कीमोथेरेपी के दौरान कब्ज: कारण और असरदार घरेलू उपाय

oncare team
Updated on Sep 22, 2026 12:57 IST

By Dr. Gajendra Kumar Himanshu

कीमोथेरेपी के दौरान कब्ज

कीमोथेरेपी के दौरान कब्ज (Constipation) एक सामान्य समस्या है, जो कई मरीजों में इलाज के समय दिखाई देती है। यह केवल कीमोथेरेपी की दवाओं से ही नहीं, बल्कि कम पानी पीने, दर्द की दवाओं, कम शारीरिक गतिविधि और फाइबर की कमी के कारण भी हो सकती है। सही खान-पान, पर्याप्त पानी और डॉक्टर की सलाह के साथ अधिकांश मामलों में कब्ज को नियंत्रित किया जा सकता है।

आज के इस ब्लॉग में हम आपको बताएंगे कि कीमोथेरेपी के दौरान कब्ज क्या होती है, यह क्यों होती है, इसके मुख्य कारण क्या हैं और घर पर कौन-से आसान व सुरक्षित उपाय अपनाकर राहत पाई जा सकती है।

कीमोथेरेपी के दौरान कब्ज क्या है?

कब्ज का मतलब है मल त्याग करने में कठिनाई होना, मल का सख्त हो जाना या कई दिनों तक पेट ठीक से साफ न होना। Chemotherapy के दौरान शरीर की सामान्य पाचन प्रक्रिया धीमी पड़ सकती है, जिससे यह समस्या पैदा होती है।

हर मरीज की स्थिति अलग होती है। कुछ लोगों को केवल हल्की कब्ज होती है, जबकि कुछ मरीजों को पेट फूलना, गैस और मल त्याग के समय दर्द भी महसूस हो सकता है। यदि यह समस्या लगातार बनी रहे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे भूख और रिकवरी दोनों प्रभावित हो सकती हैं।

कब्ज के सामान्य लक्षण

  • 2–3 दिन तक मल त्याग न होना
  • सख्त और सूखा मल आना
  • पेट भारी या फूला हुआ लगना
  • गैस और पेट में असहजता
  • मल त्याग के बाद भी पेट पूरी तरह साफ न लगना

इन लक्षणों के दिखाई देने पर सबसे पहले अपनी डाइट और पानी की मात्रा पर ध्यान देना जरूरी होता है।

कीमोथेरेपी से कब्ज क्यों हो सकती है?

बहुत से लोग मानते हैं कि कब्ज केवल कीमोथेरेपी की वजह से होती है, लेकिन इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। इलाज के दौरान शरीर में कई बदलाव आते हैं जो आंतों की गति को प्रभावित करते हैं।

कुछ कीमो दवाएं पाचन तंत्र को धीमा कर देती हैं। इसके अलावा मतली, उल्टी या स्वाद बदलने के कारण मरीज कम खाना और कम पानी पीने लगता है। इससे मल सख्त हो जाता है और कब्ज की समस्या बढ़ सकती है।

कई मरीजों को कैंसर के दर्द के लिए मजबूत दर्द निवारक दवाएं भी दी जाती हैं। ये दवाएं आंतों की गति को धीमा कर सकती हैं, इसलिए ऐसे मरीजों में कब्ज अधिक देखने को मिलती है।

किन मरीजों में कब्ज का खतरा अधिक होता है?

नीचे दी गई तालिका में उन मुख्य कारणों को समझें, जो कब्ज का खतरा बढ़ा सकते हैं:

कारण

कब्ज पर प्रभाव

कीमोथेरेपी की कुछ दवाएं

आंतों की गति धीमी हो सकती है

दर्द की दवाएं

कब्ज का जोखिम बढ़ सकता है

कम पानी पीना

मल सख्त हो जाता है

कम चलना-फिरना

पाचन धीमा पड़ सकता है

कम फाइबर वाला भोजन

पेट साफ होने में कठिनाई

हर मरीज में एक या एक से अधिक कारण एक साथ मौजूद हो सकते हैं। इसलिए इलाज भी व्यक्तिगत स्थिति के अनुसार किया जाता है।

कब्ज के मुख्य कारण क्या हैं?

कब्ज की सही वजह जानना जरूरी है, क्योंकि केवल दवा लेने से हमेशा समाधान नहीं मिलता। कई बार जीवनशैली में छोटे बदलाव ही सबसे ज्यादा राहत देते हैं।

कीमोथेरेपी की दवाएं

कुछ कीमो दवाएं आंतों की सामान्य गति को धीमा कर देती हैं। इससे भोजन और मल धीरे-धीरे आगे बढ़ते हैं और कब्ज की संभावना बढ़ जाती है।

दर्द की दवाएं

यदि मरीज को लगातार दर्द की दवा लेनी पड़ रही है, तो कब्ज एक सामान्य साइड इफेक्ट हो सकता है। ऐसे मामलों में डॉक्टर पहले से ही कब्ज रोकने के उपाय भी बता सकते हैं।

