बालों को रंगने वाली हेयर डाई और ब्रेस्ट कैंसर के बीच संबंध को लेकर कई वैज्ञानिक अध्ययन हुए हैं। अब तक यह साबित नहीं हुआ है कि हेयर डाई का इस्तेमाल सीधे तौर पर ब्रेस्ट कैंसर का कारण बनता है। हालांकि, कुछ अध्ययनों में परमानेंट हेयर डाई के इस्तेमाल और ब्रेस्ट कैंसर (Breast Cancer) के बढ़ते जोखिम के बीच संबंध देखा गया है। इसके नतीजे सभी महिलाओं में एक जैसे नहीं रहे हैं, इसलिए इस विषय पर अभी और शोध की आवश्यकता है।
इस लेख में हम जानेंगे कि हेयर डाई में कौन-से रसायन होते हैं, परमानेंट और सेमी-परमानेंट डाई में क्या अंतर है, वैज्ञानिक अध्ययनों में क्या पाया गया है और हेयर डाई का इस्तेमाल करते समय किन सावधानियों का ध्यान रखना चाहिए।
क्या हेयर डाई से ब्रेस्ट कैंसर होता है?
सीधा जवाब है कि हेयर डाई और ब्रेस्ट कैंसर के बीच सीधा कारणात्मक संबंध अभी साबित नहीं हुआ है। कुछ शोधों में जोखिम बढ़ने का संबंध मिला है, जबकि दूसरे अध्ययनों में ऐसा स्पष्ट संबंध नहीं मिला। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि हेयर डाई इस्तेमाल करने वाली हर महिला को ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा है।
अमेरिका के नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट (NCI) के अनुसार, बालों में रंग लगाने और ब्रेस्ट कैंसर सहित कुछ अन्य कैंसर के बीच संभावित संबंधों पर हुए अध्ययनों के नतीजे मिले-जुले हैं। इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) ने व्यक्तिगत रूप से हेयर डाई इस्तेमाल करने के जोखिम को मनुष्यों में कैंसर पैदा करने की दृष्टि से वर्गीकृत करने के लिए पर्याप्त प्रमाण नहीं पाया है।
इसका अर्थ यह नहीं है कि हर हेयर डाई पूरी तरह जोखिम-मुक्त है। इसका मतलब है कि उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों से व्यक्तिगत इस्तेमाल और कैंसर के बीच पक्का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
हेयर डाई कितने प्रकार की होती है?
हेयर डाई को मुख्य रूप से तीन प्रकारों में बांटा जाता है। इनके इस्तेमाल का तरीका और बालों में रंग टिकने की अवधि अलग-अलग होती हैं।
1. परमानेंट हेयर डाई
परमानेंट हेयर डाई बालों का रंग लंबे समय तक बदलती है। इसमें आमतौर पर ऐसे रसायन होते हैं जो बालों के भीतर रंग बनाने में मदद करते हैं। कुछ अध्ययनों में इसके इस्तेमाल और ब्रेस्ट कैंसर के बीच संबंध पाया गया है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि डाई कैंसर का कारण है।
2. सेमी-परमानेंट हेयर डाई
सेमी-परमानेंट डाई बालों पर अपेक्षाकृत कम समय तक रहती है और धीरे-धीरे धुल जाती है। कुछ अध्ययनों में इसके व्यक्तिगत इस्तेमाल से ब्रेस्ट कैंसर का स्पष्ट बढ़ा हुआ जोखिम नहीं मिला। फिर भी, सभी उत्पादों की संरचना एक जैसी नहीं होती।
3. टेम्पररी हेयर डाई
टेम्पररी डाई बालों को कुछ समय के लिए रंगती है और आमतौर पर एक या कुछ बार शैम्पू करने पर निकल जाती है। इसके इस्तेमाल और ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम के बारे में उपलब्ध प्रमाण सीमित हैं।
ध्यान रखें कि केवल डाई के प्रकार या रंग के आधार पर किसी उत्पाद को पूरी तरह सुरक्षित या खतरनाक नहीं कहा जा सकता। इसके लिए उसकी सामग्री और उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों को देखना जरूरी है।
हेयर डाई और ब्रेस्ट कैंसर पर हुई रिसर्च क्या कहती है?
