एचपीवी वैक्सीन क्या है और यह सर्वाइकल कैंसर से कैसे बचाती है?

oncare team
Updated on Mar 6, 2026 17:30 IST

By Prashant Baghel

हर लड़की और महिला के लिए उसकी सेहत सबसे बड़ी संपत्ति होती है। लेकिन जब बात महिलाओं की प्रजनन प्रणाली (Reproductive Health) की आती है, तो अक्सर इसके बारे में बात करने में झिझक होती है। यही कारण है कि कई महिलाएं एक ऐसी गंभीर बीमारी सर्वाइकल कैंसर (Cervical Cancer) का शिकार हो जाती हैं, जिसे रोका जा सकता है।

आज के समय में चिकित्सा विज्ञान ने इतनी तरक्की कर ली है कि अब सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए एक सुरक्षित और प्रभावी तरीका उपलब्ध है एचपीवी वैक्सीन (HPV Vaccine)। यह वैक्सीन महिलाओं के जीवन की सुरक्षा में एक अहम भूमिका निभाती है।

इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि एचपीवी वैक्सीन क्या होती है, यह कैसे काम करती है, किसे और कब लगवानी चाहिए, और इससे जुड़े ज़रूरी तथ्य क्या हैं।

एचपीवी क्या होता है?

एचपीवी का पूरा नाम ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (Human Papillomavirus) है। यह एक बहुत ही आम वायरस है, जो त्वचा और शरीर के जननांगों (Genital Area) को प्रभावित कर सकता है। दुनिया में लगभग 100 से भी ज्यादा प्रकार के एचपीवी पाए जाते हैं, जिनमें से कुछ बहुत हानिकारक होते हैं।

कुछ प्रकार के एचपीवी संक्रमण सर्वाइकल कैंसर, वजाइनल कैंसर, एनल कैंसर, और ओरल कैंसर जैसी बीमारियों का कारण बनते हैं।

अक्सर एचपीवी संक्रमण बिना किसी लक्षण के शरीर में मौजूद रहता है और कुछ समय बाद अपने आप ठीक भी हो सकता है। लेकिन कई बार यह संक्रमण लंबे समय तक बना रहता है और गर्भाशय ग्रीवा (Cervix) की कोशिकाओं में बदलाव कर देता है, जिससे कैंसर बनने का खतरा बढ़ जाता है।

एचपीवी वैक्सीन क्या है? (HPV Vaccine in Hindi)

एचपीवी वैक्सीन एक विशेष टीका है जो शरीर को एचपीवी वायरस के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करता है। यह वैक्सीन शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) को मजबूत बनाती है ताकि जब भी वायरस शरीर में प्रवेश करने की कोशिश करे, तो शरीर तुरंत उससे लड़ सके।

यह वैक्सीन खास तौर पर उन एचपीवी प्रकारों से बचाव करती है जो सर्वाइकल कैंसर और अन्य जननांगों से जुड़े कैंसर के लिए ज़िम्मेदार होते हैं।

एचपीवी वैक्सीन कैसे काम करती है?

जब एचपीवी वैक्सीन लगाई जाती है, तो यह शरीर में वायरस जैसा एक "नकली रूप" (Viral Protein) प्रवेश कराती है, जो असली वायरस नहीं होता लेकिन उससे मिलता-जुलता होता है।

इससे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली उसे पहचान लेती है और एंटीबॉडी (Antibodies) बनाना शुरू कर देती है। जब भविष्य में असली एचपीवी वायरस शरीर में प्रवेश करता है, तो यह तैयार एंटीबॉडी उसे तुरंत नष्ट कर देती हैं, जिससे संक्रमण नहीं फैलता और कैंसर बनने का खतरा खत्म हो जाता है।

एचपीवी वैक्सीन के प्रकार

भारत में फिलहाल दो प्रमुख एचपीवी वैक्सीन उपलब्ध हैं - गार्डासिल (Gardasil) और सर्वेरिक्स (Cervarix)।इन वैक्सीन में थोड़ा अंतर होता है, लेकिन दोनों का मुख्य उद्देश्य एचपीवी वायरस से सुरक्षा देना ही है।

गार्डासिल वैक्सीन एचपीवी के चार प्रमुख प्रकारों (6, 11, 16, 18) से बचाव करती है, जबकि सर्वेरिक्स वैक्सीन दो प्रमुख प्रकारों (16 और 18) से सुरक्षा प्रदान करती है। इन प्रकारों को कैंसर के 70% से अधिक मामलों के लिए ज़िम्मेदार माना गया है।

एचपीवी वैक्सीन कब लगवानी चाहिए?

