लंग कैंसर की दवाएं: टार्गेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी के नाम

oncare team
Updated on Aug 27, 2026 16:12 IST

By Dr. Gajendra Kumar Himanshu

लंग कैंसर की दवाएं

लंग कैंसर की दवाएं मरीज के कैंसर के प्रकार, स्टेज और जीन टेस्ट (Biomarker Testing) की रिपोर्ट के आधार पर तय की जाती हैं। आज के समय में टार्गेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी लंग कैंसर के इलाज के महत्वपूर्ण विकल्प बन चुके हैं। इन दवाओं का उद्देश्य केवल कैंसर को नियंत्रित करना ही नहीं, बल्कि कई मरीजों में इलाज के बेहतर परिणाम और जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाना भी होता है। हालांकि, कौन-सी दवा किस मरीज के लिए सही रहेगी, इसका फैसला केवल कैंसर विशेषज्ञ जांच रिपोर्ट देखने के बाद ही करते हैं।

आज के इस ब्लॉग में हम आपको बताएंगे कि लंग कैंसर की दवाएं कौन-कौन सी होती हैं, टार्गेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी कैसे काम करती हैं, इनका इस्तेमाल किन मरीजों में किया जाता है, प्रमुख दवाओं के नाम क्या हैं, इलाज के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और डॉक्टर किस आधार पर सही दवा का चयन करते हैं।

लंग कैंसर में दवाओं की जरूरत कब पड़ती है?

हर लंग कैंसर के मरीज को एक जैसा इलाज नहीं दिया जाता। कुछ मरीजों का इलाज केवल सर्जरी से हो सकता है, जबकि कई मामलों में रेडिएशन, कीमोथेरेपी, टार्गेटेड थेरेपी या इम्यूनोथेरेपी की जरूरत पड़ती है। यह पूरी तरह कैंसर की स्टेज, उसके फैलाव और मरीज की जांच रिपोर्ट पर निर्भर करता है।

यदि कैंसर फेफड़ों से बाहर फैल चुका हो, सर्जरी संभव न हो या इलाज के बाद कैंसर दोबारा लौट आए, तो डॉक्टर दवाओं के जरिए बीमारी को नियंत्रित करने की कोशिश करते हैं। कई मरीजों में जीन टेस्ट के आधार पर टार्गेटेड दवाएं दी जाती हैं, जबकि कुछ मरीजों में PD-L1 जैसी जांच के बाद इम्यूनोथेरेपी प्रभावी विकल्प हो सकती है।

किन परिस्थितियों में दवा दी जा सकती है?

  • कैंसर को बढ़ने से रोकने के लिए
  • ट्यूमर का आकार कम करने के लिए
  • एडवांस स्टेज लंग कैंसर में
  • सर्जरी संभव न होने पर
  • कैंसर दोबारा होने पर
  • मरीज के लक्षणों को कम करने और जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाने के लिए

लंग कैंसर में इस्तेमाल होने वाले इलाज का अंतर

इलाज

कैसे काम करता है

किन मरीजों में उपयोग

कीमोथेरेपी

तेजी से बढ़ने वाली कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करती है

कई प्रकार के लंग कैंसर में

टार्गेटेड थेरेपी

कैंसर कोशिकाओं के विशेष जीन या प्रोटीन को निशाना बनाती है

जिन मरीजों में विशेष जीन बदलाव मिले हों

इम्यूनोथेरेपी

शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कैंसर से लड़ने में मदद करती है

PD-L1 या अन्य उपयुक्त रिपोर्ट वाले मरीजों में

टार्गेटेड थेरेपी क्या है?

