न्यूरोब्लास्टोमा: बच्चों के कैंसर की अहम जानकारी

oncare team
Updated on Jan 20, 2026 13:09 IST

By Prashant Baghel

जब किसी बच्चे के माता-पिता को यह पता चलता है कि उनके बच्चे को कैंसर है, तो पूरी दुनिया जैसे थम सी जाती है। डर, घबराहट और असहायता का एहसास मन में घर कर लेता है। बच्चों में होने वाला कैंसर अपने आप में बहुत संवेदनशील विषय होता है, क्योंकि मासूम उम्र में इतनी बड़ी बीमारी की कल्पना करना भी मुश्किल होता है। ऐसे ही एक गंभीर लेकिन अपेक्षाकृत कम सुने जाने वाले कैंसर का नाम है न्यूरोब्लास्टोमा कैंसर।

इस लेख में हम बहुत ही आसान और समझने वाली भाषा में जानेंगे कि न्यूरोब्लास्टोमा क्या होता है, यह बच्चों में क्यों होता है, इसके लक्षण कैसे पहचानें जा सकते हैं, यह कितना खतरनाक हो सकता है और समय पर इलाज क्यों इतना जरूरी होता है।

न्यूरोब्लास्टोमा कैंसर क्या होता है

न्यूरोब्लास्टोमा कैंसर बच्चों में होने वाला एक प्रकार का कैंसर है, जो नर्व सेल्स यानी तंत्रिका कोशिकाओं से जुड़ा होता है। यह कैंसर आमतौर पर बहुत छोटे बच्चों में पाया जाता है, खासकर पांच साल से कम उम्र के बच्चों में। कई मामलों में यह बीमारी एक साल से कम उम्र के बच्चों में भी देखी जाती है।

यह कैंसर शरीर के उस हिस्से से शुरू होता है जहां नर्व सिस्टम विकसित हो रहा होता है। सबसे ज्यादा मामलों में यह एड्रिनल ग्लैंड में शुरू होता है, जो किडनी के ऊपर होती है। इसके अलावा यह गर्दन, छाती, पेट या रीढ़ की हड्डी के पास भी विकसित हो सकता है।

बच्चों में न्यूरोब्लास्टोमा क्यों होता है

न्यूरोब्लास्टोमा बच्चों में होने वाला कैंसर है, जिसकी शुरुआत नर्व सेल्स के असामान्य विकास से होती है। यह बीमारी धीरे-धीरे बनती है और ज्यादातर मामलों में इसके पीछे कोई एक साफ वजह नहीं होती। इस कारण माता-पिता के मन में कई सवाल आते हैं, लेकिन यह समझना जरूरी है कि यह कैंसर किसी की गलती से नहीं होता।

नर्व सेल्स का असामान्य विकास

न्यूरोब्लास्टोमा तब होता है जब नर्व सेल्स का विकास सामान्य तरीके से न होकर गलत दिशा में होने लगता है। ये कोशिकाएं बिना रुके बढ़ती रहती हैं और समय के साथ गांठ या ट्यूमर का रूप ले लेती हैं। यही ट्यूमर आगे चलकर कैंसर बन जाता है और शरीर के अलग-अलग हिस्सों को प्रभावित कर सकता है।

किसी साफ कारण का न मिलना

अधिकतर मामलों में न्यूरोब्लास्टोमा होने का कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आता। यह बीमारी अचानक विकसित होती है और माता-पिता की किसी आदत, खानपान या परवरिश से इसका सीधा संबंध नहीं होता। इसलिए खुद को दोषी मानना सही नहीं है।

जेनेटिक कारणों की भूमिका

बहुत ही कम मामलों में यह कैंसर जेनेटिक कारणों से जुड़ा हो सकता है, यानी परिवार में पहले से किसी को यह बीमारी रही हो। लेकिन ऐसे मामले बहुत दुर्लभ होते हैं। ज्यादातर बच्चों में न्यूरोब्लास्टोमा बिना किसी पारिवारिक इतिहास के ही पाया जाता है।

न्यूरोब्लास्टोमा कैंसर को गंभीर क्यों माना जाता है

न्यूरोब्लास्टोमा को गंभीर इसलिए माना जाता है क्योंकि यह बहुत कम उम्र में होता है और तेजी से फैल सकता है। बच्चों का शरीर अभी विकसित हो रहा होता है, ऐसे में कैंसर का असर उनके पूरे विकास पर पड़ सकता है।

यह कैंसर हड्डियों, लिवर, बोन मैरो और लिम्फ नोड्स तक फैल सकता है। अगर समय पर पहचान न हो, तो बीमारी एडवांस स्टेज में पहुंच सकती है, जिससे इलाज ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

न्यूरोब्लास्टोमा कैंसर के शुरुआती लक्षण

इस कैंसर के शुरुआती लक्षण अक्सर बहुत सामान्य लगते हैं, जिस वजह से माता-पिता इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। बच्चे का चिड़चिड़ा होना, ठीक से खाना न खाना या बार-बार रोना शुरुआती संकेत हो सकते हैं।

कई बच्चों में पेट में सूजन या गांठ महसूस हो सकती है। कुछ मामलों में वजन का कम होना, कमजोरी और लगातार थकान भी दिखाई देती है। क्योंकि बच्चे अपनी परेशानी ठीक से बता नहीं पाते, इसलिए लक्षण पहचानना और भी मुश्किल हो जाता है।

