पेनाइल कैंसर: पुरुषों में होने वाला दुर्लभ कैंसर

oncare team
Updated on Feb 2, 2026 16:25 IST

By Prashant Baghel

जब किसी पुरुष को अपने शरीर के बेहद निजी हिस्से में कोई समस्या महसूस होती है, तो वह अक्सर झिझक या शर्म के कारण उसे नजरअंदाज कर देता है। कई बार लोग सोचते हैं कि यह मामूली इंफेक्शन या एलर्जी होगी और अपने आप ठीक हो जाएगी। लेकिन कुछ मामलों में यही लापरवाही एक गंभीर बीमारी की ओर इशारा कर सकती है। पेनाइल कैंसर पुरुषों में होने वाला ऐसा ही एक दुर्लभ लेकिन गंभीर कैंसर है, जिसकी पहचान देर से होने पर इलाज मुश्किल हो सकता है।

इस लेख में हम जानेंगे कि पेनाइल कैंसर क्या होता है, इसके लक्षण कैसे होते हैं, यह क्यों होता है, कितना खतरनाक हो सकता है और समय पर इलाज क्यों इतना जरूरी है।

पेनाइल कैंसर क्या होता है

पेनाइल कैंसर वह कैंसर है जो पुरुषों के प्राइवेट पार्ट यानी पेनिस की त्वचा या अंदरूनी कोशिकाओं में विकसित होता है। यह कैंसर आमतौर पर पेनिस की बाहरी त्वचा से शुरू होता है और धीरे-धीरे अंदर की ओर बढ़ सकता है। शुरुआत में यह बहुत छोटे बदलावों के रूप में दिखता है, इसलिए कई पुरुष इसे गंभीरता से नहीं लेते।

यह कैंसर बहुत आम नहीं है, लेकिन जिन पुरुषों में यह होता है, उनके लिए शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

पेनाइल कैंसर को दुर्लभ लेकिन गंभीर क्यों माना जाता है

पेनाइल कैंसर के मामले अन्य कैंसरों की तुलना में कम देखने को मिलते हैं, इसलिए इसे दुर्लभ कहा जाता है। लेकिन इसकी गंभीरता को हल्के में नहीं लिया जा सकता। यह कैंसर शरीर के एक बेहद संवेदनशील और निजी हिस्से को प्रभावित करता है, जिससे शारीरिक के साथ-साथ मानसिक असर भी गहरा होता है। समय पर पहचान न होने पर यह बीमारी तेजी से आगे बढ़ सकती है।

कम मामलों के बावजूद बड़ा खतरा

पेनाइल कैंसर दुर्लभ जरूर है, लेकिन जब यह होता है तो इसके प्रभाव गंभीर हो सकते हैं। यह कैंसर धीरे-धीरे आसपास के टिश्यू और लिम्फ नोड्स तक फैल सकता है, जिससे इलाज ज्यादा कठिन हो जाता है। कम मामलों की वजह से लोग इसके बारे में कम जानते हैं, जिससे जागरूकता की कमी भी एक समस्या बन जाती है।

देर से डॉक्टर तक पहुंचना

कई पुरुष शर्म या झिझक की वजह से पेनिस से जुड़ी समस्या को छिपा लेते हैं। वे शुरुआती लक्षणों को मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं और डॉक्टर के पास जाने में देर कर देते हैं। यही देरी बीमारी को बढ़ने का मौका देती है और इलाज को ज्यादा जटिल बना सकती है।

संवेदनशील अंग पर असर

यह कैंसर शरीर के ऐसे हिस्से को प्रभावित करता है जो पेशाब, यौन स्वास्थ्य और आत्मविश्वास से जुड़ा होता है। इलाज देर से होने पर शारीरिक बदलावों के साथ मानसिक तनाव भी बढ़ सकता है, जिससे मरीज की जीवन गुणवत्ता पर गहरा असर पड़ता है।

पेनाइल कैंसर के शुरुआती लक्षण

पेनाइल कैंसर के शुरुआती लक्षण बहुत हल्के हो सकते हैं। कई बार पेनिस की त्वचा पर छोटा सा घाव, दाग या सूजन दिखाई देती है। यह घाव दर्द रहित भी हो सकता है, इसलिए पुरुष इसे नजरअंदाज कर देते हैं।

कुछ मामलों में पेनिस की त्वचा का रंग बदलना, मोटा होना या हल्की खुजली भी शुरुआती संकेत हो सकते हैं। अगर ये बदलाव लंबे समय तक बने रहें, तो इन्हें हल्के में नहीं लेना चाहिए।

पेनाइल कैंसर के बढ़ते हुए लक्षण

जैसे-जैसे बीमारी आगे बढ़ती है, लक्षण और साफ दिखाई देने लगते हैं। पेनिस पर घाव का आकार बढ़ सकता है और उसमें से बदबूदार स्राव या खून निकल सकता है।

