न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर (NETs): क्यों अक्सर देर से डायग्नोस होते हैं

oncare team
Updated on Jul 28, 2026 11:46 IST

By Dr. Gajendra Kumar Himanshu

न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर (NETs)

कुछ लोग सालों तक पेट की दिक्कत, बार-बार दस्त, कमजोरी या शरीर में अजीब बदलाव महसूस करते रहते हैं। वे अलग-अलग दवाइयां लेते हैं, कभी गैस की दवा तो कभी हार्मोन टेस्ट करवाते हैं, लेकिन असली वजह सामने नहीं आती। बाद में जांच के दौरान पता चलता है कि शरीर में न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर था। यही वजह है कि इस बीमारी को समझना थोड़ा मुश्किल माना जाता है। इसके लक्षण कई बार इतने सामान्य होते हैं कि मरीज भी उन्हें गंभीरता से नहीं लेता और डॉक्टर को भी शुरुआत में किसी दूसरी बीमारी का शक हो सकता है। अच्छी बात यह है कि आज पहले की तुलना में जांच और इलाज के तरीके बेहतर हुए हैं, जिससे सही पहचान होने पर इलाज की दिशा तय करना आसान हो रहा है।

इस ब्लॉग में हम समझेंगे कि न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर क्या होते हैं, इनके लक्षण क्यों सामान्य बीमारियों जैसे लग सकते हैं और कई मामलों में इनकी पहचान देर से क्यों हो पाती है।

शरीर के अलग-अलग हिस्सों में बनने की वजह से यह बीमारी जल्दी समझ में नहीं आती

न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर सिर्फ एक जगह नहीं बनते। कुछ लोगों में यह पेट या आंत में पाए जाते हैं, जबकि कुछ मरीजों में फेफड़ों या पैंक्रियाज में भी हो सकते हैं। यही कारण है कि हर मरीज का अनुभव अलग होता है।

कुछ ट्यूमर बहुत धीरे बढ़ते हैं। मरीज लंबे समय तक सामान्य जीवन जीता रहता है और उसे लगता है कि शरीर में कोई बड़ी समस्या नहीं है। कई बार समस्या तब समझ में आती है जब लक्षण लगातार बढ़ने लगते हैं।

कुछ मरीजों में हार्मोन बदलाव शरीर को अलग तरीके से प्रभावित कर सकते हैं

इन ट्यूमर की एक खास बात यह है कि कुछ मामलों में ये अतिरिक्त हार्मोन बनाने लगते हैं। तब शरीर ऐसे संकेत देता है जो सामान्य बीमारी जैसे लगते हैं।

उदाहरण के लिए

  • अचानक चेहरे पर लालिमा आना
  • बार-बार दस्त होना
  • दिल की धड़कन तेज लगना
  • बिना वजह कमजोरी महसूस होना
  • पेट में असहजता

कई लोग महीनों तक सोचते रहते हैं कि यह सिर्फ पाचन की समस्या है।

शुरुआती लक्षण इतने सामान्य लग सकते हैं कि मरीज जांच टालता रहता है

यही वजह है कि NETs का डायग्नोसिस कई बार देर से होता है। मरीज को लगता है कि थोड़ी गैस, एसिडिटी या कमजोरी है और कुछ दिनों में ठीक हो जाएगी।

सामान्य महसूस होने वाली परेशानी और ऐसे संकेत जिन पर डॉक्टर से बात करनी चाहिए

सामान्य महसूस होने वाली परेशानी

ऐसे संकेत जिन पर डॉक्टर से बात करनी चाहिए

हल्का पेट दर्द

लगातार बढ़ता दर्द

कभी-कभी दस्त

बार-बार बिना कारण दस्त

कमजोरी

लगातार वजन घटना

गैस या भारीपन

चेहरे पर बार-बार लालिमा

डॉक्टर शुरुआत में दूसरी बीमारियों की तरफ क्यों सोचते हैं

क्योंकि यह बीमारी बहुत आम नहीं है, इसलिए शुरुआत में डॉक्टर अक्सर ज्यादा सामान्य कारणों को देखते हैं। उदाहरण के लिए IBS, एसिडिटी, हार्मोन असंतुलन या तनाव से जुड़ी समस्याएं।

