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पेट के कैंसर की दवाएं: कीमोथेरेपी और टार्गेटेड दवाओं के नाम
पेट के कैंसर (Stomach Cancer) के इलाज में दवाओं का चुनाव मरीज के कैंसर की स्टेज, ट्यूमर के प्रकार, उम्र और स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार किया जाता है। डॉक्टर जरूरत के अनुसार कीमोथेरेपी, टार्गेटेड थेरेपी, इम्यूनोथेरेपी या इनका संयोजन दे सकते हैं। इसलिए किसी भी दवा का इस्तेमाल केवल ऑन्कोलॉजिस्ट की सलाह पर ही करना चाहिए।
आज के इस ब्लॉग में हम आपको बताएंगे कि पेट के कैंसर में कौन-सी कीमोथेरेपी और टार्गेटेड दवाएं दी जाती हैं, ये दवाएं कैसे काम करती हैं, कब दी जाती हैं, इनके संभावित साइड इफेक्ट्स क्या हो सकते हैं और इलाज के दौरान किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
पेट के कैंसर में दवाओं की जरूरत क्यों पड़ती है?
पेट के कैंसर का इलाज केवल एक तरीके से नहीं किया जाता। कई मरीजों में सर्जरी सबसे महत्वपूर्ण उपचार होती है, लेकिन कुछ मामलों में ऑपरेशन से पहले या बाद में दवाओं की जरूरत पड़ती है। वहीं अगर कैंसर शरीर के दूसरे हिस्सों में फैल चुका है, तो दवाएं इलाज का मुख्य हिस्सा बन जाती हैं।
इन दवाओं का उद्देश्य केवल ट्यूमर को छोटा करना ही नहीं होता, बल्कि कैंसर की बढ़त को रोकना, दोबारा होने के खतरे को कम करना और मरीज की जीवन गुणवत्ता को बेहतर बनाए रखना भी होता है। डॉक्टर मरीज की जांच रिपोर्ट, बायोप्सी और अन्य टेस्ट के आधार पर तय करते हैं कि कौन-सी दवा सबसे उपयुक्त रहेगी।
पेट के कैंसर में कौन-कौन सी दवाएं दी जाती हैं?
पेट के कैंसर के इलाज में मुख्य रूप से तीन प्रकार की दवाओं का उपयोग किया जाता है।
- कीमोथेरेपी
- टार्गेटेड थेरेपी
- इम्यूनोथेरेपी (कुछ मरीजों में)
हर मरीज को एक जैसी दवा नहीं दी जाती। इलाज हमेशा कैंसर के प्रकार और मरीज की स्थिति के अनुसार तय किया जाता है।
कीमोथेरेपी क्या होती है?
कीमोथेरेपी ऐसी दवाओं का इलाज है जो तेजी से बढ़ने वाली कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने या उनकी वृद्धि को धीमा करने का काम करती हैं। यह दवा नस (IV) के जरिए या कुछ मामलों में टैबलेट के रूप में दी जा सकती है।
डॉक्टर कीमोथेरेपी कई कारणों से दे सकते हैं। जैसे सर्जरी से पहले ट्यूमर को छोटा करने के लिए, सर्जरी के बाद बचे हुए कैंसर सेल्स को खत्म करने के लिए या एडवांस स्टेज कैंसर में बीमारी को नियंत्रित करने के लिए।
पेट के कैंसर में इस्तेमाल होने वाली कीमोथेरेपी दवाओं के नाम
पेट के कैंसर में कौन-सी कीमोथेरेपी दवा दी जाएगी, यह हर मरीज के लिए अलग हो सकता है। डॉक्टर कैंसर की स्टेज, मरीज की उम्र, स्वास्थ्य की स्थिति और अन्य जांच रिपोर्ट को देखकर दवा या दवाओं का सही संयोजन चुनते हैं। नीचे पेट के कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कुछ सामान्य कीमोथेरेपी दवाओं के बारे में बताया गया है।
फ्लुओरोयूरासिल (5-FU)
यह पेट के कैंसर में सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली दवाओं में से एक है। इसे अक्सर दूसरी कीमोथेरेपी दवाओं के साथ मिलाकर दिया जाता है।
कैपेसिटाबिन (Capecitabine)
यह 5-FU का टैबलेट रूप है। कुछ मरीजों में इसे अस्पताल में बार-बार भर्ती हुए बिना घर पर लेने की सुविधा मिल सकती है।
ऑक्सालिप्लाटिन (Oxaliplatin)
यह दवा अक्सर 5-FU या कैपेसिटाबिन के साथ मिलाकर दी जाती है। कई मरीजों में यह इलाज का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है।
सिस्प्लाटिन (Cisplatin)
कुछ प्रकार के पेट के कैंसर में यह दवा दूसरे कीमोथेरेपी संयोजन के साथ दी जाती है।
डोसेटैक्सेल (Docetaxel)
यह दवा कुछ मरीजों में एडवांस या हाई-रिस्क पेट के कैंसर में उपयोग की जा सकती है।
पैक्लिटैक्सेल (Paclitaxel)
यदि कैंसर दोबारा हो जाए या पहले इलाज के बाद बढ़ने लगे, तो कुछ मरीजों में यह दवा दी जा सकती है।
टार्गेटेड थेरेपी क्या होती है?