कुछ पुरुषों को पेशाब करते समय दर्द या जलन महसूस हो सकती है। पेनिस में लगातार दर्द रहना या सूजन बढ़ना भी बढ़ते कैंसर का संकेत हो सकता है।

गांठ और सूजन से जुड़े संकेत

पेनाइल कैंसर बढ़ने पर जांघों के पास या ग्रोइन एरिया में गांठ महसूस हो सकती है। यह लिम्फ नोड्स के प्रभावित होने का संकेत होता है।

इन गांठों में दर्द हो भी सकता है और नहीं भी, लेकिन इनका बढ़ना बीमारी के फैलने की ओर इशारा करता है।

पेनाइल कैंसर होने के कारण

पेनाइल कैंसर होने का कोई एक कारण नहीं होता, लेकिन कुछ स्थितियां इसके खतरे को बढ़ा सकती हैं। लंबे समय तक साफ-सफाई का ध्यान न रखना एक बड़ा कारण माना जाता है।

कुछ मामलों में ह्यूमन पैपिलोमा वायरस से संक्रमण भी इस कैंसर से जुड़ा पाया गया है। इसके अलावा कमजोर इम्यून सिस्टम और धूम्रपान भी जोखिम बढ़ा सकते हैं।

साफ-सफाई और आदतों की भूमिका

प्राइवेट पार्ट की नियमित और सही सफाई न होने से वहां इंफेक्शन और जलन की समस्या बनी रह सकती है। लंबे समय तक बनी रहने वाली जलन कोशिकाओं में बदलाव ला सकती है।

गलत आदतें जैसे धूम्रपान शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता को कमजोर करती हैं, जिससे कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।

पेनाइल कैंसर की पहचान कैसे होती है

डॉक्टर सबसे पहले मरीज के लक्षणों और शारीरिक जांच के आधार पर पेनाइल कैंसर का शक करते हैं। इसके बाद प्रभावित हिस्से की बायोप्सी की जाती है, जिससे कैंसर की पुष्टि होती है।

कुछ मामलों में स्कैन या अन्य जांच की जरूरत पड़ सकती है, ताकि यह पता चल सके कि कैंसर आसपास के हिस्सों तक फैला है या नहीं।

पेनाइल कैंसर का इलाज

पेनाइल कैंसर का इलाज उसकी स्टेज और फैलाव पर निर्भर करता है। शुरुआती स्टेज में छोटे ऑपरेशन से सिर्फ कैंसर वाले हिस्से को हटाया जा सकता है।

अगर बीमारी ज्यादा बढ़ चुकी हो, तो सर्जरी के साथ रेडिएशन या कीमोथेरेपी की जरूरत पड़ सकती है। इलाज का उद्देश्य कैंसर को पूरी तरह हटाना और मरीज की जीवन गुणवत्ता को बेहतर बनाए रखना होता है।

इलाज के दौरान और बाद में सावधानियां

इलाज के दौरान डॉक्टर की सलाह का पालन करना बहुत जरूरी होता है। किसी भी तरह की तकलीफ, दर्द या बदलाव को छिपाने के बजाय तुरंत डॉक्टर को बताना चाहिए।

इलाज के बाद नियमित फॉलो-अप से यह सुनिश्चित किया जाता है कि कैंसर दोबारा तो नहीं आ रहा और शरीर ठीक से रिकवर कर रहा है या नहीं।

मानसिक और भावनात्मक असर

पेनाइल कैंसर पुरुषों के आत्मविश्वास और मानसिक स्थिति पर गहरा असर डाल सकता है। शर्म, डर और चिंता आम भावनाएं होती हैं।

इस समय परिवार का सहयोग, डॉक्टर की समझ और खुलकर बात करना मरीज को मानसिक रूप से मजबूत बनाता है।

सही अस्पताल और डॉक्टर का चुनाव

पेनाइल कैंसर का इलाज संवेदनशील होता है, इसलिए अनुभवी डॉक्टर और भरोसेमंद अस्पताल का चुनाव बहुत जरूरी है। सही जगह इलाज मिलने से जटिलताएं कम होती हैं और मरीज को बेहतर देखभाल मिलती है।

आज ही परामर्श लें

पेनाइल कैंसर दुर्लभ जरूर है, लेकिन अगर इसे समय पर पहचान लिया जाए, तो इलाज संभव है। अगर आपको पेनिस पर लंबे समय से घाव, सूजन, दर्द या असामान्य बदलाव महसूस हो रहे हैं, तो झिझक न करें और डॉक्टर से सलाह लें।

अगर आप भरोसेमंद और विशेषज्ञ इलाज की तलाश में हैं, तो Oncare Cancer Hospital एक अच्छा विकल्प है। यहां अनुभवी डॉक्टरों की देखरेख में पेनाइल कैंसर की जांच, इलाज और फॉलो-अप की पूरी सुविधा उपलब्ध है, ताकि मरीज को सही इलाज के साथ सम्मान और सहयोग मिल सके।

FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

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