शरीर में कैंसर होने का पता कैसे लगाएं?

oncare team
Updated on Jun 20, 2026 19:18 IST

By Dr. Gajendra Kumar Himanshu

शरीर में कैंसर का पता कैसे लगाएं? लक्षण, जांच और स्क्रीनिंग | Oncare

शरीर में कैंसर का पता मुख्य रूप से तीन तरीकों से लगाया जा सकता है। पहला, शरीर में दिखाई देने वाले असामान्य लक्षणों और बदलावों को पहचानना। दूसरा, समय-समय पर खुद की जांच (Self-Examination) करना। और तीसरा, जरूरत पड़ने पर डॉक्टर द्वारा सुझाई गई मेडिकल जांचें करवाना। कैंसर का जल्दी पता चलने पर इलाज अधिक प्रभावी हो सकता है, इसलिए शरीर के संकेतों को समझना और समय पर जांच करवाना बहुत जरूरी है।

शरीर के किन संकेतों पर ध्यान देना चाहिए?

कैंसर के लक्षण हर व्यक्ति में एक जैसे नहीं होते। यह इस बात पर निर्भर करता है कि कैंसर शरीर के किस हिस्से में है और यह किस चरण में है। फिर भी कुछ ऐसे संकेत हैं जिन्हें लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। जरूरी नहीं कि ये सभी लक्षण कैंसर के ही हों, लेकिन अगर ये लगातार बने रहें या समय के साथ बढ़ते जाएं, तो डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी हो जाता है।

बिना वजह वजन कम होना

अगर बिना किसी डाइट, व्यायाम या जीवनशैली में बदलाव के आपका वजन लगातार कम होने लगे, तो यह शरीर के अंदर किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है। कई प्रकार के कैंसर में शरीर की ऊर्जा तेजी से खर्च होने लगती है, जिससे अचानक वजन कम हो सकता है।

लगातार थकान और कमजोरी

दिनभर आराम करने के बाद भी अगर थकान बनी रहती है या रोजमर्रा के छोटे-छोटे काम करने में भी कमजोरी महसूस होती है, तो इसे सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लंबे समय तक रहने वाली कमजोरी कई गंभीर बीमारियों का संकेत हो सकती है।

शरीर में गांठ या सूजन

यदि गर्दन, बगल, स्तन, पेट या शरीर के किसी अन्य हिस्से में नई गांठ या सूजन महसूस हो, तो उसकी जांच करवाना जरूरी है। हर गांठ कैंसर नहीं होती, लेकिन बिना कारण बनी रहने वाली गांठ को डॉक्टर को जरूर दिखाना चाहिए।

लंबे समय तक रहने वाला दर्द

शरीर के किसी हिस्से में लगातार दर्द बना रहना और दवाइयों के बाद भी आराम न मिलना चिंता का विषय हो सकता है। खासकर पेट, हड्डियों, सिर या पीठ में लंबे समय तक रहने वाला दर्द जांच की मांग करता है।

मल या पेशाब की आदतों में बदलाव

बार-बार कब्ज होना, लगातार दस्त रहना, पेशाब की आदतों में बदलाव आना या मल और पेशाब में खून दिखाई देना ऐसे संकेत हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

लगातार खांसी या आवाज में बदलाव

अगर खांसी कई हफ्तों तक बनी रहे, आवाज बैठ जाए या सांस लेने में परेशानी होने लगे, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। खासकर धूम्रपान करने वाले लोगों को ऐसे लक्षणों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

न भरने वाले घाव

मुंह, जीभ, त्वचा या शरीर के किसी हिस्से पर बना घाव अगर लंबे समय तक ठीक नहीं हो रहा है, तो इसकी जांच करानी चाहिए। कुछ प्रकार के कैंसर की शुरुआत ऐसे ही संकेतों से हो सकती है।

यदि आप कैंसर के लक्षणों के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं, तो हमारा Cancer Symptoms in Hindi ब्लॉग भी पढ़ सकते हैं, जहां विभिन्न प्रकार के कैंसर के शुरुआती और उन्नत लक्षणों की विस्तृत जानकारी दी गई है।