विशेषज्ञों के अनुसार, एचपीवी वैक्सीन 9 से 14 साल की उम्र के बीच लगवाना सबसे प्रभावी होता है। इस उम्र में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली बहुत सक्रिय होती है और वैक्सीन का असर लंबे समय तक बना रहता है।

हालांकि, अगर किसी महिला ने यह टीका बचपन में नहीं लगवाया है, तो वह 26 साल की उम्र तक इसे लगवा सकती है। कुछ मामलों में डॉक्टर इसे 45 साल तक की उम्र में भी सुझाते हैं, खासकर अगर व्यक्ति एचपीवी संक्रमण से पहले है।

एचपीवी वैक्सीन कितने डोज़ में लगती है?

एचपीवी वैक्सीन आमतौर पर दो या तीन डोज़ में लगाई जाती है, जो उम्र पर निर्भर करता है।अगर लड़की की उम्र 9 से 14 साल के बीच है, तो दो डोज़ पर्याप्त होती हैं पहली डोज़ के 6 महीने बाद दूसरी डोज़ दी जाती है।15 साल से अधिक उम्र वालों को तीन डोज़ की ज़रूरत होती है पहली डोज़ के एक महीने बाद दूसरी, और फिर छह महीने बाद तीसरी।

एचपीवी वैक्सीन से क्या फायदे होते हैं?

एचपीवी वैक्सीन महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह है। इसके कुछ मुख्य लाभ हैं -

  • यह सर्वाइकल कैंसर के 90% मामलों को रोक सकती है।
  •  यह जननांगों में होने वाले अन्य कैंसर, जैसे वैजाइनल, एनल और ओरोफेरिन्जियल कैंसर से भी बचाव करती है।
  •  यह एचपीवी से जुड़ी सामान्य समस्याएं जैसे जननांग मस्से (Genital Warts) को भी रोकती है।
  •  यह महिलाओं में मानसिक शांति देती है, क्योंकि यह भविष्य के कैंसर के खतरे को बहुत कम कर देती है।

क्या एचपीवी वैक्सीन पुरुषों के लिए भी जरूरी है?

जी हां, कई लोग सोचते हैं कि एचपीवी वैक्सीन सिर्फ महिलाओं के लिए है, लेकिन ऐसा नहीं है। पुरुषों में भी एचपीवी वायरस से गले, एनल और जननांग कैंसर हो सकते हैं।

इसलिए 9 से 26 साल की उम्र के लड़कों को भी यह वैक्सीन लगवानी चाहिए ताकि संक्रमण का फैलाव रोका जा सके और वे खुद भी सुरक्षित रहें।

एचपीवी वैक्सीन कितनी सुरक्षित है?

एचपीवी वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित और प्रभावी मानी जाती है। दुनियाभर में करोड़ों लोगों को यह वैक्सीन दी जा चुकी है और इसके बहुत ही मामूली साइड इफेक्ट्स देखे गए हैं।

कुछ लोगों को इंजेक्शन लगने की जगह पर हल्की सूजन, दर्द या बुखार हो सकता है, जो कुछ घंटों या एक दिन में अपने आप ठीक हो जाता है।यह वैक्सीन गर्भवती महिलाओं को नहीं दी जाती, लेकिन स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए सुरक्षित होती है।

सर्वाइकल कैंसर की पहचान और बचाव

सिर्फ वैक्सीन ही नहीं, बल्कि नियमित जांच भी जरूरी है। 30 साल से अधिक उम्र की महिलाओं को समय-समय पर पैप स्मीयर टेस्ट (Pap Smear Test) करवाना चाहिए, जिससे गर्भाशय ग्रीवा में हुए किसी भी असामान्य बदलाव का पता पहले ही लगाया जा सके।

अगर एचपीवी वैक्सीन लग चुकी है, तब भी जांच करवाना जरूरी है, क्योंकि यह 100% सुरक्षा नहीं देती लेकिन जोखिम को बहुत कम कर देती है।

भारत में एचपीवी वैक्सीन की उपलब्धता

भारत सरकार अब एचपीवी वैक्सीन को राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम (National Immunization Programme) में शामिल करने पर काम कर रही है। कई निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में यह वैक्सीन आसानी से उपलब्ध है।इसकी कीमत 2000 से 4000 रुपये प्रति डोज़ के बीच होती है, जो वैक्सीन के प्रकार और स्थान पर निर्भर करती है।

आज ही परामर्श लें

सर्वाइकल कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसे समय रहते रोका जा सकता है और एचपीवी वैक्सीन इस रोकथाम की पहली सीढ़ी है। हर माता-पिता को अपनी बेटियों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए यह वैक्सीन जरूर लगवानी चाहिए।

अगर आप या आपके परिवार में कोई महिला इस वैक्सीन के बारे में अधिक जानना चाहती हैं या सर्वाइकल कैंसर से जुड़ी जांच करवाना चाहती हैं, तो Oncare Cancer Hospital जैसे भरोसेमंद संस्थान में परामर्श लें।यहां अनुभवी डॉक्टर, आधुनिक तकनीक और समर्पित देखभाल के साथ हर महिला को दी जाती है जीवन की नई उम्मीद।

FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

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