कैंसर और डायबिटीज: इलाज के दौरान शुगर कैसे संभालें

oncare team
Updated on Sep 4, 2026 11:55 IST

By Dr. Gajendra Kumar Himanshu

कैंसर और डायबिटीज

कैंसर और डायबिटीज दोनों ऐसी बीमारियां हैं जिनके इलाज के दौरान विशेष देखभाल की जरूरत होती है। यदि किसी मरीज को कैंसर के साथ डायबिटीज भी है, तो इलाज के समय ब्लड शुगर का नियंत्रण बनाए रखना बहुत जरूरी हो जाता है। कीमोथेरेपी, स्टेरॉयड दवाएं, तनाव और खानपान में बदलाव के कारण शुगर का स्तर बढ़ या घट सकता है। इसलिए कैंसर के इलाज के साथ-साथ डायबिटीज को भी सही तरीके से संभालना जरूरी है, ताकि इलाज बेहतर तरीके से पूरा हो सके और जटिलताओं का खतरा कम रहे।

आज के इस ब्लॉग में हम आपको बताएंगे कि कैंसर और डायबिटीज का आपस में क्या संबंध है, इलाज के दौरान शुगर क्यों बढ़ती या घटती है, किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, क्या खाना चाहिए, कौन-सी सावधानियां जरूरी हैं और कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

कैंसर और डायबिटीज का इलाज एक साथ क्यों चुनौतीपूर्ण होता है?

कैंसर और डायबिटीज दोनों ही शरीर को अलग-अलग तरीके से प्रभावित करते हैं। जब दोनों बीमारियां एक साथ होती हैं, तो इलाज थोड़ा जटिल हो सकता है। कैंसर का उपचार शरीर पर अतिरिक्त दबाव डालता है, जबकि डायबिटीज में ब्लड शुगर को लगातार नियंत्रित रखना जरूरी होता है।

कई बार कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं, खासकर स्टेरॉयड, ब्लड शुगर को बढ़ा सकती हैं। वहीं कुछ मरीजों में भूख कम लगने, उल्टी या दस्त के कारण शुगर बहुत कम भी हो सकती है। इसलिए दोनों बीमारियों का इलाज साथ-साथ और संतुलित तरीके से किया जाता है।

कैंसर के इलाज के दौरान शुगर क्यों बढ़ सकती है?

इलाज के समय कई कारणों से ब्लड शुगर सामान्य स्तर से ऊपर जा सकती है। इसका मतलब यह नहीं है कि इलाज सही नहीं चल रहा, बल्कि यह दवाओं और शरीर की प्रतिक्रिया का हिस्सा भी हो सकता है।

शुगर बढ़ने के सामान्य कारण

  • स्टेरॉयड दवाओं का उपयोग
  • कीमोथेरेपी के दौरान शरीर में तनाव
  • कम शारीरिक गतिविधि
  • संक्रमण होना
  • पर्याप्त नींद न मिलना
  • पहले से अनियंत्रित डायबिटीज

अगर शुगर लंबे समय तक अधिक बनी रहे, तो डॉक्टर दवा या इंसुलिन की मात्रा में बदलाव कर सकते हैं।

क्या कैंसर के इलाज के दौरान शुगर कम भी हो सकती है?

हाँ, कुछ मरीजों में ब्लड शुगर बहुत कम भी हो सकती है। यह स्थिति भी उतनी ही गंभीर हो सकती है जितनी कि शुगर का बढ़ जाना।

शुगर कम होने के कारण

  • भूख कम लगना
  • समय पर खाना न खाना
  • बार-बार उल्टी होना
  • दस्त लगना
  • पहले जितना खाना न खा पाना
  • डायबिटीज की दवा या इंसुलिन की अधिक मात्रा

यदि मरीज को चक्कर आए, पसीना आए, हाथ कांपें या अचानक कमजोरी महसूस हो, तो तुरंत ब्लड शुगर की जांच करनी चाहिए।

कैंसर के इलाज के दौरान शुगर की नियमित जांच क्यों जरूरी है?