टार्गेटेड थेरेपी एक आधुनिक इलाज है जो कैंसर कोशिकाओं की खास जैविक विशेषताओं को पहचानकर उन पर असर करती है। यह सामान्य कीमोथेरेपी की तरह सभी तेजी से बढ़ने वाली कोशिकाओं पर हमला नहीं करती, बल्कि केवल उन कोशिकाओं को निशाना बनाती है जिनमें विशेष जीन परिवर्तन मौजूद होते हैं।

इसलिए टार्गेटेड थेरेपी शुरू करने से पहले डॉक्टर जीन प्रोफाइलिंग या बायोमार्कर टेस्ट कराने की सलाह देते हैं। यदि रिपोर्ट में कोई खास म्यूटेशन मिलता है, तभी यह इलाज दिया जाता है।

टार्गेटेड थेरेपी के प्रमुख फायदे

  • कैंसर कोशिकाओं को सीधे निशाना बनाती है।
  • कुछ मरीजों में लंबे समय तक बीमारी नियंत्रित रह सकती है।
  • कई दवाएं टैबलेट के रूप में उपलब्ध हैं।
  • सामान्य कीमोथेरेपी की तुलना में कुछ अलग प्रकार के साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं।

लंग कैंसर में इस्तेमाल होने वाली टार्गेटेड थेरेपी की दवाएं

लंग कैंसर में कई प्रकार के जीन म्यूटेशन पाए जा सकते हैं। हर म्यूटेशन के लिए अलग दवा उपलब्ध हो सकती है।

EGFR म्यूटेशन के लिए

  • Osimertinib
  • Gefitinib
  • Erlotinib
  • Afatinib

ALK म्यूटेशन के लिए

  • Alectinib
  • Crizotinib
  • Brigatinib
  • Lorlatinib

ROS1 म्यूटेशन के लिए

  • Crizotinib
  • Entrectinib

BRAF म्यूटेशन के लिए

  • Dabrafenib
  • Trametinib

MET, RET और KRAS म्यूटेशन के लिए

  • Capmatinib
  • Selpercatinib
  • Pralsetinib
  • Sotorasib
  • Adagrasib

इन दवाओं का उपयोग तभी किया जाता है जब संबंधित जीन परिवर्तन जांच में पाया जाए। बिना जांच के इन दवाओं का उपयोग नहीं किया जाता।

इम्यूनोथेरेपी क्या होती है?

हमारे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली सामान्य रूप से संक्रमण और असामान्य कोशिकाओं से लड़ती है। लेकिन कई बार कैंसर कोशिकाएं खुद को इस तरह छिपा लेती हैं कि प्रतिरक्षा प्रणाली उन्हें पहचान नहीं पाती। इम्यूनोथेरेपी ऐसी दवाओं का समूह है जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को फिर से सक्रिय करने में मदद करता है ताकि वह कैंसर कोशिकाओं पर हमला कर सके।

यह इलाज हर मरीज के लिए उपयुक्त नहीं होता। डॉक्टर PD-L1 और अन्य जांच रिपोर्ट के आधार पर तय करते हैं कि मरीज को इम्यूनोथेरेपी से लाभ मिलने की संभावना है या नहीं।

लंग कैंसर में इस्तेमाल होने वाली इम्यूनोथेरेपी की दवाएं

लंग कैंसर के इलाज में कई इम्यूनोथेरेपी दवाएं उपयोग की जाती हैं।

सामान्य रूप से इस्तेमाल होने वाली दवाएं

  • Pembrolizumab
  • Nivolumab
  • Atezolizumab
  • Durvalumab
  • Cemiplimab
  • Ipilimumab (कुछ मरीजों में अन्य दवाओं के साथ)

इन दवाओं का चयन मरीज की रिपोर्ट, कैंसर के प्रकार और पहले दिए गए इलाज के आधार पर किया जाता है।

टार्गेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी में क्या अंतर है?

दोनों आधुनिक इलाज हैं, लेकिन इनका काम करने का तरीका अलग है।

टार्गेटेड थेरेपी

  • जीन म्यूटेशन वाले कैंसर पर असर करती है।
  • जीन टेस्ट जरूरी होता है।
  • अधिकतर मामलों में टैबलेट के रूप में दी जाती है।
  • कैंसर कोशिकाओं के विशेष हिस्से को निशाना बनाती है।

इम्यूनोथेरेपी

  • शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय करती है।
  • PD-L1 जैसी जांच की जरूरत हो सकती है।
  • आमतौर पर नस के जरिए दी जाती है।
  • प्रतिरक्षा प्रणाली को कैंसर पहचानने में मदद करती है।

इलाज के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

आधुनिक दवाएं प्रभावी हो सकती हैं, लेकिन इनके साथ नियमित निगरानी भी जरूरी होती है। मरीज को डॉक्टर की सलाह के अनुसार सभी जांच समय पर करानी चाहिए और किसी भी नए लक्षण को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

