Oncare
+91 96679 40053 Book Appointment

कैंसर और आंत के बैक्टीरिया (गट माइक्रोबायोम): नया शोध

Dr. Gajendra Kumar Himanshu
Medical Officer · 10+ years experience
Updated September 15, 2026 · 7 min read
कैंसर और आंत के बैक्टीरिया

हमारी आंत में अरबों छोटे-छोटे सूक्ष्मजीव रहते हैं, जिनमें कई तरह के बैक्टीरिया शामिल होते हैं। इन सभी को मिलाकर गट माइक्रोबायोम कहा जाता है। अब वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि इन बैक्टीरिया का कैंसर के विकास, शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली और कुछ कैंसर उपचारों के असर से क्या संबंध है। शुरुआती शोध में गट माइक्रोबायोम और कैंसर के बीच संबंध दिखाई दिया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आंत के बैक्टीरिया अकेले कैंसर का कारण या इलाज हैं। यह अभी तेजी से आगे बढ़ रहा शोध क्षेत्र है।

आज के ब्लॉग में हम आपको बताएंगे कि गट माइक्रोबायोम क्या होता है, आंत के बैक्टीरिया और कैंसर के बीच वैज्ञानिकों को क्या संबंध मिला है, माइक्रोबायोम शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कैसे प्रभावित कर सकता है और कैंसर के इलाज के दौरान इस पर इतना ध्यान क्यों दिया जा रहा है। साथ ही, हम यह भी समझेंगे कि आहार, एंटीबायोटिक्स और प्रोबायोटिक्स को लेकर अभी क्या जानकारी उपलब्ध है और इस नए शोध का मरीजों के लिए क्या मतलब है।

गट माइक्रोबायोम क्या होता है?

हमारी आंत केवल खाना पचाने का काम नहीं करती। इसमें बहुत बड़ी संख्या में बैक्टीरिया और दूसरे सूक्ष्मजीव रहते हैं। ये छोटे जीव हमारे शरीर के साथ मिलकर कई काम करते हैं और पाचन, मेटाबॉलिज्म तथा प्रतिरक्षा प्रणाली जैसे कामों से जुड़े होते हैं। इन सूक्ष्मजीवों के पूरे समूह को गट माइक्रोबायोम कहा जाता है।

हर व्यक्ति का माइक्रोबायोम बिल्कुल एक जैसा नहीं होता। खान-पान, उम्र, दवाइयां, जीवनशैली और दूसरी स्वास्थ्य स्थितियां इसकी बनावट को प्रभावित कर सकती हैं।

यही वजह है कि वैज्ञानिक अब यह सवाल पूछ रहे हैं कि क्या आंत में मौजूद बैक्टीरिया के प्रकार और उनकी संख्या का कैंसर के जोखिम या इलाज की प्रतिक्रिया से कोई संबंध है।

कैंसर और गट बैक्टीरिया के बीच क्या संबंध है?

कैंसर और गट माइक्रोबायोम के बीच संबंध अभी पूरी तरह समझा नहीं गया है। लेकिन शोध में कुछ ऐसे संकेत मिले हैं जिनसे वैज्ञानिकों को लगता है कि आंत के बैक्टीरिया शरीर में सूजन और प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं।

हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली कैंसर कोशिकाओं को पहचानने और उनसे लड़ने में भूमिका निभाती है। गट माइक्रोबायोम इस प्रणाली के काम करने के तरीके को प्रभावित कर सकता है। इसी कारण शोधकर्ता यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि कुछ बैक्टीरिया कैंसर कोशिकाओं के खिलाफ शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को मजबूत करने में मदद करते हैं या उसे कमजोर करते हैं।

कुछ बैक्टीरिया पर खास ध्यान क्यों है?

वैज्ञानिकों ने कुछ खास बैक्टीरिया को कैंसर से जुड़े शोध में महत्वपूर्ण पाया है। उदाहरण के लिए, Fusobacterium nucleatum का कोलोरेक्टल कैंसर के साथ संबंध देखा गया है। शोध में यह भी जांचा जा रहा है कि यह बैक्टीरिया ट्यूमर के आसपास के प्रतिरक्षा वातावरण को कैसे प्रभावित कर सकता है।

इसका मतलब यह नहीं है कि किसी व्यक्ति की आंत में यह बैक्टीरिया मिलने से उसे निश्चित रूप से कैंसर होगा। माइक्रोबायोम और कैंसर के बीच संबंध काफी जटिल है और इस पर अभी शोध जारी है।

गट माइक्रोबायोम और कैंसर की इम्यूनिटी का क्या संबंध है?