ब्लड शुगर की नियमित जांच करने से डॉक्टर यह समझ पाते हैं कि इलाज का शरीर पर क्या असर पड़ रहा है। इससे जरूरत पड़ने पर दवाओं में समय रहते बदलाव किया जा सकता है।

डॉक्टर किन बातों पर नजर रखते हैं?

  • फास्टिंग ब्लड शुगर
  • भोजन के बाद की शुगर
  • HbA1c (जरूरत के अनुसार)
  • दवाओं का असर
  • इंसुलिन की जरूरत
  • संक्रमण का खतरा

नियमित जांच से इलाज अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाया जा सकता है।

कैंसर और डायबिटीज के मरीजों को क्या खाना चाहिए?

संतुलित भोजन दोनों बीमारियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसा भोजन चुनना चाहिए जिससे शरीर को ऊर्जा भी मिले और ब्लड शुगर भी नियंत्रित रहे।

खाने में क्या शामिल करें?

  • हरी पत्तेदार सब्जियां
  • मौसमी सब्जियां
  • साबुत अनाज
  • दालें और अंकुरित अनाज
  • कम वसा वाला दूध या दही
  • अंडा, मछली या अन्य प्रोटीन युक्त भोजन (यदि डॉक्टर अनुमति दें)
  • पर्याप्त मात्रा में पानी

किन चीजों का सेवन सीमित करें?

  • मीठे पेय पदार्थ
  • ज्यादा चीनी वाली मिठाइयां
  • पैकेज्ड स्नैक्स
  • तले हुए खाद्य पदार्थ
  • अधिक तेल और घी वाला भोजन
  • अत्यधिक मीठे फलों का अधिक मात्रा में सेवन

यदि इलाज के कारण खाने में परेशानी हो रही हो, तो डाइटिशियन की सलाह लेना बेहतर रहता है।

इलाज के दौरान कौन-सी सावधानियां रखनी चाहिए?

कैंसर और डायबिटीज दोनों के इलाज के दौरान छोटी-छोटी सावधानियां भी बड़ी समस्याओं से बचा सकती हैं।

इन बातों का ध्यान रखें

  • ब्लड शुगर नियमित रूप से जांचें।
  • दवाएं समय पर लें।
  • डॉक्टर की सलाह के बिना दवा बंद न करें।
  • समय पर भोजन करें।
  • शरीर में पानी की कमी न होने दें।
  • हल्की शारीरिक गतिविधि करें, यदि डॉक्टर अनुमति दें।
  • किसी भी संक्रमण के लक्षण को नजरअंदाज न करें।
  • सभी फॉलो-अप विजिट समय पर करें।

कैंसर के इलाज के दौरान इंसुलिन की जरूरत क्यों पड़ सकती है?

कुछ मरीज पहले केवल दवाओं से डायबिटीज नियंत्रित करते हैं, लेकिन इलाज के दौरान उन्हें कुछ समय के लिए इंसुलिन की जरूरत पड़ सकती है।

ऐसा इसलिए होता है क्योंकि स्टेरॉयड दवाएं ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ा सकती हैं। इंसुलिन की मदद से शुगर को जल्दी और बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है। इसका मतलब यह नहीं है कि मरीज को हमेशा इंसुलिन ही लेना पड़ेगा। कई मामलों में इलाज पूरा होने के बाद डॉक्टर फिर से दवा में बदलाव कर सकते हैं।

किन लक्षणों पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

कुछ लक्षण ऐसे होते हैं जिन्हें बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए क्योंकि ये शुगर के बहुत ज्यादा बढ़ने या कम होने का संकेत हो सकते हैं।

तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें यदि

  • ब्लड शुगर लगातार बहुत अधिक रहे।
  • बार-बार शुगर बहुत कम हो जाए।
  • तेज प्यास लगे और बार-बार पेशाब आए।
  • लगातार उल्टी हो रही हो।
  • तेज बुखार या संक्रमण हो।
  • चक्कर आ रहे हों या बेहोशी जैसा महसूस हो।
  • घाव जल्दी ठीक नहीं हो रहे हैं।
  • सांस लेने में परेशानी हो रही हो।

क्या कैंसर और डायबिटीज के साथ सामान्य जीवन संभव है?