खुद से कैंसर की जांच कैसे करें? (Self-Examination)

कई प्रकार के कैंसर के शुरुआती संकेत व्यक्ति स्वयं भी पहचान सकता है। हालांकि सेल्फ-एग्जामिनेशन कैंसर की पुष्टि नहीं करता, लेकिन यह शुरुआती बदलावों को पहचानने में मदद कर सकता है।

स्तन की स्वयं जांच (Breast Self-Examination)

महिलाएं महीने में एक बार स्तनों की जांच कर सकती हैं। किसी नई गांठ, त्वचा में बदलाव, निप्पल से स्राव या असामान्य सूजन दिखाई दें तो डॉक्टर से सलाह लें।

त्वचा और तिल की जांच (Skin and Mole Check)

अगर किसी तिल का आकार, रंग या आकृति बदल रही है, या त्वचा पर कोई नया असामान्य निशान दिखाई दे रहा है, तो इसकी जांच करवानी चाहिए।

शरीर में गांठ की जांच

नहाते समय या कपड़े बदलते समय शरीर में नई गांठ, सूजन या असामान्य उभार पर ध्यान देना चाहिए, विशेष रूप से गर्दन, बगल और कमर के आसपास।

मुंह की जांच (Oral Self-Check)

तंबाकू या धूम्रपान करने वाले लोगों को समय-समय पर मुंह के अंदर सफेद या लाल धब्बे, घाव या असामान्य बदलावों की जांच करनी चाहिए।

ध्यान रखें कि सेल्फ-एग्जामिनेशन केवल शुरुआती संकेत पहचानने का तरीका है। कैंसर की पुष्टि हमेशा मेडिकल जांचों से ही की जाती है। अगर आप कैंसर स्क्रीनिंग के बारे में किसी सरकारी वेबसाइट से और जानकारी पढ़ना चाहते हैं, तो आप National Cancer Institute की वेबसाइट पर जा सकते हैं।

कैंसर का पता लगाने के लिए कौन-कौन से टेस्ट किए जाते हैं?

यदि डॉक्टर को कैंसर का संदेह होता है, तो वे मरीज के लक्षण, उम्र, मेडिकल हिस्ट्री और शारीरिक जांच के आधार पर कुछ विशेष टेस्ट कराने की सलाह देते हैं।

ब्लड टेस्ट (Blood Tests)

ब्लड टेस्ट शरीर की सामान्य स्थिति के बारे में जानकारी देते हैं। कुछ मामलों में डॉक्टर विशेष ट्यूमर मार्कर टेस्ट भी सुझा सकते हैं, हालांकि केवल ब्लड टेस्ट से कैंसर की पुष्टि नहीं की जा सकती।

इमेजिंग टेस्ट (CT Scan, MRI, PET-CT)

CT स्कैन, MRI और PET-CT जैसी जांचें शरीर के अंदर मौजूद असामान्य गांठ, ट्यूमर या कैंसर के फैलाव को पहचानने में मदद करती हैं।

एंडोस्कोपी (Endoscopy)

यदि कैंसर का संदेह पाचन तंत्र, भोजन नली या पेट से जुड़ा हो, तो एंडोस्कोपी की जा सकती है। इसमें कैमरे की मदद से शरीर के अंदर की परतों को देखा जाता है।

बायोप्सी (Biopsy)

बायोप्सी कैंसर की पुष्टि करने वाली सबसे महत्वपूर्ण जांच मानी जाती है। इसमें संदिग्ध ऊतक (Tissue) का छोटा नमूना लेकर लैब में उसकी जांच की जाती है।

ट्यूमर मार्कर टेस्ट (Tumor Marker Tests)

कुछ प्रकार के कैंसर में विशेष प्रोटीन या रसायनों की जांच की जाती है जिन्हें ट्यूमर मार्कर कहा जाता है। यह जांच निदान और उपचार की निगरानी में सहायक हो सकती है।

कैंसर जांच से जुड़ी विस्तृत जानकारी के लिए हमारा Cancer Test in Hindi ब्लॉग भी पढ़ें।

कैंसर स्क्रीनिंग: किस उम्र में कौन-सी जांच करानी चाहिए?