कैंसर के इलाज में प्रतिरक्षा प्रणाली की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। खासकर इम्यूनोथेरेपी में डॉक्टर ऐसी दवाओं का इस्तेमाल करते हैं जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कैंसर कोशिकाओं के खिलाफ काम करने में मदद करती हैं।

यहीं पर गट माइक्रोबायोम के शोध ने वैज्ञानिकों का ध्यान खींचा है। कुछ अध्ययनों में कुछ प्रकार के गट बैक्टीरिया और इम्यून चेकप्वाइंट इनहिबिटर के प्रति बेहतर प्रतिक्रिया के बीच संबंध देखा गया है। वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि बैक्टीरिया प्रतिरक्षा कोशिकाओं के काम को किस तरह प्रभावित करते हैं।

आसान शब्दों में कहें तो सवाल यह है कि क्या आंत के बैक्टीरिया यह प्रभावित कर सकते हैं कि शरीर कैंसर के इलाज पर किस तरह प्रतिक्रिया देता है।

इसका पूरा जवाब अभी नहीं मिला है, लेकिन शोध लगातार आगे बढ़ रहा है।

गट माइक्रोबायोम में क्या चीजें बदलाव ला सकती हैं?

हमारी आंत में मौजूद बैक्टीरिया की बनावट स्थिर नहीं रहती। समय के साथ इसमें बदलाव हो सकता है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं।

कारक

गट माइक्रोबायोम पर संभावित असर

खान-पान

बैक्टीरिया की संख्या और विविधता को प्रभावित कर सकता है

फाइबर

कुछ लाभकारी बैक्टीरिया के लिए भोजन का स्रोत बन सकता है

एंटीबायोटिक्स

आंत के बैक्टीरिया की संख्या और बनावट बदल सकते हैं

बीमारी

माइक्रोबायोम में बदलाव से जुड़ी हो सकती है

कैंसर का इलाज

कुछ उपचार माइक्रोबायोम को प्रभावित कर सकते हैं

जीवनशैली

लंबे समय में माइक्रोबायोम की स्थिति पर असर डाल सकती है

इनमें आहार और दवाइयों का प्रभाव खास तौर पर शोध का हिस्सा है। लेकिन किसी व्यक्ति के माइक्रोबायोम को केवल एक आहार या सप्लीमेंट से बदलना इतना आसान नहीं है।

क्या आहार से गट माइक्रोबायोम बेहतर हो सकता है?

इस दिशा में भी शोध चल रहा है। National Cancer Institute के एक चालू क्लिनिकल ट्रायल में मेलानोमा और नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर के कुछ मरीजों में हाई-फाइबर और फर्मेंटेड आहार के जरिए गट माइक्रोबायोम में होने वाले बदलावों का अध्ययन किया जा रहा है। शोधकर्ता यह भी देख रहे हैं कि इन आहार संबंधी बदलावों का इम्यूनोथेरेपी की प्रतिक्रिया और साइड इफेक्ट्स से कोई संबंध है या नहीं।

फाइबर वाले आहार में फल, सब्जियां, दालें और साबुत अनाज जैसी चीजें शामिल हो सकती हैं। फर्मेंटेड आहार में कुछ प्रकार के दही और दूसरे फर्मेंटेड खाद्य पदार्थ आते हैं।

लेकिन कैंसर के मरीजों के लिए आहार हमेशा उनकी बीमारी और इलाज के अनुसार तय होना चाहिए। किसी क्लिनिकल ट्रायल में इस्तेमाल होने वाले आहार को बिना डॉक्टर की सलाह के इलाज का हिस्सा मानना सही नहीं है।

क्या प्रोबायोटिक्स कैंसर का इलाज कर सकते हैं?

अभी ऐसा कहना सही नहीं होगा कि प्रोबायोटिक्स कैंसर का इलाज कर सकते हैं।

हालांकि, माइक्रोबायोम को बदलने या सहारा देने के लिए प्रोबायोटिक्स पर भी शोध हो रहा है। उदाहरण के लिए, National Cancer Institute में किडनी कैंसर के कुछ मरीजों में इम्यूनोथेरेपी के साथ एक विशेष प्रोबायोटिक पद्धति का क्लिनिकल ट्रायल चल रहा है। इसका उद्देश्य यह देखना है कि माइक्रोबायोम में बदलाव इलाज की प्रतिक्रिया को प्रभावित कर सकता है या नहीं।

यह शोध अभी क्लिनिकल अध्ययन का हिस्सा है। इसलिए कैंसर के इलाज के दौरान खुद से प्रोबायोटिक सप्लीमेंट शुरू करना या किसी सप्लीमेंट को कैंसर के इलाज का विकल्प मानना सही नहीं है।

एंटीबायोटिक्स और गट बैक्टीरिया का क्या संबंध है?

