड़ा जाए तो जानलेवा हो सकता है।

शुरुआती लक्षण और पहचान

त्वचा कैंसर की रिकवरी के बेहतर मौके तभी मिलते हैं जब इसे शुरुआत में पहचान लिया जाए। कुछ बातों पर ध्यान देने से आप जल्दी पहचान सकते हैं कि कहीं त्वचा कैंसर न हो। नीचे वे सामान्य लक्षण हैं:

  • नया मस्सा या तिल: कुछ नया बना हो, जो पहले न था। या पुराने तिल में बदलाव हो रहा हो।
  • असमान आकार (irregular shape): किनारे दांतेदार हों या चिकने न हों।
  • रंग में बदलाव: एक तिल का रंग गहरा‑हल्का होना, कई रंग दिखना।
  • बड़ा होना: समय के साथ आकार में तेजी से वृद्धि।
  • खुजली, दर्द या जलन: यदि तिल या घाव में खुजली हो, दर्द हो या जलन हो।
  • खून आना या पपड़ी बन जाना: तिल या घाव से खून निकलना, पपड़ी बनना या ठीक न होना।
  • अलग‑अलग हिस्सों में बदलाव: कान, गर्दन, हाथ‑पैर आदि वो भाग जो सूरज की रोशनी अधिक पाते हैं, वहां कुछ चकत्ते या धब्बे हो जाएँ।

जांच कैसे होती है?

जब ये लक्षण दिखें, तो त्वचा कैंसर की जांच के लिए कुछ तरीके प्रयोग किए जाते हैं:

  1. शारीरिक जांच (Physical Exam): डॉक्टर आपकी त्वचा देखेंगे कि कोई तिल या घाव असामान्य है या नहीं।
  2. बायोप्सी (Biopsy): डॉक्टर तिल या घाव का छोटा टुकड़ा निकालकर लैब में जांच करवाते हैं यह देखने के लिए कि उसमें कैंसर कोशिकाएँ हैं या नहीं।
  3. स्टेजिंग (Staging): यदि पुष्टि हो जाए कि कैंसर है, तो यह जांच की जाती है कि यह कितना फैला है और कितनी गहराई में है।
  4. छवि परीक्षण (Imaging): कभी‑कभी शरीर के अन्य हिस्सों की जांच के लिए एक्स‑रे, सीटी स्कैन या एमआरआई की जरूरत होती है।

इलाज के तरीके

त्वचा कैंसर का इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि किस प्रकार का कैंसर है, कहाँ है, कितना फैल चुका है, और स्वास्थ्य की स्थिति कैसी है। कुछ सामान्य इलाज इस तरह हैं:

  • सर्जरी (Surgery): कैंसर को काटकर निकालना। यदि संभव हो, आसपास के स्वस्थ त्वचा हिस्से को भी सुरक्षित रखते हुए।
  • Mohs सर्जरी: विशेष प्रकार की सर्जरी जिसमें त्वचा की पतली‑पतली परतों को हटाया जाता है और हर परत को जांचा जाता है। इसे खासतौर पर चेहरे‑गर्दन जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में इस्तेमाल किया जाता है।
  • फ्रीज़िंग (Cryotherapy): घाव या तिल को तरल नाइट्रोजन की ठंडक से जमाकर कैंसर कोशिकाएँ नष्ट करना।
  • क्रीम या टॉपिकल उपचार: कुछ दवाएँ सीधी त्वचा पर लगाई जाती हैं ताकि कैंसर कोशिकाएँ मर जाएँ।
  • रेडियोथेरेपी (Radiation Therapy): यदि कैंसर बहुत गहराई में है या सर्जरी संभव नहीं है, तो रेडिएशन से कोशिकाएँ मारी जाती हैं।
  • कीमोथेरेपी (Chemotherapy): अगर कैंसर बहुत फैल चुका हो, तो दवाओं से कैंसर कोशिकाएँ नष्ट की जाती हैं।
  • इम्यूनोथेरेपी और टारगेटेड थेरेपी: शरीर की रक्षा प्रणाली को सक्रिय करने वाले इलाज या विशेष दवाएँ जो सिर्फ कैंसर कोशिकाओं को निशाना बनाती हैं।

रिकवरी और जीवनशैली

इलाज के बाद स्वस्थ रहने के लिए कुछ महत्वपूर्ण बातें हैं:

  • फॉलो‑अप जांच: इलाज के बाद डॉक्टर से नियमित मिलना ज़रूरी है ताकि यह देखा जा सके कि कैंसर वापस तो नहीं आया।
  • सूरज से बचाव: धूप में बाहर निकलते समय सनबर्न से बचने के लिए टोपी पहनें, परिधान पहनें, सनस्क्रीन (SPF 30 या उससे अधिक) लगाएँ।
  • स्वस्थ आहार: फल‑सब्जियाँ, पानी पर्याप्त मात्रा में लें ताकि शरीर को पोषण मिले और त्वचा स्वस्थ रहे।
  • धूम्रपान और शराब बंद करें: ये दोनों त्वचा के कैंसर के खतरे को बढ़ाते हैं।
  • त्वचा की सफ़ाई और देखभाल: साबुन‑शैम्पू बदलते समय संवेदनशील त्वचा को ध्यान दें। नए तिलों पर नजर रखें।

क्यों शुरुआती पहचान ज़रूरी है?

जब त्वचा कैंसर को शुरुआत में पहचान लिया जाए, तो इलाज सरल और सफल हो जाता है। क्योंकि:

  • कैंसर कम फैला होता है, इलाज में कम जोखिम होता है।
  • सर्जरी व इलाज के बाद रिकवरी जल्दी होती है, घाव ठीक जल्दी भरते हैं।
  • इलाज का खर्च कम होता है और मरीज को शारीरिक व मानसिक तनाव कम होता है।

आज ही परामर्श लें

त्वचा कैंसर या skin cancer in hindi महज़ एक शब्द नहीं है, बल्कि एक ऐसी बीमारी है जिसे समय रहते समझा जाए तो पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। शुरुआत में यदि थोड़ा सा ध्यान दिया जाए जैसे सूरज की तेज़ किरणों से बचाव, त्वचा पर हो रहे बदलावों को नजरअंदाज़ न करना, और समय‑समय पर जांच करवाना तो रिकवरी के मौके बहुत बेहतर हो जाते हैं।

यदि आप या आपके किसी परिचित को त्वचा पर कोई नया तिल या घाव दिखे, जो बढ़ रहा हो, दर्द/खुजली कर रहा हो या रंग/आकार बदल रहा हो, तो तुरंत त्वचा विशेषज्ञ से मिलें। सही इलाज से आप त्वचा कैंसर से बच सकते हैं और स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।

त्वचा कैंसर के सटीक इलाज और जांच के लिए आप Oncare Cancer Hospital जैसे विश्वसनीय और आधुनिक कैंसर सेंटर का चुनाव कर सकते हैं, जहाँ अनुभवी डॉक्टर, अत्याधुनिक तकनीक और पूरी देखभाल के साथ इलाज किया जाता है।

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