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ब्रेस्ट कैंसर होने के कारण: महिलाओं के लिए जरूरी जानकारी
ब्रेस्ट कैंसर यह नाम सुनते ही कई महिलाओं के मन में डर, घबराहट और अनगिनत सवाल पैदा हो जाते हैं। अक्सर महिलाएँ सोचती हैं कि आखिर यह बीमारी होती क्यों है, इसके अचानक बढ़ने की वजह क्या है, और क्या इसका कोई निश्चित कारण है? सच तो यह है कि ब्रेस्ट कैंसर आज दुनिया भर में महिलाओं के लिए सबसे बड़ी स्वास्थ्य चिंताओं में से एक बन चुका है। लेकिन अच्छी बात यह है कि जागरूकता, समय पर पहचान और सही इलाज से ब्रेस्ट कैंसर को रोका भी जा सकता है और हराया भी जा सकता है।
इसलिए जरूरी है कि महिलाएँ उस सवाल का जवाब जानें जो सबसे अधिक पूछा जाता है ब्रेस्ट कैंसर होने के कारण क्या हैं? यह जानना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जब हम किसी बीमारी के कारणों को समझ लेते हैं, तो उससे बचने के उपाय आसानी से अपनाए जा सकते हैं।
इस आर्टिकल में हम विस्तार से जानेंगे कि ब्रेस्ट कैंसर किन कारणों से होता है, किन महिलाओं में इसका खतरा ज्यादा होता है और कैसे इन कारणों को समझकर हम खुद को सुरक्षित रख सकते हैं। चलिए, इसे बहुत ही आसान शब्दों में समझते हैं।
ब्रेस्ट कैंसर क्या होता है?
ब्रेस्ट कैंसर तब होता है जब स्तन की कोशिकाएँ अपने सामान्य नियमों के अनुसार नहीं बढ़तीं और अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं। सामान्य कोशिकाएँ एक निश्चित समय पर मर जाती हैं, लेकिन कैंसर कोशिकाएँ मरती नहीं हैं। वे बढ़ती रहती हैं और ट्यूमर का रूप ले लेती हैं। यह ट्यूमर स्तन के किसी भी हिस्से में पैदा हो सकता है दूध बनाने वाली ग्रंथियों में, दूध ले जाने वाली नलिकाओं में या आसपास की कोशिकाओं में।
कई बार यह ट्यूमर कहीं नहीं फैलता, लेकिन यदि यह कैंसरयुक्त है तो यह खून या लसीका (लिम्फ) प्रणाली के जरिए शरीर के अन्य अंगों तक भी फैल सकता है। यही इसे खतरनाक बनाता है।
ब्रेस्ट कैंसर होने के प्रमुख कारण
ब्रेस्ट कैंसर एक ही कारण से नहीं होता। यह कई कारणों के मिलकर बनने से विकसित होता है। कुछ कारण बदलने योग्य होते हैं, जबकि कुछ हमारे नियंत्रण से बाहर होते हैं। आइए इन्हें विस्तार से समझते हैं।
आनुवंशिक कारण और पारिवारिक इतिहास
एक बड़ा कारण है जीन या फैमिली हिस्ट्री। यदि किसी महिला की मां, बहन या दादी को ब्रेस्ट कैंसर हुआ है, तो उसके भी इस बीमारी से प्रभावित होने की संभावना बढ़ जाती है।
कई महिलाओं में BRCA1 और BRCA2 नाम के जीन में बदलाव पाए जाते हैं, जो ब्रेस्ट कैंसर की संभावना बढ़ाते हैं। हालांकि हर महिला में यह जीन नहीं होता, लेकिन जिनमें होता है, उनके लिए जोखिम अधिक होता है।
बढ़ती उम्र
उम्र बढ़ना ब्रेस्ट कैंसर का एक स्वाभाविक जोखिम कारक है। 40 वर्ष की उम्र के बाद इसकी संभावना बढ़ जाती है, और 50 वर्ष के बाद यह जोखिम और अधिक हो सकता है।
उम्र बढ़ने के साथ शरीर के हार्मोनल बदलाव तेज हो जाते हैं, जिससे कैंसर कोशिकाओं के बनने का खतरा बढ़ सकता है।
हार्मोनल बदलाव और इनके प्रभाव
महिलाओं के शरीर में हार्मोन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन ब्रेस्ट टिश्यू पर सीधा असर डालते हैं। यदि ये हार्मोन लंबे समय तक अधिक मात्रा में बने रहें, तो ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।
कुछ स्थितियाँ ऐसी हैं जो हार्मोन के स्तर को प्रभावित करती हैं, जैसे कि पहली माहवारी जल्दी आना या रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज़) देर से होना। ऐसे में शरीर अधिक समय तक हार्मोन के प्रभाव में रहता है।
जीवनशैली का प्रभाव
आज की लाइफस्टाइल ब्रेस्ट कैंसर का एक बड़ा कारण बन चुकी है।
अनियमित खानपान, अधिक तली और प्रोसेस्ड चीजों का सेवन, मोटापा, व्यायाम न करना और तनाव ये सभी मिलकर शरीर के हार्मोन और प्रतिरोधक क्षमता पर असर डालते हैं।
शारीरिक गतिविधि कम होने से शरीर में अनचाही चर्बी बढ़ जाती है, जिससे एस्ट्रोजन स्तर बढ़ता है और कैंसर का खतरा अधिक हो जाता है।