शरीर के अलग-अलग हिस्सों में दिखने वाले लक्षण

अगर न्यूरोब्लास्टोमा पेट में हो, तो बच्चे का पेट फूला हुआ लग सकता है और उसे पेट दर्द हो सकता है। अगर कैंसर छाती के पास हो, तो सांस लेने में परेशानी या खांसी हो सकती है।

रीढ़ की हड्डी के पास कैंसर होने पर हाथ-पैरों में कमजोरी, चलने में परेशानी या सुन्नपन भी दिख सकता है। कुछ बच्चों की आंखों के आसपास सूजन, आंखों का बाहर की ओर निकलना या आंखों के नीचे काले घेरे भी दिखाई देते हैं।

न्यूरोब्लास्टोमा और हड्डियों पर असर

जब यह कैंसर हड्डियों तक फैलता है, तो बच्चे को हड्डियों में दर्द होने लगता है। बच्चा चलने से कतराने लगता है या रोने लगता है। कई बार माता-पिता इसे चोट समझ लेते हैं, लेकिन लगातार दर्द एक गंभीर संकेत हो सकता है।

हड्डियों में फैलाव होने पर बच्चा बहुत कमजोर हो सकता है और उसकी गतिविधियां सीमित हो जाती हैं।

न्यूरोब्लास्टोमा कैंसर की पहचान कैसे होती है

डॉक्टर सबसे पहले बच्चे के लक्षणों और शारीरिक जांच के आधार पर शक करते हैं। इसके बाद अल्ट्रासाउंड, CT स्कैन या MRI जैसी जांच कराई जाती है, जिससे शरीर के अंदर गांठ का पता चलता है।

कुछ मामलों में खून और पेशाब की जांच से भी संकेत मिलते हैं। अंतिम पुष्टि के लिए बायोप्सी की जाती है, जिसमें ट्यूमर का छोटा सैंपल लेकर जांच की जाती है।

न्यूरोब्लास्टोमा कैंसर का इलाज

न्यूरोब्लास्टोमा का इलाज बच्चे की उम्र, कैंसर की स्टेज और उसके फैलाव पर निर्भर करता है। कुछ शुरुआती मामलों में इलाज के अच्छे परिणाम देखने को मिलते हैं।

इलाज में सर्जरी, कीमोथेरेपी और कुछ मामलों में रेडिएशन थेरेपी की जरूरत पड़ सकती है। कई बार इन इलाजों का संयोजन किया जाता है, ताकि कैंसर को पूरी तरह कंट्रोल किया जा सके।

छोटे बच्चों में इलाज क्यों चुनौतीपूर्ण होता है

बच्चों का शरीर बहुत नाजुक होता है, इसलिए इलाज करते समय बहुत सावधानी रखनी पड़ती है। दवाइयों की मात्रा, साइड इफेक्ट्स और बच्चे की सहनशक्ति को ध्यान में रखकर इलाज किया जाता है।

इलाज के दौरान बच्चे को शारीरिक के साथ-साथ भावनात्मक सहारे की भी जरूरत होती है। माता-पिता की मौजूदगी और प्यार बच्चे को इस मुश्किल दौर से गुजरने में मदद करता है।

इलाज के बाद फॉलो-अप क्यों जरूरी है

इलाज खत्म होने के बाद भी बच्चे की नियमित जांच बहुत जरूरी होती है। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि कैंसर दोबारा तो नहीं आ रहा और बच्चे का विकास सही तरीके से हो रहा है।

फॉलो-अप के दौरान डॉक्टर बच्चे की ग्रोथ, इम्यून सिस्टम और किसी भी लंबे समय के साइड इफेक्ट पर नजर रखते हैं।

माता-पिता के लिए भावनात्मक चुनौती

न्यूरोब्लास्टोमा सिर्फ बच्चे को नहीं, बल्कि पूरे परिवार को मानसिक रूप से प्रभावित करता है। डर, चिंता और थकान माता-पिता के लिए आम हो जाती है। ऐसे समय में सही जानकारी, डॉक्टर का भरोसा और परिवार का सहयोग बहुत जरूरी होता है।

सही अस्पताल और डॉक्टर का चुनाव

बच्चों के कैंसर के इलाज में अनुभवी डॉक्टर और आधुनिक सुविधाओं की बहुत अहम भूमिका होती है। जहां बच्चों के लिए खास देखभाल, सुरक्षित इलाज और भावनात्मक सहयोग मिले, वहां इलाज का अनुभव बेहतर होता है।

आज ही परामर्श लें

न्यूरोब्लास्टोमा कैंसर एक गंभीर बीमारी जरूर है, लेकिन समय पर पहचान और सही इलाज से कई बच्चों में अच्छे परिणाम देखने को मिलते हैं। अगर आपके बच्चे में पेट की गांठ, लगातार कमजोरी, वजन कम होना या असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो देर न करें।

अगर आप भरोसेमंद और विशेषज्ञ इलाज की तलाश में हैं, तो Oncare Cancer Hospital एक विश्वसनीय विकल्प है। यहां अनुभवी डॉक्टरों की देखरेख में बच्चों के कैंसर का आधुनिक और संवेदनशील इलाज किया जाता है, ताकि बच्चे को बेहतर स्वास्थ्य के साथ एक नई शुरुआत मिल सके।

FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

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