जब मरीज बार-बार वही परेशानी बताता है या दवाइयों से आराम नहीं मिलता, तब आगे की जांच की जाती है।

कौन-कौन सी जांच की जा सकती है

  • ब्लड टेस्ट
  • यूरिन टेस्ट
  • CT स्कैन
  • MRI
  • PET स्कैन
  • बायोप्सी

बायोप्सी से डॉक्टर यह समझने की कोशिश करते हैं कि ट्यूमर किस प्रकार का है। न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर से जुड़ी जानकारी National Cancer Institute की वेबसाइट पर भी पढ़ी जा सकती है।

इलाज हर मरीज के लिए अलग हो सकता है

कई लोग सोचते हैं कि कैंसर का इलाज हमेशा एक जैसा होता है, लेकिन NETs में ऐसा नहीं है। डॉक्टर कई बातों को देखकर इलाज तय करते हैं। ट्यूमर कहां है, कितना फैल चुका है और शरीर पर उसका असर कितना है, यह सब महत्वपूर्ण होता है।

कुछ मरीजों में सर्जरी सबसे बेहतर विकल्प मानी जा सकती है

अगर ट्यूमर सीमित हिस्से में हो, तो डॉक्टर सर्जरी की सलाह दे सकते हैं। इसका उद्देश्य बीमारी वाले हिस्से को हटाना होता है। लेकिन हर मरीज सर्जरी के लिए उपयुक्त हो, ऐसा जरूरी नहीं है।

दवाइयों और टार्गेटेड थेरेपी की भी भूमिका हो सकती है

कुछ मरीजों में ऐसी दवाइयां दी जाती हैं जो हार्मोन से जुड़े लक्षणों को कम करने में मदद करती हैं। वहीं कुछ मामलों में टार्गेटेड थेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है।

आसान भाषा में समझें तो यह ऐसी दवाइयां होती हैं जो कैंसर कोशिकाओं की कुछ खास विशेषताओं को ध्यान में रखकर दी जाती हैं। लेकिन हर मरीज को यह इलाज दिया जाए, ऐसा जरूरी नहीं होता।

इलाज के बाद भी नियमित जांच क्यों जरूरी मानी जाती है

कुछ न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर धीरे बढ़ते हैं, इसलिए इलाज के बाद भी डॉक्टर समय-समय पर जांच करवाने की सलाह देते हैं। इसका उद्देश्य शरीर में नए बदलावों को जल्दी पहचानना होता है।

मरीज किन बातों का ध्यान रख सकते हैं

  • पुराने लक्षण दोबारा शुरू हों तो बताएं
  • डॉक्टर की सलाह के अनुसार स्कैन करवाएं
  • अचानक वजन घटने पर ध्यान दें
  • दवाइयां बिना सलाह बंद न करें

कई बार नियमित फॉलो-अप आगे की परेशानी को जल्दी पकड़ने में मदद करता है।

परिवार का सहयोग मरीज के लिए बहुत मायने रखता है

जब किसी बीमारी का पता देर से चलता है, तो मरीज मानसिक रूप से भी परेशान हो सकता है। कई लोग सोचते हैं कि काश पहले जांच हो जाती। ऐसे समय में परिवार का शांत और सहयोगी व्यवहार बहुत जरूरी होता है। मरीज को बार-बार डराने के बजाय सही जानकारी और भावनात्मक सहारा देना ज्यादा मददगार माना जाता है।

आज ही परामर्श ले

न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर ऐसे ट्यूमर हैं जिनके लक्षण कई बार सामान्य बीमारियों जैसे लगते हैं, इसलिए इनकी पहचान देर से हो सकती है। लेकिन लगातार बने रहने वाले लक्षणों को नजरअंदाज न करना और समय पर डॉक्टर से सलाह लेना काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। आज जांच और इलाज के कई विकल्प उपलब्ध हैं और विशेषज्ञ डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार उपचार की योजना बनाते हैं। बेहतर कैंसर देखभाल और अनुभवी विशेषज्ञों की सलाह के लिए Oncare Cancer Hospital जैसे भरोसेमंद संस्थानों से संपर्क किया जा सकता है।

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Written and Verified by:

Dr. Gajendra Kumar Himanshu

Dr. Gajendra Kumar Himanshu Exp: 10 Yr

Medical Officer

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