कम पानी पीना

मतली या भूख कम लगने के कारण कई मरीज पर्याप्त पानी नहीं पीते। शरीर में पानी की कमी होने पर मल सूख जाता है और उसे बाहर निकालना कठिन हो जाता है।

कम शारीरिक गतिविधि

इलाज के दौरान थकान और कमजोरी के कारण मरीज अधिक समय आराम करता है। लगातार बैठे या लेटे रहने से आंतों की गति धीमी हो सकती है।

फाइबर की कमी

यदि भोजन में फल, सब्जियां, दलिया और साबुत अनाज कम हैं, तो मल का आकार छोटा और सख्त हो सकता है। हालांकि हर मरीज को अधिक फाइबर की जरूरत नहीं होती, इसलिए डाइट डॉक्टर की सलाह से तय करनी चाहिए।

कब्ज के असरदार घरेलू उपाय क्या हैं?

कब्ज होने पर सबसे पहले जीवनशैली और खान-पान में सुधार करना चाहिए। यदि डॉक्टर ने कोई विशेष रोक नहीं लगाई है, तो ये घरेलू उपाय कई मरीजों में राहत देने में मदद कर सकते हैं।

पर्याप्त पानी पिएं

दिनभर थोड़ा-थोड़ा करके पानी पीना कब्ज कम करने का सबसे आसान उपाय है। सुबह गुनगुना पानी पीने से भी कई लोगों को पेट साफ होने में मदद मिलती है। यदि डॉक्टर ने तरल पदार्थ सीमित करने को नहीं कहा है, तो पर्याप्त मात्रा में पानी जरूर लें।

फाइबर युक्त भोजन शामिल करें

अपने भोजन में धीरे-धीरे फाइबर बढ़ाएं। ताजे फल, हरी सब्जियां, दलिया और ओट्स पाचन को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं। अचानक बहुत ज्यादा फाइबर लेने की बजाय इसे धीरे-धीरे बढ़ाना बेहतर रहता है।

हल्की वॉक करें

यदि आपकी शारीरिक स्थिति अनुमति देती है, तो रोज 10–20 मिनट की हल्की सैर करें। हल्की गतिविधि से आंतों की गति बेहतर होती है और कब्ज से राहत मिल सकती है। बहुत ज्यादा थकान होने पर शरीर को आराम भी दें।

नियमित समय पर शौचालय जाएं

हर दिन एक तय समय पर शौचालय जाने की आदत बनाएं, चाहे शुरुआत में मल त्याग न भी हो। नियमित रूटीन से शरीर धीरे-धीरे उसी समय प्रतिक्रिया देना शुरू कर देता है।

प्राकृतिक रूप से पाचन सुधारने वाले खाद्य पदार्थ

  • पपीता
  • अमरूद
  • भीगे हुए किशमिश
  • दलिया
  • ओट्स
  • दाल और हरी सब्जियां

इन खाद्य पदार्थों को संतुलित मात्रा में शामिल करना फायदेमंद हो सकता है।

कब्ज होने पर कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?

हर कब्ज गंभीर नहीं होती, लेकिन कुछ लक्षण तुरंत चिकित्सा सहायता की मांग करते हैं। यदि नीचे दिए गए लक्षण दिखाई दें, तो देरी न करें।

  • 3 दिन या उससे अधिक समय तक मल न आए
  • लगातार उल्टी हो रही हो
  • पेट बहुत ज्यादा फूल जाए
  • मल में खून दिखाई दे
  • तेज पेट दर्द के साथ गैस भी पास न हो

ऐसी स्थिति में डॉक्टर आंतों की जांच करके उचित इलाज शुरू कर सकते हैं।

अगर आप कीमोथेरेपी से जुड़ी और अधिक जानकारी पढ़ना चाहते हैं तो आप National Cancer Institute की आधिकारिक वेबसाइट पर देख सकते हैं।

आज ही परामर्श लें

यदि कीमोथेरेपी के दौरान आपको बार-बार कब्ज, पेट फूलना या मल त्याग में परेशानी हो रही है, तो इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज न करें। Oncare Cancer Hospital में अनुभवी मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट और न्यूट्रिशन विशेषज्ञ मरीज की स्थिति के अनुसार सुरक्षित डाइट, सपोर्टिव केयर और कब्ज के उचित उपचार की सलाह प्रदान करते हैं, ताकि इलाज के दौरान आपकी जीवन गुणवत्ता बेहतर बनी रहे।

डिस्क्लेमर

यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है। किसी भी प्रकार के कैंसर, जांच रिपोर्ट या उपचार से संबंधित निर्णय लेने से पहले योग्य कैंसर विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

Frequently Asked Questions

Written and Verified by:

Dr. Gajendra Kumar Himanshu

Dr. Gajendra Kumar Himanshu Exp: 10 Yr

Medical Officer

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