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गले के कैंसर में इस्तेमाल होने वाली दवाएं: कीमो और टार्गेटेड थेरेपी
गले के कैंसर में इस्तेमाल होने वाली दवाएं मरीज की बीमारी की स्टेज, कैंसर के प्रकार, उसकी सेहत और इलाज के उद्देश्य पर निर्भर करती हैं। इस बीमारी में सबसे अधिक कीमोथेरेपी (Chemotherapy) और टार्गेटेड थेरेपी (Targeted Therapy) का उपयोग किया जाता है। कुछ मरीजों को केवल दवा दी जाती है, जबकि कई मामलों में इन दवाओं को सर्जरी या रेडिएशन थेरेपी के साथ मिलाकर दिया जाता है ताकि इलाज का असर बेहतर हो और कैंसर को नियंत्रित किया जा सके।
आज के इस ब्लॉग में हम आपको बताएंगे कि गले के कैंसर में इस्तेमाल होने वाली दवाएं कौन-कौन सी होती हैं, कीमोथेरेपी और टार्गेटेड थेरेपी कैसे काम करती हैं, किन मरीजों को कौन-सा इलाज दिया जाता है, इनके संभावित साइड इफेक्ट्स क्या हो सकते हैं और इलाज के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
गले के कैंसर के इलाज में दवाओं की जरूरत कब पड़ती है?
हर गले के कैंसर के मरीज का इलाज एक जैसा नहीं होता। किस मरीज को दवा की जरूरत है और किसे नहीं, इसका फैसला डॉक्टर कई महत्वपूर्ण बातों को ध्यान में रखकर करते हैं। इनमें कैंसर की स्टेज, ट्यूमर का आकार, उसका फैलाव, मरीज की उम्र, सामान्य स्वास्थ्य और अन्य बीमारियां शामिल होती हैं। यदि गले का कैंसर शुरुआती अवस्था में है और केवल एक हिस्से तक सीमित है, तो कई मामलों में सर्जरी या रेडिएशन थेरेपी से ही सफल इलाज किया जा सकता है। वहीं, यदि कैंसर बड़ा हो गया हो, आसपास के ऊतकों या लिम्फ नोड्स तक फैल गया हो, या इलाज के बाद दोबारा लौट आया हो, तो कीमोथेरेपी या टार्गेटेड थेरेपी जैसी दवाओं की जरूरत पड़ सकती है।
इन दवाओं का उद्देश्य केवल कैंसर को खत्म करना ही नहीं होता, बल्कि कई मामलों में ट्यूमर का आकार कम करना, रेडिएशन थेरेपी के प्रभाव को बढ़ाना, शरीर के अन्य हिस्सों में फैले कैंसर को नियंत्रित करना और मरीज के लक्षणों को कम करके उसकी जीवन गुणवत्ता में सुधार लाना भी होता है। इलाज शुरू करने से पहले डॉक्टर बायोप्सी रिपोर्ट, सीटी स्कैन, एमआरआई या पीईटी-सीटी जैसी जांचों के साथ मरीज की पूरी स्वास्थ्य स्थिति का मूल्यांकन करते हैं। इन सभी जानकारियों के आधार पर यह तय किया जाता है कि मरीज के लिए कौन-सी दवा या दवाओं का संयोजन सबसे अधिक प्रभावी और सुरक्षित रहेगा।
गले के कैंसर में इस्तेमाल होने वाले इलाज का संक्षिप्त अंतर
इलाज का प्रकार | कैसे काम करता है | कब दिया जाता है |
|---|---|---|
कीमोथेरेपी | तेजी से बढ़ने वाली कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करती है | रेडिएशन के साथ, सर्जरी से पहले या बाद में, या एडवांस कैंसर में |
टार्गेटेड थेरेपी | कैंसर कोशिकाओं के विशेष प्रोटीन या रिसेप्टर को निशाना बनाती है | चुने हुए मरीजों में, खासकर जब टार्गेटेड दवा उपयुक्त हो |
इम्यूनोथेरेपी | शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कैंसर से लड़ने में मदद करती है | कुछ एडवांस या दोबारा होने वाले मामलों में |
कीमोथेरेपी क्या है और यह कैसे काम करती है?