धूम्रपान और शराब का सेवन
धूम्रपान और शराब दोनों ही ऐसे कारण हैं जो शरीर में कैंसर कोशिकाओं को बनने का मौका देते हैं। शराब शरीर में हार्मोनल असंतुलन पैदा करती है और कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती है।
धूम्रपान भी कैंसर के लिए जिम्मेदार कई हानिकारक रसायनों को शरीर में पहुंचाता है।
स्तनपान न करवाना
स्तनपान न करवाने वाली महिलाओं में भी ब्रेस्ट कैंसर का खतरा थोड़ा बढ़ सकता है।
स्तनपान के दौरान शरीर हार्मोनल संतुलन को नियंत्रित करता है और स्तन में कोशिकाओं की वृद्धि को सामान्य रखता है। यही कारण है कि स्तनपान को महिलाओं के लिए स्वास्थ्य की दृष्टि से भी लाभदायक माना जाता है।
पहला बच्चा देर से होना
जो महिलाएँ 30 वर्ष की आयु के बाद मां बनती हैं, उनमें ब्रेस्ट कैंसर का खतरा अधिक हो सकता है। इसका कारण है कि हार्मोनल बदलाव लंबी अवधि तक असर डालते रहते हैं।
जल्दी मां बनने से शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव कैंसर के जोखिम को कम कर देते हैं।
मोटापा
मोटापा सिर्फ ब्रेस्ट कैंसर ही नहीं, बल्कि कई बीमारियों का कारण है। मोटापे से शरीर में फैट सेल्स बढ़ जाती हैं, जो एस्ट्रोजन जैसे हार्मोन को बढ़ा देती हैं। इससे कैंसर कोशिकाओं के बनने का खतरा बढ़ता है।
खासकर रजोनिवृत्ति के बाद मोटापा ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम को कई गुना बढ़ा सकता है।
रेडिएशन का संपर्क
कुछ महिलाओं को पहले किसी कारण से छाती के हिस्से में रेडिएशन दिया गया हो जैसे कि किसी अन्य बीमारी के लिएतो उन्हें आगे चलकर ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है।
रेडिएशन कोशिकाओं के DNA को प्रभावित करता है, जिससे कैंसर बनने की संभावना बढ़ती है।
तनाव और मानसिक दबाव
आज की तेज रफ्तार जिंदगी में तनाव हर महिला के जीवन का हिस्सा बन गया है। लेकिन लगातार तनाव शरीर के हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ देता है। इससे शरीर कमजोर पड़ जाता है और प्रतिरोधक क्षमता घट जाती है।
जब शरीर तनावग्रस्त होता है, तो वह बीमारियों से लड़ने में कमज़ोर हो जाता है, जिससे ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम भी बढ़ सकता है।
क्या ब्रेस्ट कैंसर से बचाव संभव है?
ब्रेस्ट कैंसर के कारणों को जानकर काफी हद तक इससे बचाव किया जा सकता है।
संतुलित खानपान, व्यायाम, समय पर जांच, शराब और धूम्रपान से दूर रहना, वजन नियंत्रित रखना और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना ये सब ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम को काफी कम कर सकते हैं।
साथ ही, स्तन की नियमित स्वयं जांच महिलाओं को छोटे से छोटे बदलाव को पहचानने में मदद करती है।
आज ही परामर्श लें
ब्रेस्ट कैंसर एक गंभीर बीमारी है, लेकिन इसके कारणों को जानकर महिलाएँ काफी हद तक इससे खुद को सुरक्षित रख सकती हैं। जागरूकता, नियमित जांच और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना ही इस बीमारी से बचने का पहला कदम है।
यदि आपके स्तन में कोई भी बदलाव दिखाई दे, जैसे गांठ, दर्द या आकार में अंतर, तो डॉक्टर से तुरंत सलाह लेना बहुत जरूरी है।
ब्रेस्ट कैंसर के सही और विशेषज्ञ इलाज के लिए Oncare Cancer Hospital एक भरोसेमंद और आधुनिक सुविधा वाला अस्पताल है। यहाँ अनुभवी डॉक्टर, आधुनिक तकनीक और व्यक्तिगत देखभाल के साथ इलाज उपलब्ध है। यदि आप या आपके परिवार में किसी को ब्रेस्ट कैंसर का संदेह हो, तो तुरंत Oncare Cancer Hospital से परामर्श लें।
FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
नहीं, यह कई कारणों से होता है, जैसे उम्र, जीवनशैली, हार्मोनल बदलाव और तनाव।
नहीं, कई गांठें सामान्य होती हैं, लेकिन जांच करवाना जरूरी है।
हाँ, शुरुआती चरण में पकड़ा जाए तो इलाज बहुत सफल होता है।
हाँ, दुर्लभ है लेकिन पुरुषों में भी ब्रेस्ट कैंसर हो सकता है।
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