एंटीबायोटिक्स हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म करने में मदद करती हैं, लेकिन इनका असर केवल एक तरह के बैक्टीरिया तक सीमित नहीं रहता। कुछ एंटीबायोटिक्स आंत में मौजूद बैक्टीरिया के पूरे समूह को प्रभावित कर सकती हैं।

इसी वजह से कैंसर के शोध में यह भी देखा जा रहा है कि एंटीबायोटिक्स से माइक्रोबायोम में होने वाले बदलाव का इम्यूनोथेरेपी जैसे उपचारों पर क्या असर पड़ता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि कैंसर मरीजों को जरूरत पड़ने पर एंटीबायोटिक्स नहीं लेनी चाहिए। संक्रमण होने पर डॉक्टर द्वारा दी गई जरूरी एंटीबायोटिक्स को रोकना सही नहीं है।

अगर आप गट माइक्रोबायोम के बारे में और जानकारी पढ़ना चाहते हैं, तो National Cancer Institute की आधिकारिक वेबसाइट पर विश्वसनीय जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

आज ही परामर्श लें

कैंसर और गट माइक्रोबायोम के बीच संबंध पर शोध तेजी से आगे बढ़ रहा है। वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आंत के बैक्टीरिया प्रतिरक्षा प्रणाली, कैंसर के विकास और इम्यूनोथेरेपी जैसे उपचारों की प्रतिक्रिया को किस तरह प्रभावित कर सकते हैं। कुछ बैक्टीरिया को कोलोरेक्टल कैंसर से जोड़ा गया है और कुछ अध्ययनों में गट माइक्रोबायोम तथा इम्यूनोथेरेपी की प्रतिक्रिया के बीच संबंध भी देखा गया है।

लेकिन अभी गट माइक्रोबायोम को कैंसर का इलाज नहीं माना जा सकता। अगर आप कैंसर का इलाज ले रहे हैं और आहार, प्रोबायोटिक्स, फर्मेंटेड खाद्य पदार्थ या किसी सप्लीमेंट को लेकर बदलाव करना चाहते हैं, तो Oncare Cancer Hospital के कैंसर विशेषज्ञ और डाइटिशियन से सलाह लेना बेहतर है। आपके इलाज और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार ही सही आहार तय किया जाना चाहिए।

डिस्क्लेमर

यह लेख कैंसर और गट माइक्रोबायोम पर उपलब्ध शोध को आसान भाषा में समझाने के लिए है। गट माइक्रोबायोम से जुड़ी कई बातें अभी शोध के स्तर पर हैं। प्रोबायोटिक्स, सप्लीमेंट, एंटीबायोटिक्स या किसी विशेष आहार को कैंसर के इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी बदलाव से पहले अपने इलाज कर रहे डॉक्टर की सलाह लें।

Frequently Asked Questions

1. गट माइक्रोबायोम क्या होता है?

आंत में रहने वाले बैक्टीरिया और दूसरे सूक्ष्मजीवों के पूरे समूह को गट माइक्रोबायोम कहा जाता है।

2. क्या गट बैक्टीरिया कैंसर का कारण बनते हैं?

कुछ बैक्टीरिया को कुछ कैंसरों के जोखिम और विकास से जोड़ा गया है, लेकिन हर गट बैक्टीरिया कैंसर का कारण नहीं होता। इस संबंध में अभी शोध जारी है।

3. क्या प्रोबायोटिक्स कैंसर ठीक कर सकते हैं?

अभी इसका पर्याप्त प्रमाण नहीं है। प्रोबायोटिक्स और कैंसर के इलाज के बीच संबंध पर क्लिनिकल ट्रायल चल रहे हैं।

4. क्या कैंसर मरीजों को ज्यादा फाइबर खाना चाहिए?

फाइबर वाला आहार कई लोगों के लिए अच्छा हो सकता है, लेकिन कैंसर के इलाज के दौरान आहार व्यक्ति की स्थिति के अनुसार तय होना चाहिए। इसलिए डॉक्टर या डाइटिशियन से सलाह लेना बेहतर है।