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पैलिएटिव केयर क्या है और यह किन्हें चाहिए
पैलिएटिव केयर ऐसी सहायक देखभाल है, जो कैंसर या किसी गंभीर बीमारी के दौरान मरीज की तकलीफ कम करने पर ध्यान देती है। दर्द, सांस फूलना, बहुत ज्यादा थकान, भूख न लगना, नींद खराब होना या बीमारी को लेकर चिंता जैसी परेशानियों में इससे मदद मिल सकती है। इसे बीमारी के किसी भी चरण में शुरू किया जा सकता है और इसके लिए चल रहे इलाज को बंद करना जरूरी नहीं होता।
आज के इस ब्लॉग में हम आपको बताएंगे कि पैलिएटिव केयर का असली उद्देश्य क्या है और किन परिस्थितियों में मरीज को इसकी जरूरत पड़ सकती है। इसके अलावा, हम यह भी समझेंगे कि इस देखभाल में मरीज के शरीर के साथ उसकी भावनाओं, रोजमर्रा की जरूरतों और परिवार की परेशानियों पर किस तरह ध्यान दिया जाता है।
इलाज चल रहा हो, फिर पैलिएटिव केयर की जरूरत क्यों पड़ती है?
किसी गंभीर बीमारी का इलाज कई हफ्तों, महीनों या कभी-कभी वर्षों तक चल सकता है। इस दौरान मरीज को केवल बीमारी के लक्षण ही परेशान नहीं करते। दवाओं, कीमोथेरेपी, रेडिएशन या दूसरी चिकित्सा के कारण भी शरीर में कई बदलाव आ सकते हैं।
मान लीजिए कि किसी मरीज की कीमोथेरेपी चल रही है। इलाज कैंसर को नियंत्रित करने के लिए जरूरी है, लेकिन मरीज को लगातार मतली हो रही है, खाना अच्छा नहीं लग रहा और कमजोरी के कारण रोज के काम करना मुश्किल हो गया है। ऐसे समय में मुख्य इलाज के साथ पैलिएटिव केयर जोड़ी जा सकती है। इसका काम कैंसर का इलाज करना नहीं, बल्कि इलाज और बीमारी के दौरान मरीज को होने वाली तकलीफ कम करना है। दोनों तरह की देखभाल एक साथ चल सकती है।
पैलिएटिव केयर में मरीज से सबसे पहले क्या पूछा जाता है?
हर मरीज की परेशानी अलग होती है। इसलिए पैलिएटिव केयर की शुरुआत केवल रिपोर्ट देखने से नहीं होती। टीम मरीज से यह जानने की कोशिश करती है कि उसकी रोजमर्रा की जिंदगी में सबसे बड़ी मुश्किल क्या है।
किसी मरीज के लिए दर्द सबसे बड़ी समस्या हो सकता है। किसी को रात में नींद नहीं आती, तो कोई थोड़ी दूर चलने पर ही थक जाता है। कुछ मरीज बीमारी को लेकर इतने चिंतित रहते हैं कि वे अपनी परेशानी परिवार के साथ भी साझा नहीं कर पाते।
किन परेशानियों में पैलिएटिव केयर मदद कर सकती है?
गंभीर बीमारी के दौरान कई तरह के लक्षण एक साथ दिखाई दे सकते हैं। पैलिएटिव केयर टीम इन लक्षणों को समझकर उन्हें कम करने के तरीके सुझाती है। इसमें निम्न परेशानियों पर ध्यान दिया जा सकता है:
- ऐसा दर्द जो बार-बार हो या लंबे समय तक बना रहे
- थोड़ी गतिविधि के बाद बहुत ज्यादा थकान होना
- सांस लेने में परेशानी या बेचैनी महसूस होना
- खाना खाने का मन न करना
- मतली या उल्टी की समस्या
- कब्ज या पेट से जुड़ी परेशानी
- रात में ठीक से नींद न आना
- बीमारी को लेकर डर या चिंता होना
- इलाज से जुड़े फैसलों को समझने में परेशानी होना
हर लक्षण के लिए एक जैसा तरीका नहीं अपनाया जाता। मरीज की बीमारी, उम्र, चल रहे इलाज और स्वास्थ्य को देखकर सहायता दी जाती है।
किन मरीजों को पैलिएटिव केयर की जरूरत पड़ सकती है?
पैलिएटिव केयर का नाम अक्सर कैंसर के साथ जोड़ा जाता है, लेकिन इसका उपयोग केवल कैंसर के मरीजों तक सीमित नहीं है। ऐसी कोई भी गंभीर बीमारी, जो मरीज की दिनचर्या और आराम को लगातार प्रभावित कर रही हो, उसमें इस देखभाल पर विचार किया जा सकता है।
मरीज की स्थिति | किस तरह की सहायता मिल सकती है? |
|---|---|
कैंसर का इलाज चल रहा हो | दर्द, मतली, कमजोरी और इलाज से होने वाली दूसरी परेशानियों को संभालने में |
दिल की गंभीर बीमारी हो | सांस फूलने, थकान और रोज के काम करने में होने वाली कठिनाई को कम करने में |
फेफड़ों की बीमारी लंबे समय से हो | सांस लेने में परेशानी और उससे होने वाली घबराहट को संभालने में |
किडनी की बीमारी गंभीर हो | कमजोरी, भूख की कमी और शरीर में होने वाली दूसरी परेशानियों में |
दिमाग या नसों से जुड़ी बीमारी हो | चलने, बोलने, निगलने या रोजमर्रा की जरूरतों में सहायता देने में |
लंबे इलाज के कारण जीवन प्रभावित हो रहा हो | शारीरिक तकलीफ के साथ भावनात्मक और पारिवारिक सहयोग देने में |
केवल बीमारी का नाम देखकर यह तय नहीं किया जाता कि पैलिएटिव केयर की जरूरत है या नहीं। कई बार एक ही बीमारी वाले दो मरीजों की जरूरतें बिल्कुल अलग हो सकती हैं।
क्या पैलिएटिव केयर का मतलब इलाज बंद होना है?
