मुंह के कैंसर के कारण और उनसे बचाव

oncare team
Updated on Jan 15, 2026 11:27 IST

By Prashant Baghel

जब मुंह में लंबे समय तक छाला बना रहे, बोलने या चबाने में परेशानी होने लगे या मुंह के अंदर अजीब सा बदलाव दिखे, तो अधिकतर लोग इसे मामूली समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन कई मामलों में यही संकेत मुंह के कैंसर के कारण और उसकी शुरुआत से जुड़े हो सकते हैं। मुंह का कैंसर एक गंभीर बीमारी है, जो धीरे-धीरे बढ़ती है और समय पर ध्यान न दिया जाए तो जानलेवा भी हो सकती है। अच्छी बात यह है कि इसके कई कारण ऐसे हैं जिनसे सही जानकारी और सावधानी के साथ बचा जा सकता है।

इस लेख में हम समझेंगे कि मुंह का कैंसर क्या होता है, मुंह के कैंसर के कारण कौन-कौन से हैं, ये कारण कैसे शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं और किन उपायों से इस बीमारी से बचाव संभव है।

मुंह का कैंसर क्या होता है

मुंह का कैंसर उस स्थिति को कहा जाता है जब मुंह के अंदर की कोशिकाएं असामान्य तरीके से बढ़ने लगती हैं। यह कैंसर होंठ, जीभ, गालों की अंदरूनी सतह, मसूड़े, तालू या मुंह के निचले हिस्से में हो सकता है।

शुरुआत में इसके लक्षण बहुत हल्के होते हैं, जैसे छोटा सा छाला या सफेद-लाल दाग। लेकिन समय के साथ यह घाव बड़ा हो सकता है और दर्द, सूजन व खून आने जैसी परेशानी पैदा कर सकता है।

मुंह के कैंसर के कारण समझना क्यों जरूरी है

मुंह के कैंसर के कारणों को समझना इसलिए जरूरी है क्योंकि इनमें से कई कारण हमारी रोजमर्रा की आदतों से जुड़े होते हैं। अगर समय रहते इन आदतों को बदला जाए, तो कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

कई लोग सोचते हैं कि कैंसर अचानक हो जाता है, लेकिन सच यह है कि यह बीमारी धीरे-धीरे बनती है और इसके पीछे लंबे समय तक चलने वाले कारण होते हैं।

मुंह के कैंसर के प्रमुख कारण

मुंह का कैंसर किसी एक वजह से नहीं होता। इसके पीछे कई कारण मिलकर काम करते हैं और ये कारण अक्सर लंबे समय तक धीरे-धीरे असर दिखाते हैं। शुरुआत में शरीर संकेत देता है, लेकिन जब तक लोग इन्हें समझ पाते हैं, तब तक नुकसान काफी बढ़ चुका होता है। इसलिए यह जानना जरूरी है कि मुंह के कैंसर के प्रमुख कारण क्या हैं और ये कैसे मुंह की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं। सही जानकारी होने से समय रहते सावधानी बरती जा सकती है।

तंबाकू और गुटखा का सेवन

तंबाकू मुंह के कैंसर का सबसे बड़ा और सबसे आम कारण माना जाता है। चाहे वह सिगरेट हो, बीड़ी हो, गुटखा, खैनी या पान मसाला, सभी किसी न किसी रूप में मुंह की अंदरूनी सतह को नुकसान पहुंचाते हैं। इनमें मौजूद हानिकारक रसायन सीधे मुंह की कोशिकाओं के संपर्क में आते हैं और धीरे-धीरे उन्हें कमजोर बना देते हैं।

धूम्रपान का असर

धूम्रपान करने से निकलने वाला धुआं मुंह, जीभ और गले की परत पर लगातार असर डालता है। इसमें मौजूद जहरीले तत्व कोशिकाओं की सामान्य बनावट को बिगाड़ देते हैं। लंबे समय तक धूम्रपान करने से यह नुकसान बढ़ता जाता है और वही कोशिकाएं धीरे-धीरे कैंसर में बदल सकती हैं। कई लोग सालों तक सिगरेट पीते रहते हैं और जब लक्षण सामने आते हैं, तब तक बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है।

गुटखा और खैनी

गुटखा और खैनी सीधे मुंह की सतह पर रखे जाते हैं, जिससे इनमें मौजूद रसायन लंबे समय तक एक ही जगह पर असर करते रहते हैं। यह आदत मुंह की कोशिकाओं को धीरे-धीरे खराब करती है। जहां-जहां गुटखा या खैनी रखी जाती है, वहां बार-बार घाव बन सकता है। यही घाव आगे चलकर कैंसर का रूप ले सकता है, जिससे खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

शराब का अधिक सेवन

शराब का ज्यादा सेवन भी मुंह के कैंसर के कारणों में शामिल है। शराब मुंह की अंदरूनी परत को कमजोर बना देती है और कोशिकाओं की सुरक्षा क्षमता कम कर देती है। इससे मुंह की सतह पर मौजूद कोशिकाएं जल्दी क्षतिग्रस्त होने लगती हैं।

अगर शराब के साथ तंबाकू का सेवन किया जाए, तो खतरा और ज्यादा बढ़ जाता है। दोनों मिलकर मुंह की परत को तेजी से नुकसान पहुंचाते हैं। यही वजह है कि जो लोग शराब और तंबाकू दोनों का सेवन करते हैं, उनमें मुंह के कैंसर का खतरा ज्यादा देखा जाता है।