इस विषय पर सबसे अधिक चर्चा 2019 में प्रकाशित एक बड़े अमेरिकी अध्ययन के बाद हुई। यह शोध Sister Study के 46,709 प्रतिभागियों के आंकड़ों पर आधारित था। इसमें उन महिलाओं को शामिल किया गया था जिनकी बहन को ब्रेस्ट कैंसर हुआ था, लेकिन अध्ययन में शामिल होने के समय उन्हें खुद यह कैंसर नहीं था।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एनवायरनमेंटल हेल्थ साइंसेज के शोधकर्ताओं ने पाया कि:
- परमानेंट हेयर डाई इस्तेमाल करने वाली महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम, इस्तेमाल न करने वाली महिलाओं की तुलना में लगभग 9% अधिक पाया गया।
- अश्वेत महिलाओं में परमानेंट हेयर डाई के इस्तेमाल के साथ लगभग 45% अधिक जोखिम का संबंध देखा गया, जबकि श्वेत महिलाओं में यह लगभग 7% था।
- सेमी-परमानेंट और टेम्पररी हेयर डाई के व्यक्तिगत इस्तेमाल से जोखिम में बहुत कम या कोई स्पष्ट बढ़ोतरी नहीं मिली।
ये निष्कर्ष एक अध्ययन से आए हैं। ये इस बात का प्रमाण नहीं हैं कि हेयर डाई सीधे कैंसर पैदा करती है। अध्ययन में शामिल महिलाओं की पृष्ठभूमि और पारिवारिक जोखिम भी महत्वपूर्ण हैं। इसके अलावा, अमेरिका में मिले परिणामों को भारत की सभी महिलाओं पर सीधे लागू नहीं किया जा सकता।
अधिक जानकारी के लिए NIH की हेयर डाई और ब्रेस्ट कैंसर संबंधी रिपोर्ट और मूल वैज्ञानिक अध्ययन पढ़ सकते हैं।
भारत में हेयर डाई का इस्तेमाल और ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम
भारत में सफेद बालों को छिपाने, फैशन और व्यक्तिगत पसंद के लिए हेयर डाई का इस्तेमाल किया जाता है। बाजार में हर्बल, अमोनिया-फ्री, परमानेंट और सेमी-परमानेंट जैसे कई विकल्प उपलब्ध हैं। हालांकि, किसी उत्पाद पर “हर्बल” या “अमोनिया-फ्री” लिखा होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि वह पूरी तरह सुरक्षित है।
फिलहाल, भारतीय महिलाओं में हेयर डाई के इस्तेमाल और ब्रेस्ट कैंसर के बीच संबंध को लेकर निर्णायक निष्कर्ष देने वाले पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। इस विषय पर चर्चा करते समय अमेरिका और अन्य देशों में हुए अध्ययनों को समझना उपयोगी है, लेकिन उनके नतीजों को भारत की सभी महिलाओं पर सीधे लागू नहीं किया जा सकता।
भारत में ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम उम्र, पारिवारिक इतिहास, कुछ आनुवंशिक बदलाव और अन्य स्वास्थ्य संबंधी कारकों से प्रभावित हो सकता है। इसलिए केवल हेयर डाई के इस्तेमाल को कैंसर का कारण मानना सही नहीं है। यदि आप नियमित रूप से हेयर डाई इस्तेमाल करती हैं, तो उत्पाद के निर्देशों का पालन करें और अपनी व्यक्तिगत स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं पर योग्य डॉक्टर से चर्चा करें।
ब्रेस्ट में नई गांठ, निप्पल में बदलाव या त्वचा में असामान्य परिवर्तन दिखाई देने पर जांच करवाएं। ऐसे लक्षणों को केवल हेयर डाई के इस्तेमाल से जोड़कर नजरअंदाज न करें।
हेयर डाई में मौजूद रसायन चिंता का कारण क्यों हैं?