हाँ। सही इलाज, संतुलित भोजन, नियमित जांच और डॉक्टर की सलाह का पालन करके कई मरीज कैंसर और डायबिटीज दोनों को अच्छी तरह संभाल सकते हैं।

इलाज के दौरान सबसे जरूरी बात यह है कि मरीज अपनी दवाएं समय पर ले, शुगर की जांच नियमित कराए और किसी भी नए लक्षण की जानकारी तुरंत डॉक्टर को दे। इससे इलाज के दौरान होने वाली कई जटिलताओं से बचा जा सकता है।

अगर आप कैंसर और डायबिटीज के बारे में अधिक जानकारी पढ़ना चाहते हैं, तो National Cancer Institute की आधिकारिक वेबसाइट पर विश्वसनीय जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

आज ही परामर्श लें

यदि आपको कैंसर के साथ डायबिटीज भी है, तो इलाज के दौरान दोनों बीमारियों का सही प्रबंधन बहुत जरूरी है। Oncare Cancer Hospital में मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट, एंडोक्राइनोलॉजिस्ट, डाइटिशियन और अन्य विशेषज्ञ मिलकर मरीज की जरूरत के अनुसार व्यक्तिगत उपचार योजना तैयार करते हैं। सही समय पर शुगर को नियंत्रित रखने से कैंसर का इलाज अधिक सुरक्षित और प्रभावी ढंग से पूरा करने में मदद मिल सकती है।

डिस्क्लेमर

यह लेख केवल सामान्य जानकारी देने के उद्देश्य से लिखा गया है। कैंसर या डायबिटीज से जुड़ा कोई भी इलाज, दवा या खानपान में बदलाव हमेशा योग्य डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही करें।

Frequently Asked Questions

Written and Verified by:

Dr. Gajendra Kumar Himanshu

Dr. Gajendra Kumar Himanshu Exp: 10 Yr

Medical Officer

Book an Appointment

Related Blogs

रीढ़ की हड्डी पर कैंसर का दबाव

रीढ़ की हड्डी पर कैंसर का दबाव: एक इमरजेंसी

रीढ़ की हड्डी पर कैंसर का दबाव (Spinal Cord Compression) कैंसर से जुड़ी एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है। जब ट्यूमर रीढ़ की हड्डी या उसके आसपास बढ़कर नसों पर दबाव डालने लगता है, तो मरीज को तेज पीठ दर्द, हाथ-पैरों में कमजोरी, सुन्नपन या चलने में कठिनाई जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत इलाज शुरू करना जरूरी होता है।

Read more

एक्टिव सर्विलांस

एक्टिव सर्विलांस: कब डॉक्टर तुरंत इलाज नहीं करते

कई बार कैंसर का पता चलने के बाद मरीज और उसके परिवार को लगता है कि अब तुरंत इलाज शुरू करना जरूरी होगा। लेकिन हर स्थिति में ऐसा नहीं होता। कुछ प्रकार के कैंसर बहुत धीरे-धीरे बढ़ते हैं और लंबे समय तक कोई गंभीर नुकसान नहीं पहुंचाते। ऐसे मामलों में डॉक्टर मरीज की नियमित जांच करते हैं और बीमारी पर नजर रखते हैं। इस प्रक्रिया को एक्टिव सर्विलांस कहा जाता है।

Read more

सर्वाइकल कैंसर के इलाज के बाद देखभाल

सर्वाइकल कैंसर के इलाज के बाद देखभाल: रिकवरी और फॉलो-अप

सर्वाइकल कैंसर के इलाज के बाद सही देखभाल और नियमित फॉलो-अप उतने ही जरूरी हैं जितना इलाज। इलाज पूरा होने के बाद भी शरीर को ठीक होने में समय लगता है। इस दौरान डॉक्टर की सलाह मानना, समय-समय पर जांच कराना, स्वस्थ जीवनशैली अपनाना और किसी भी नए लक्षण पर तुरंत ध्यान देना रिकवरी को बेहतर बनाने में मदद करता है।

Read more