मुंह की साफ-सफाई का ध्यान न रखना

मुंह की सही सफाई न होना भी एक अहम कारण बन सकता है। लंबे समय तक दांतों में गंदगी जमा रहना, मसूड़ों में सूजन रहना या बार-बार इंफेक्शन होना मुंह की कोशिकाओं को कमजोर कर देता है। जब मुंह लंबे समय तक अस्वस्थ रहता है, तो कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

टूटे हुए दांत या ठीक से फिट न होने वाले नकली दांत भी मुंह के अंदर बार-बार घाव बना सकते हैं। ये छोटे-छोटे घाव अगर लंबे समय तक बने रहें, तो आगे चलकर गंभीर रूप ले सकते हैं।

बार-बार होने वाले छाले और घाव

अगर मुंह में बार-बार छाले होते हैं और वे लंबे समय तक ठीक नहीं होते, तो यह खतरे का संकेत हो सकता है। सामान्य छाले कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं, लेकिन जो घाव दो हफ्ते से ज्यादा बने रहें, उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

इसी तरह, मुंह के अंदर सफेद या लाल दाग भी कैंसर से पहले की स्थिति हो सकते हैं। कई बार लोग इन्हें मामूली एलर्जी या गर्म खाने का असर समझ लेते हैं, लेकिन लगातार बने रहने पर यह गंभीर संकेत हो सकता है।

वायरस संक्रमण का प्रभाव

कुछ मामलों में वायरस भी मुंह के कैंसर का कारण बन सकते हैं। खासकर ह्यूमन पैपिलोमा वायरस को मुंह और गले के कैंसर से जोड़ा गया है। यह वायरस मुंह की कोशिकाओं के डीएनए में बदलाव कर सकता है, जिससे कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं।

कमजोर इम्यून सिस्टम

जब शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता कमजोर हो जाती है, तो कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। लंबे समय की बीमारियां, कुछ दवाइयों का लगातार सेवन या गलत जीवनशैली इम्यून सिस्टम को कमजोर कर सकती है। कमजोर इम्यून सिस्टम शरीर की खराब कोशिकाओं को समय पर पहचान नहीं पाता, जिससे कैंसर पनप सकता है।

पोषण की कमी

लंबे समय तक सही और संतुलित भोजन न मिलने से भी मुंह के कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। हरी सब्जियां, फल और जरूरी विटामिन मुंह की कोशिकाओं को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। जब शरीर को सही पोषण नहीं मिलता, तो कोशिकाएं कमजोर हो जाती हैं और बीमारी की संभावना बढ़ जाती है।

मुंह के कैंसर के प्रमुख कारणों को समझना और समय रहते सावधानी बरतना ही इस बीमारी से बचाव का सबसे सही तरीका माना जाता है।

मुंह के कैंसर से बचाव कैसे करें

मुंह के कैंसर से बचाव पूरी तरह संभव है, अगर समय रहते सही आदतें अपनाई जाएं और लापरवाही से बचा जाए। यह बीमारी अचानक नहीं होती, बल्कि धीरे-धीरे बनती है। इसलिए अगर रोजमर्रा की जिंदगी में कुछ जरूरी बदलाव कर लिए जाएं, तो मुंह के कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। जागरूकता और नियमित देखभाल ही इस बीमारी से बचाव की सबसे बड़ी कुंजी मानी जाती है।

तंबाकू और गुटखा छोड़ना

तंबाकू और गुटखा छोड़ना मुंह के कैंसर से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है। सिगरेट, बीड़ी, खैनी, गुटखा और पान मसाला जैसी चीजें मुंह की कोशिकाओं को लगातार नुकसान पहुंचाती हैं। इन्हें छोड़ने से धीरे-धीरे कोशिकाओं को ठीक होने का मौका मिलता है और कैंसर का खतरा कम होने लगता है।

शराब का सीमित या न के बराबर सेवन

शराब का अधिक सेवन मुंह की अंदरूनी परत को कमजोर बना देता है। अगर शराब का सेवन बहुत कम किया जाए या पूरी तरह छोड़ दिया जाए, तो मुंह की कोशिकाएं ज्यादा सुरक्षित रहती हैं। तंबाकू के साथ शराब का सेवन तो खतरे को कई गुना बढ़ा देता है, इसलिए इससे खासतौर पर बचना चाहिए।

मुंह की नियमित जांच और सफाई

रोजाना सही तरीके से दांत साफ करना, माउथवॉश का इस्तेमाल करना और समय-समय पर दंत चिकित्सक को दिखाना बेहद जरूरी है। इससे मुंह में होने वाले छोटे बदलाव समय पर पकड़े जा सकते हैं।

संतुलित और पौष्टिक आहार

हरी सब्जियां, फल और पर्याप्त पानी पीना शरीर की ताकत बढ़ाता है और मुंह की कोशिकाओं को स्वस्थ रखने में मदद करता है।

आज ही परामर्श लें

मुंह के कैंसर के कारणों में से कई हमारी रोजमर्रा की आदतों से जुड़े होते हैं। सही जानकारी, जागरूकता और समय पर जांच से इस बीमारी से बचाव संभव है। अगर आपको या आपके किसी अपने को मुंह में लंबे समय से छाला, दर्द, सफेद या लाल दाग, या बोलने और खाने में परेशानी हो रही है, तो देर न करें।

अगर आप भरोसेमंद जांच और इलाज की तलाश में हैं, तो Oncare Cancer Hospital एक विश्वसनीय विकल्प है। यहां अनुभवी डॉक्टरों की देखरेख में आधुनिक तकनीक के साथ मुंह के कैंसर की जांच, इलाज और फॉलो-अप किया जाता है, जिससे समय पर सही इलाज संभव हो पाता है।

FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

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