कैंसर स्क्रीनिंग का उद्देश्य बीमारी के लक्षण दिखाई देने से पहले ही संभावित कैंसर या कैंसर से पहले होने वाले बदलावों का पता लगाना होता है। सही उम्र में स्क्रीनिंग करवाने से कई प्रकार के कैंसर को शुरुआती चरण में पकड़ा जा सकता है, जिससे इलाज के बेहतर परिणाम मिलने की संभावना बढ़ जाती है। कौन-सी स्क्रीनिंग आपके लिए सही है, यह आपकी उम्र, लिंग, पारिवारिक इतिहास और जोखिम कारकों पर निर्भर करता है।

महिलाओं के लिए

  • Pap Smear Test: आमतौर पर 21 वर्ष की उम्र के बाद नियमित अंतराल पर करवाने की सलाह दी जाती है। यह सर्वाइकल कैंसर के शुरुआती बदलावों का पता लगाने में मदद करता है।
  • Mammography: 40 वर्ष की उम्र के बाद या डॉक्टर की सलाह के अनुसार स्तन कैंसर की स्क्रीनिंग के लिए करवाया जा सकता है।
  • HPV Screening: कुछ महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर के जोखिम का आकलन करने के लिए उपयोगी हो सकती है।

पुरुषों के लिए

  • Prostate Screening (PSA Test): 50 वर्ष की उम्र के बाद या परिवार में प्रोस्टेट कैंसर का इतिहास होने पर डॉक्टर इसकी सलाह दे सकते हैं।
  • Oral Cancer Screening: तंबाकू, गुटखा या धूम्रपान करने वाले लोगों को नियमित जांच करवानी चाहिए।

पुरुष और महिलाएं दोनों

  • Colonoscopy: 45 वर्ष की उम्र के बाद कोलन और रेक्टल कैंसर की स्क्रीनिंग के लिए उपयोगी हो सकती है।
  • Low-Dose CT Scan: लंबे समय तक धूम्रपान करने वाले लोगों में फेफड़ों के कैंसर की स्क्रीनिंग के लिए डॉक्टर सलाह दे सकते हैं।
  • Regular Health Check-ups: परिवार में कैंसर का इतिहास होने पर डॉक्टर अतिरिक्त स्क्रीनिंग टेस्ट सुझा सकते हैं।

कैंसर की जांच कब और कहाँ करानी चाहिए?

यदि कोई लक्षण दो से तीन सप्ताह से अधिक समय तक बना रहता है, धीरे-धीरे बढ़ रहा है या सामान्य उपचार के बाद भी ठीक नहीं हो रहा, तो डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। बिना वजह वजन कम होना, शरीर में गांठ महसूस होना, लंबे समय तक खांसी, मल या पेशाब में खून आना, निगलने में परेशानी या लगातार थकान जैसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

कैंसर की जांच हमेशा ऐसे अस्पताल या कैंसर सेंटर में करवानी चाहिए जहां अनुभवी विशेषज्ञ और आधुनिक जांच सुविधाएं उपलब्ध हों। समय पर जांच से बीमारी का सही कारण पता लगाया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर जल्दी इलाज शुरू किया जा सकता है।

Oncare Cancer Hospital में कैंसर स्क्रीनिंग, बायोप्सी, PET-CT, एंडोस्कोपी, इमेजिंग और विशेषज्ञ ऑन्कोलॉजिस्ट की सलाह जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। यदि आपको किसी लक्षण को लेकर चिंता है, तो समय पर जांच करवाना सबसे सही कदम हो सकता है।

डिस्क्लेमर

यह लेख केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी डॉक्टर की सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। कैंसर के लक्षण, जांच और स्क्रीनिंग की आवश्यकताएं हर व्यक्ति में अलग हो सकती हैं। यदि आपको किसी प्रकार का लक्षण या स्वास्थ्य संबंधी चिंता है, तो योग्य डॉक्टर या ऑन्कोलॉजिस्ट से परामर्श अवश्य लें।

Frequently Asked Questions

Written and Verified by:

Dr. Gajendra Kumar Himanshu

Dr. Gajendra Kumar Himanshu Exp: 10 Yr

Medical Officer

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