इलाज के दौरान ये बातें याद रखें

  • दवा समय पर लें।
  • डॉक्टर की सलाह के बिना दवा बंद न करें।
  • फॉलो-अप जांच नियमित कराएं।
  • संतुलित और पौष्टिक भोजन लें।
  • पर्याप्त पानी पिएं।
  • धूम्रपान और तंबाकू से पूरी तरह दूरी रखें।
  • सांस लेने में परेशानी, तेज बुखार या अचानक कमजोरी होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

क्या इन दवाओं के साइड इफेक्ट्स होते हैं?

हर मरीज में साइड इफेक्ट्स अलग हो सकते हैं। कुछ लोगों को हल्की परेशानी होती है, जबकि कुछ मरीजों को अतिरिक्त देखभाल की जरूरत पड़ सकती है।

टार्गेटेड थेरेपी के संभावित साइड इफेक्ट्स

  • त्वचा पर दाने
  • दस्त
  • मुंह के छाले
  • थकान
  • नाखूनों में बदलाव
  • लीवर से जुड़ी समस्याएं (कुछ मामलों में)

इम्यूनोथेरेपी के संभावित साइड इफेक्ट्स

  • थकान
  • त्वचा पर खुजली या रैश
  • दस्त
  • खांसी
  • सांस लेने में परेशानी
  • शरीर के कुछ अंगों में सूजन या प्रतिरक्षा से जुड़ी समस्याएं

यदि इलाज के दौरान कोई नया या गंभीर लक्षण दिखाई दे, तो तुरंत अपने ऑन्कोलॉजिस्ट को जानकारी दें।

क्या हर लंग कैंसर मरीज को टार्गेटेड थेरेपी या इम्यूनोथेरेपी दी जाती है?

नहीं। यह एक आम गलतफहमी है कि आधुनिक दवाएं हर मरीज के लिए उपयुक्त होती हैं। वास्तव में, इन दवाओं का चयन पूरी तरह जांच रिपोर्ट पर आधारित होता है। यदि मरीज में EGFR, ALK, ROS1, KRAS या अन्य जीन म्यूटेशन नहीं मिलता, तो टार्गेटेड थेरेपी लाभकारी नहीं होगी। इसी तरह, इम्यूनोथेरेपी देने से पहले डॉक्टर PD-L1 और अन्य जरूरी जांचों की समीक्षा करते हैं।

इसलिए लंग कैंसर का इलाज हमेशा व्यक्तिगत होता है। एक मरीज के लिए प्रभावी दवा दूसरे मरीज के लिए सही विकल्प हो, यह जरूरी नहीं है।

अगर आप लंग कैंसर के बारे में और ज्यादा जानकारी पढ़ना चाहते हैं तो आप National Cancer Institute की ऑफिशियल वेबसाइट पर जा सकते हैं।

आज ही परामर्श लें

यदि आपको या आपके किसी करीबी को लंग कैंसर का पता चला है, तो इलाज शुरू करने से पहले सही जांच और विशेषज्ञ की सलाह लेना बहुत जरूरी है। Oncare Cancer Hospital में अनुभवी मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट मरीज की बायोप्सी, जीन टेस्ट और अन्य रिपोर्ट का विस्तार से मूल्यांकन करके व्यक्तिगत उपचार योजना तैयार करते हैं। यहां टार्गेटेड थेरेपी, इम्यूनोथेरेपी, कीमोथेरेपी और अन्य आधुनिक कैंसर उपचार सुविधाएं उपलब्ध हैं, ताकि हर मरीज को उसकी स्थिति के अनुसार सबसे उपयुक्त इलाज मिल सके।

डिस्क्लेमर

यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई दवाओं का उपयोग बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं करना चाहिए। लंग कैंसर का इलाज हमेशा कैंसर विशेषज्ञ की देखरेख में ही कराया जाना चाहिए और दवा का चयन जांच रिपोर्ट के आधार पर किया जाता है।

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Written and Verified by:

Dr. Gajendra Kumar Himanshu

Dr. Gajendra Kumar Himanshu Exp: 10 Yr

Medical Officer

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