कीमोथेरेपी ऐसी दवा है जो तेजी से बढ़ रही कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने या उनकी वृद्धि को रोकने का प्रयास करती है। यह दवा नस के माध्यम से या कुछ मामलों में टैबलेट के रूप में दी जाती है। गले के कैंसर में कीमोथेरेपी अक्सर अकेले नहीं, बल्कि रेडिएशन थेरेपी के साथ दी जाती है।
कीमोथेरेपी का उद्देश्य मरीज की स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। कई बार यह ट्यूमर को छोटा करती है ताकि आगे का इलाज आसान हो सके। कुछ मामलों में इसका उपयोग कैंसर के फैलने को रोकने या उसके लक्षणों को कम करने के लिए भी किया जाता है।
गले के कैंसर में इस्तेमाल होने वाली सामान्य कीमो दवाएं
डॉक्टर मरीज की जरूरत के अनुसार अलग-अलग दवाओं का चुनाव कर सकते हैं, जैसे:
- सिस्प्लैटिन (Cisplatin)
- कार्बोप्लैटिन (Carboplatin)
- 5-फ्लूरोयूरासिल (5-FU)
- डोसेटैक्सेल (Docetaxel)
- पैक्लिटैक्सेल (Paclitaxel)
हर मरीज को ये सभी दवाएं नहीं दी जाती हैं। कौन-सी दवा और कितने समय तक दी जाएगी, यह पूरी तरह डॉक्टर के इलाज की योजना पर निर्भर करता है।
टार्गेटेड थेरेपी क्या होती है?
टार्गेटेड थेरेपी आधुनिक कैंसर इलाज का एक महत्वपूर्ण विकल्प है। यह सामान्य कीमोथेरेपी की तरह सभी तेजी से बढ़ने वाली कोशिकाओं पर असर नहीं डालती, बल्कि कैंसर कोशिकाओं की कुछ विशेष खूबियों को पहचानकर उन पर हमला करती है।
यदि जांच में पता चलता है कि मरीज का कैंसर किसी खास प्रोटीन या रिसेप्टर से जुड़ा है, तो डॉक्टर टार्गेटेड थेरेपी की सलाह दे सकते हैं।
टार्गेटेड थेरेपी के क्या फायदे हो सकते हैं?
- कैंसर कोशिकाओं को सीधे निशाना बनाती है।
- कुछ मरीजों में अच्छे परिणाम देखने को मिलते हैं।
- कई बार रेडिएशन या कीमो के साथ भी दी जा सकती है।
- कुछ मामलों में बीमारी के बढ़ने की गति कम करने में मदद मिलती है।
गले के कैंसर में सेटुक्सिमैब (Cetuximab) जैसी दवा कुछ मरीजों में उपयोग की जाती है। हालांकि यह हर मरीज के लिए उपयुक्त नहीं होती। इसलिए इलाज शुरू करने से पहले जरूरी जांच की जाती है।
इलाज के दौरान कौन-कौन से साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं?
हर मरीज में साइड इफेक्ट्स एक जैसे नहीं होते। कुछ लोगों को हल्की परेशानी होती है, जबकि कुछ मरीजों को अधिक देखभाल की जरूरत पड़ सकती है।
कीमोथेरेपी के सामान्य साइड इफेक्ट्स
- थकान महसूस होना
- मतली और उल्टी
- मुंह में छाले
- स्वाद में बदलाव
- बाल झड़ना
- संक्रमण का खतरा बढ़ना
- भूख कम लगना
टार्गेटेड थेरेपी के संभावित साइड इफेक्ट्स
- त्वचा पर दाने
- खुजली
- सूखी त्वचा
- दस्त
- कमजोरी
- नाखूनों में बदलाव
इनमें से किसी भी समस्या को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी या लगातार उल्टी जैसी समस्या हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
इलाज के दौरान मरीज को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
दवा का असर केवल अस्पताल में मिलने वाले इलाज पर ही निर्भर नहीं करता। मरीज की रोजमर्रा की आदतें भी रिकवरी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
खानपान का ध्यान रखें
इलाज के दौरान शरीर को पर्याप्त पोषण की जरूरत होती है। हल्का, ताजा और प्रोटीन से भरपूर भोजन लेना फायदेमंद हो सकता है। यदि निगलने में परेशानी हो तो डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह के अनुसार नरम भोजन लें।
शरीर में पानी की कमी न होने दें
दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी और अन्य तरल पदार्थ लेते रहें। इससे शरीर को दवाओं के प्रभाव से उबरने में मदद मिल सकती है।
दवाएं समय पर लें
डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं और उनकी मात्रा में बदलाव खुद से न करें। किसी भी नई दवा या सप्लीमेंट का उपयोग करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।
संक्रमण से बचाव करें
इलाज के दौरान रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो सकती है। इसलिए हाथों की सफाई रखें, भीड़ वाली जगहों से बचें और बीमार लोगों के संपर्क में आने से बचने की कोशिश करें।
फॉलो-अप जांच न छोड़ें
इलाज के दौरान और उसके बाद होने वाली सभी जांच और डॉक्टर की मुलाकातें समय पर कराना जरूरी है। इससे इलाज की प्रगति का सही आकलन किया जा सकता है।
क्या हर मरीज को कीमो और टार्गेटेड थेरेपी दोनों दी जाती हैं?