नहीं। यह पैलिएटिव केयर से जुड़ी एक आम गलतफहमी है। अगर किसी मरीज की सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडिएशन थेरेपी, इम्यूनोथेरेपी या कोई दूसरा इलाज चल रहा है, तो उसके साथ पैलिएटिव केयर भी दी जा सकती है। मरीज को राहत देने के लिए मुख्य इलाज बंद करना जरूरी नहीं होता।
उदाहरण के लिए, कैंसर को कम करने के लिए कीमोथेरेपी दी जा सकती है और उसी समय मतली, दर्द या कमजोरी को संभालने के लिए पैलिएटिव केयर की मदद ली जा सकती है।
इसलिए पैलिएटिव केयर लेने का मतलब यह नहीं है कि इलाज के विकल्प खत्म हो गए हैं। इसका अर्थ है कि बीमारी के इलाज के साथ मरीज के आराम और जीवन की गुणवत्ता पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
क्या पैलिएटिव केयर केवल आखिरी समय में दी जाती है?
बहुत से परिवार पैलिएटिव केयर का नाम सुनते ही इसे जीवन के अंतिम समय से जोड़ लेते हैं। इसी सोच के कारण कई मरीज समय पर ऐसी सहायता नहीं ले पाते, जिससे उन्हें राहत मिल सकती थी। पैलिएटिव केयर बीमारी की शुरुआत, इलाज के दौरान या बीमारी के आगे बढ़ने पर दी जा सकती है। इसे शुरू करने का समय मरीज की जरूरत पर निर्भर करता है।
अगर बीमारी की शुरुआत में ही मरीज को तेज दर्द, बहुत ज्यादा कमजोरी या मानसिक तनाव हो रहा है, तो डॉक्टर जल्दी पैलिएटिव केयर की सलाह दे सकते हैं। इसके लिए बीमारी के अंतिम चरण तक इंतजार करना जरूरी नहीं है।
डॉक्टर से पैलिएटिव केयर के बारे में कब पूछना चाहिए?
पैलिएटिव केयर के लिए कोई एक तय समय नहीं होता। अगर बीमारी या इलाज की वजह से मरीज का रोज का जीवन लगातार मुश्किल हो रहा है, तो डॉक्टर से इसके बारे में बात की जा सकती है। इन स्थितियों में सलाह लेना उपयोगी हो सकता है:
- दर्द कम होने के बजाय लगातार बढ़ रहा हो
- खाना खाने या सोने में रोज परेशानी हो रही हो
- सांस की तकलीफ के कारण सामान्य काम मुश्किल हो गए हों
- मरीज बहुत ज्यादा थका या कमजोर महसूस करता हो
- बीमारी को लेकर डर और चिंता बढ़ रही हो
- परिवार को देखभाल करने में परेशानी हो रही हो
- इलाज से जुड़े विकल्प समझना मुश्किल लग रहा हो
अगर आप पैलिएटिव केयर के बारे में और ज्यादा जानकारी पढ़ना चाहते हैं तो आप National Cancer Institute की वेबसाइट को देख सकते हैं।
आज ही परामर्श लें
गंभीर बीमारी का इलाज जरूरी है, लेकिन मरीज को इलाज के दौरान कैसा महसूस हो रहा है, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है। लगातार दर्द, थकान, सांस की परेशानी या मानसिक तनाव को बीमारी का सामान्य हिस्सा मानकर सहते रहना जरूरी नहीं है। सही देखभाल से इन परेशानियों को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता है।
अगर कैंसर या किसी दूसरी गंभीर बीमारी के कारण मरीज की दिनचर्या प्रभावित हो रही है, तो पैलिएटिव केयर के बारे में डॉक्टर से बात करें। Oncare Cancer Hospital में मरीज की बीमारी के साथ उसके लक्षणों, आराम और व्यक्तिगत जरूरतों पर भी ध्यान दिया जाता है। सही समय पर मिलने वाली सहायक देखभाल मरीज और परिवार के लिए इलाज के सफर को अधिक आरामदायक बना सकती है।
डिस्क्लेमर
यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। पैलिएटिव केयर की जरूरत और इसका तरीका हर मरीज की बीमारी, लक्षणों और स्वास्थ्य के अनुसार अलग हो सकता है। किसी भी इलाज या देखभाल से जुड़े फैसले के लिए डॉक्टर की सलाह लें।
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Frequently Asked Questions
यह गंभीर बीमारी के दौरान दर्द और दूसरी परेशानियों को कम करके मरीज को अधिक आराम देने वाली देखभाल है।
नहीं। दिल, फेफड़ों, किडनी और दूसरी गंभीर बीमारियों के मरीजों को भी इसकी जरूरत पड़ सकती है।
नहीं। इसे कीमोथेरेपी, रेडिएशन या अन्य इलाज के साथ भी दिया जा सकता है।
इसे बीमारी के किसी भी चरण में मरीज के लक्षणों और जरूरत के अनुसार शुरू किया जा सकता है।
Written and Verified by:
Dr. Gajendra Kumar Himanshu Exp: 10 Yr
Medical Officer
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