हेयर डाई में रंग बनाने और उसे बालों पर टिकाने के लिए अलग-अलग रसायनों का इस्तेमाल किया जा सकता है। कुछ रसायनों के स्वास्थ्य पर संभावित प्रभावों को लेकर शोध किया गया है। हालांकि, किसी रसायन के बारे में प्रयोगशाला में चिंता पाए जाने का मतलब यह नहीं है कि हर तैयार हेयर डाई कैंसर पैदा करती है।
कुछ हेयर डाई में इस्तेमाल होने वाले रसायनों से त्वचा में जलन या एलर्जी हो सकती है। इसलिए उत्पाद के निर्देशों का पालन करना और पैच टेस्ट करना महत्वपूर्ण है।
हेयर स्ट्रेटनर या बाल सीधे करने वाले कुछ केमिकल उत्पाद अलग श्रेणी में आते हैं। कुछ उत्पादों में फॉर्मेल्डिहाइड जैसे रसायन हो सकते हैं। हेयर डाई और हेयर स्ट्रेटनर को एक ही उत्पाद नहीं समझना चाहिए, क्योंकि उनकी सामग्री और संभावित जोखिम अलग हो सकते हैं।
क्या हेयर डाई का रंग या इस्तेमाल की आवृत्ति जोखिम को प्रभावित करती है?
कुछ अध्ययनों में गहरे रंग की परमानेंट डाई और बार-बार इस्तेमाल के साथ जोखिम का संबंध देखा गया है। लेकिन सभी अध्ययनों के नतीजे एक जैसे नहीं हैं। अभी यह तय नहीं है कि किसी खास रंग की डाई सभी महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम बढ़ाती है।
इसलिए केवल काले, भूरे या किसी अन्य रंग को कैंसर का कारण बताना सही नहीं होगा। उत्पाद की सामग्री, इस्तेमाल की अवधि, इस्तेमाल का तरीका और व्यक्ति के अन्य जोखिम कारक भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
हेयर डाई इस्तेमाल करते समय कौन-सी सावधानियां रखें?
अगर आप बालों को रंगती हैं, तो कुछ सामान्य सावधानियां अपनाई जा सकती हैं:
- उत्पाद के पैकेट पर दिए गए निर्देशों को ध्यान से पढ़ें।
- निर्माता के निर्देशों के अनुसार पैच टेस्ट करें, भले ही आपने पहले भी डाई इस्तेमाल की हो।
- दस्ताने पहनें और डाई को निर्देशों में बताए गए समय से अधिक न लगाएं।
- डाई को आंखों या चेहरे की त्वचा में जाने से बचाएं और निर्देशानुसार अच्छी तरह धो लें।
- जलन, खुजली, सूजन या सांस लेने में परेशानी होने पर उत्पाद का इस्तेमाल रोकें। गंभीर एलर्जी के लक्षण होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
- हेयर डाई या स्ट्रेटनर के इस्तेमाल को लेकर चिंता हो, तो डॉक्टर से अपने व्यक्तिगत जोखिम पर चर्चा करें।
ये सावधानियां त्वचा और आंखों की जलन जैसे संभावित दुष्प्रभावों को कम करने में मदद कर सकती हैं। इन्हें ब्रेस्ट कैंसर से बचाव की गारंटी नहीं समझना चाहिए।
ब्रेस्ट कैंसर के अन्य जोखिम कारक क्या हैं?
ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम कई कारकों से प्रभावित होता है। इनमें उम्र बढ़ना, परिवार में ब्रेस्ट कैंसर का इतिहास, कुछ वंशानुगत जीन बदलाव, पहले ब्रेस्ट कैंसर होना और कुछ हार्मोन संबंधी कारक शामिल हैं। कुछ जीवनशैली संबंधी कारक भी जोखिम को प्रभावित कर सकते हैं।
हेयर डाई के इस्तेमाल को लेकर चिंता होने पर केवल इसी एक बात पर ध्यान देने के बजाय अपने समग्र स्वास्थ्य और व्यक्तिगत जोखिम को समझना अधिक उपयोगी है। ब्रेस्ट कैंसर के शुरुआती संकेत के बारे में जानने के लिए ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण ब्लॉग को पढ़ें।
निष्कर्ष
हेयर डाई और ब्रेस्ट कैंसर के बीच संबंध पर शोध जारी है। कुछ अध्ययनों में परमानेंट हेयर डाई के इस्तेमाल के साथ जोखिम बढ़ने का संबंध मिला है, लेकिन अब तक यह साबित नहीं हुआ है कि हेयर डाई सीधे ब्रेस्ट कैंसर का कारण बनती है। उपलब्ध प्रमाणों को समझते समय अध्ययन की सीमाओं और व्यक्तिगत जोखिम कारकों को ध्यान में रखना जरूरी है।
हेयर डाई इस्तेमाल करने का निर्णय लेते समय उत्पाद के निर्देशों का पालन करें और अपने स्वास्थ्य को लेकर चिंता होने पर योग्य स्वास्थ्यकर्मी से सलाह लें। ब्रेस्ट में नई गांठ, निप्पल में बदलाव या त्वचा में असामान्य परिवर्तन दिखाई देने पर जांच करवाएं। केवल हेयर डाई के इस्तेमाल के आधार पर कैंसर का निष्कर्ष न निकालें।
डिस्क्लेमर
यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है और व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। अपने स्वास्थ्य या कैंसर के जोखिम से संबंधित सवालों के लिए योग्य स्वास्थ्यकर्मी से सलाह लें।
Frequently Asked Questions
क्या बालों में डाई लगाने से ब्रेस्ट कैंसर होता है?
अभी तक यह साबित नहीं हुआ है कि बालों में डाई लगाने से सीधे ब्रेस्ट कैंसर होता है। कुछ अध्ययनों में परमानेंट हेयर डाई के इस्तेमाल के साथ जोखिम का संबंध मिला है, लेकिन शोध के नतीजे मिले-जुले हैं।
क्या परमानेंट हेयर डाई सेमी-परमानेंट डाई से ज्यादा खतरनाक है?
कुछ अध्ययनों में परमानेंट डाई के इस्तेमाल और ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम के बीच संबंध देखा गया है। सेमी-परमानेंट डाई के व्यक्तिगत इस्तेमाल से ऐसा स्पष्ट संबंध नहीं मिला, लेकिन उपलब्ध प्रमाण किसी भी प्रकार की डाई को पूरी तरह जोखिम-मुक्त घोषित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
क्या सफेद बालों को रंगने से कैंसर हो सकता है?
सफेद बालों को रंगने और ब्रेस्ट कैंसर के बीच सीधा कारणात्मक संबंध साबित नहीं हुआ है। जोखिम के बारे में उपलब्ध शोध मुख्य रूप से डाई के प्रकार, इस्तेमाल और अन्य कारकों पर आधारित है।
क्या हेयर डाई का इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए?
हर व्यक्ति के लिए हेयर डाई बंद करना जरूरी है, ऐसा वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। आप उत्पाद के निर्देशों का पालन कर सकती हैं और यदि जोखिम को लेकर चिंता है, तो डॉक्टर से अपने स्वास्थ्य और पारिवारिक इतिहास के आधार पर सलाह ले सकती हैं।
क्या हेयर डाई के इस्तेमाल से कैंसर का खतरा पुरुषों में भी होता है?
हेयर डाई और अलग-अलग कैंसर के बीच संभावित संबंधों पर पुरुषों और महिलाओं दोनों में शोध हुआ है। लेकिन ब्रेस्ट कैंसर से संबंधित उपलब्ध कई प्रमुख अध्ययन महिलाओं पर आधारित हैं। इसलिए पुरुषों में जोखिम के बारे में निश्चित निष्कर्ष निकालने के लिए पर्याप्त जानकारी नहीं है।