नहीं। हर मरीज के लिए इलाज अलग होता है। कुछ मरीजों को केवल कीमोथेरेपी की जरूरत होती है, कुछ को टार्गेटेड थेरेपी दी जाती है और कुछ मामलों में दोनों का उपयोग किया जा सकता है। कई मरीज ऐसे भी होते हैं जिनका इलाज केवल सर्जरी और रेडिएशन से पूरा हो जाता है।
इलाज का फैसला कैंसर विशेषज्ञों की टीम मरीज की रिपोर्ट, कैंसर की स्टेज, बीमारी के फैलाव और मरीज की शारीरिक स्थिति को ध्यान में रखकर करती है। इसलिए किसी दूसरे मरीज का इलाज देखकर अपने लिए अनुमान लगाना सही नहीं है।
अगर आप गले के कैंसर के बारे में और ज्यादा जानकारी पढ़ना चाहते हैं तो आप National Cancer Institute की ऑफिशियल वेबसाइट पर जा सकते हैं।
आज ही परामर्श लें
यदि आपको या आपके परिवार के किसी सदस्य को गले के कैंसर का पता चला है, तो बिना देरी किए कैंसर विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है। सही समय पर शुरू किया गया इलाज अच्छे परिणाम की संभावना बढ़ा सकता है। Oncare Cancer Hospital में अनुभवी ऑन्कोलॉजिस्ट मरीज की पूरी जांच के बाद व्यक्तिगत इलाज की योजना तैयार करते हैं। यहां कीमोथेरेपी, टार्गेटेड थेरेपी, रेडिएशन और अन्य आधुनिक कैंसर उपचार एक ही स्थान पर उपलब्ध हैं, ताकि मरीज को उसकी बीमारी के अनुसार सबसे उपयुक्त इलाज मिल सके।
डिस्क्लेमर
यह लेख केवल सामान्य जानकारी देने के उद्देश्य से लिखा गया है। इसे डॉक्टर की सलाह का विकल्प न मानें। गले के कैंसर या किसी भी प्रकार के कैंसर से संबंधित दवा, जांच या इलाज शुरू करने या बदलने से पहले हमेशा योग्य ऑन्कोलॉजिस्ट से परामर्श लें।
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Frequently Asked Questions
नहीं। कैंसर का इलाज स्टेज, मरीज की सेहत और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर करता है।
दोनों का उद्देश्य अलग होता है। कौन-सा इलाज बेहतर रहेगा, यह मरीज की रिपोर्ट और कैंसर के प्रकार पर निर्भर करता है।
कई मरीज इलाज के दौरान अपनी सामान्य गतिविधियां जारी रखते हैं, लेकिन थकान और अन्य साइड इफेक्ट्स के कारण कुछ बदलाव करने पड़ सकते हैं।
कुछ मरीजों में इसके साइड इफेक्ट्स अलग और अपेक्षाकृत कम गंभीर हो सकते हैं, लेकिन यह पूरी तरह मरीज और इस्तेमाल की जा रही दवा पर निर्भर करता है।
Written and Verified by:
Dr. Gajendra Kumar Himanshu Exp: 10 Yr
Medical Officer
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