टार्गेटेड थेरेपी सामान्य कीमोथेरेपी से अलग होती है। यह कैंसर कोशिकाओं में मौजूद खास प्रोटीन या जीन को निशाना बनाकर काम करती है। इसलिए यह केवल उन्हीं मरीजों को दी जाती है जिनकी जांच में संबंधित बायोमार्कर पाए जाते हैं।
इलाज शुरू करने से पहले डॉक्टर कुछ विशेष लैब टेस्ट करवाते हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि मरीज टार्गेटेड थेरेपी के लिए उपयुक्त है या नहीं।
पेट के कैंसर में इस्तेमाल होने वाली टार्गेटेड दवाओं के नाम
टार्गेटेड थेरेपी में इस्तेमाल होने वाली कुछ प्रमुख दवाएं नीचे दी गई हैं।
ट्रास्टुजुमैब (Trastuzumab)
यदि मरीज का कैंसर HER2 पॉजिटिव है, तो इस दवा को कीमोथेरेपी के साथ दिया जा सकता है। यह HER2 प्रोटीन को निशाना बनाकर काम करती है।
रामुसिरुमैब (Ramucirumab)
जब पहली लाइन का इलाज अपेक्षित परिणाम नहीं देता, तब कुछ मरीजों में इस दवा का उपयोग किया जा सकता है। इसे अकेले या पैक्लिटैक्सेल के साथ दिया जा सकता है।
ट्रास्टुजुमैब डेरक्सटेकैन (Trastuzumab Deruxtecan)
कुछ चुनिंदा HER2 पॉजिटिव मरीजों में, पहले इलाज के बाद भी बीमारी बढ़ने पर यह दवा एक विकल्प हो सकती है।
कीमोथेरेपी और टार्गेटेड थेरेपी में क्या अंतर है?
आधार | कीमोथेरेपी | टार्गेटेड थेरेपी |
|---|---|---|
कैसे काम करती है | तेजी से बढ़ने वाली कोशिकाओं पर असर करती है | केवल विशेष प्रोटीन या जीन को निशाना बनाती है |
किसे दी जाती है | कई मरीजों को | केवल बायोमार्कर पॉजिटिव मरीजों को |
टेस्ट की जरूरत | सामान्य जांच | HER2 या अन्य विशेष जांच जरूरी |
उपयोग | शुरुआती और एडवांस दोनों स्टेज | चुने हुए मरीजों में |
क्या इन दवाओं के साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं?
हर मरीज में दवाओं का असर अलग होता है। किसी को हल्के साइड इफेक्ट्स होते हैं, तो किसी को अधिक परेशानी हो सकती है। आज उपलब्ध सहायक दवाओं की मदद से इनमें से कई समस्याओं को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
कीमोथेरेपी के सामान्य साइड इफेक्ट्स
- मतली और उल्टी
- थकान
- बाल झड़ना
- भूख कम लगना
- मुंह में छाले
- संक्रमण का खतरा बढ़ना
टार्गेटेड थेरेपी के संभावित साइड इफेक्ट्स
- दस्त
- हाई ब्लड प्रेशर
- त्वचा संबंधी समस्याएं
- कमजोरी
- कुछ मामलों में हृदय की कार्यक्षमता की निगरानी की जरूरत
यदि इलाज के दौरान तेज बुखार, लगातार उल्टी, सांस लेने में तकलीफ या असामान्य रक्तस्राव हो, तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें।
क्या हर मरीज को एक जैसी दवा दी जाती है?
नहीं। पेट के कैंसर का इलाज पूरी तरह व्यक्तिगत होता है। डॉक्टर कैंसर की स्टेज, बायोप्सी रिपोर्ट, HER2 जैसी जांच, मरीज की उम्र, अन्य बीमारियों और पहले दिए गए इलाज को देखकर दवा चुनते हैं।
इसी वजह से किसी दूसरे मरीज की दवा आपके लिए सही हो, यह जरूरी नहीं है। इसलिए इंटरनेट या किसी परिचित की सलाह के आधार पर दवा लेना सुरक्षित नहीं है।
अगर आप पेट के कैंसर के इलाज के बारे में अधिक जानकारी पढ़ना चाहते हैं, तो National Cancer Institute की आधिकारिक वेबसाइट पर विश्वसनीय जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
आज ही परामर्श लें
यदि आपको या आपके किसी अपने को पेट के कैंसर का पता चला है और आप सही उपचार विकल्प जानना चाहते हैं, तो Oncare Cancer Hospital की अनुभवी कैंसर विशेषज्ञ टीम से परामर्श लें। यहां मरीज की रिपोर्ट, कैंसर की स्टेज और बायोमार्कर जांच का मूल्यांकन करके व्यक्तिगत उपचार योजना तैयार की जाती है, ताकि मरीज को उसकी स्थिति के अनुसार सबसे उपयुक्त इलाज मिल सके।
डिस्क्लेमर
यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य जानकारी देने के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई दवाओं के नाम केवल जानकारी के लिए हैं। किसी भी दवा को स्वयं शुरू या बंद न करें। इलाज हमेशा योग्य मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट की सलाह के अनुसार ही कराएं।
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Frequently Asked Questions
आमतौर पर 5-FU, कैपेसिटाबिन, ऑक्सालिप्लाटिन, सिस्प्लाटिन और डोसेटैक्सेल जैसी दवाओं का उपयोग मरीज की स्थिति के अनुसार किया जाता है।
नहीं। टार्गेटेड थेरेपी केवल उन मरीजों को दी जाती है जिनकी जांच में HER2 जैसे विशेष बायोमार्कर पाए जाते हैं।
हां। कुछ मरीजों में डॉक्टर बेहतर परिणाम के लिए दोनों उपचारों का संयोजन दे सकते हैं।
हां। डॉक्टर जरूरत के अनुसार सहायक दवाएं, आहार संबंधी सलाह और नियमित निगरानी के जरिए कई साइड इफेक्ट्स को नियंत्रित करने की कोशिश करते हैं।
Written and Verified by:
Dr. Gajendra Kumar Himanshu Exp: 10 Yr
Medical Officer
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