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हड्डी के कैंसर के लिए स्क्रीनिंग और डायग्नोसिस टेस्ट की जानकारी
सच बताऊं तो ज्यादातर लोग हड्डियों के दर्द को सीरियस लेते ही नहीं। थोड़ा दर्द हुआ तो लगा कि कैल्शियम की कमी है, कभी लगा कि थकान है या पुरानी चोट का असर होगा।
लेकिन हर बार मामला इतना सिंपल नहीं होता। कभी-कभी यही लगातार रहने वाला दर्द किसी बड़ी चीज का संकेत भी हो सकता है, जैसे हड्डी का कैंसर।
डरने की बात नहीं है, लेकिन समझना जरूरी है।क्योंकि जितना जल्दी पता चले, उतना आसान इलाज रहता है।तो चलिए समझते हैं कि हड्डी के कैंसर का डायग्नोसिस आखिर होता कैसे है डॉक्टर किन-किन चीजों से कन्फर्म करते हैं।
हड्डी का कैंसर होता क्या है
सीधे शब्दों में बोलें तो जब हड्डी की कोशिकाएं बिना कंट्रोल के बढ़ने लगती हैं, तब कैंसर बनता है।ये शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है, लेकिन ज्यादातर हाथ-पैर या कूल्हे की हड्डियों में देखा जाता है। एक और बात - हर केस एक जैसा नहीं होता है।कभी कैंसर हड्डी में ही शुरू होता है, और कभी शरीर के किसी और हिस्से से फैलकर आता है।
कौन से लक्षण नजर आ सकते हैं
अब दिक्कत यही है कि शुरुआत में लक्षण बहुत क्लियर नहीं होते है।लेकिन कुछ चीजें अगर बार-बार हो रही हैं, तो नजरअंदाज नहीं करनी चाहिए:
- एक ही जगह पर लगातार दर्द
- उस जगह पर सूजन या हल्की गांठ
- बिना वजह हड्डी कमजोर लगना
- बार-बार फ्रैक्चर होना
- शरीर में थकान या वजन कम होना
हर दर्द कैंसर नहीं होता… लेकिन हर दर्द को इग्नोर करना भी सही नहीं है।
डॉक्टर शुरुआत कैसे करते हैं
जब आप डॉक्टर के पास जाते हैं, तो वो सीधे बड़े टेस्ट नहीं लिखते हैं।पहले वो समझते हैं कि मामला क्या है।
थोड़ी बातचीत करते हैं:
- दर्द कब से है
- दिन में ज्यादा होता है या रात में
- पहले कभी चोट लगी थी या नहीं
- फैमिली हिस्ट्री क्या है
फिर उस जगह को चेक करते हैं।यहीं से आगे का रास्ता तय होता है।
एक्स-रे
अक्सर पहला टेस्ट एक्स-रे ही होता है।इससे डॉक्टर को हड्डी के अंदर की बेसिक तस्वीर मिल जाती है।अगर हड्डी में कोई अजीब बदलाव है या कोई हिस्सा कमजोर दिख रहा है, तो आगे जांच बढ़ाई जाती है।
MRI और CT स्कैन
अगर एक्स-रे में कुछ गड़बड़ दिखती है, तो फिर थोड़ा डीटेल में देखने के लिए MRI या CT कराया जाता है।MRI से सॉफ्ट टिशू और आसपास का हिस्सा अच्छे से दिखता है।CT स्कैन हड्डी की डिटेल दिखाता है।इन दोनों से ये समझ आता है कि मामला कितना बड़ा है।
बोन स्कैन
ये थोड़ा अलग टेस्ट होता है।इसमें शरीर में एक खास तरह का पदार्थ डाला जाता है, जो उन जगहों पर ज्यादा जमा होता है जहां हड्डी में कुछ गड़बड़ हो रही होती है।इससे डॉक्टर को ये आइडिया मिल जाता है कि और कहीं असर तो नहीं है।
PET स्कैन
ये थोड़ा एडवांस लेवल का टेस्ट है।इससे ये देखा जाता है कि कैंसर एक्टिव कितना है और शरीर में कहीं और तो नहीं फैल रहा है।हर मरीज में जरूरी नहीं होता, लेकिन कुछ केस में डॉक्टर सलाह देते हैं।
बायोप्सी (सबसे जरूरी हिस्सा)
अब सबसे अहम चीज यही है।जब डॉक्टर को शक पक्का लगने लगता है, तब बायोप्सी की जाती है।मतलब उस जगह से छोटा सा टुकड़ा लिया जाता है और लैब में चेक किया जाता है।यहीं से फाइनल पता चलता है कि कैंसर है या नहीं।बाकी सारे टेस्ट अंदाजा देते हैं, लेकिन बायोप्सी कन्फर्म करती है।
मरीज को क्या ध्यान रखना चाहिए
सच कहूँ तो लोग डर जाते हैं और कई बार टेस्ट टालते रहते हैं।लेकिन ऐसा करना ठीक नहीं है।
- जो टेस्ट बोले जाएं, समय पर कराएं
- कुछ छुपाएं मत
- ज्यादा गूगल करने की बजाय डॉक्टर की सुनें
ज्यादातर टेस्ट सुरक्षित होते हैं, बस सही समय पर करवाना जरूरी है।
रिपोर्ट आने के बाद
जब सारी रिपोर्ट आ जाती हैं, तब डॉक्टर बैठकर पूरा केस समझते हैं।फिर तय होता है कि आगे क्या करना है सर्जरी, कीमो या रेडिएशन जो भी जरूरी हो।हर मरीज का इलाज अलग होता है, इसलिए सही डायग्नोसिस बहुत जरूरी है।
भरोसेमंद जानकारी कहां से लें
अगर आप और विस्तार से पढ़ना चाहते हैं, तो National Cancer Institute की ये जानकारी काफी काम की है:
यहां आपको रिसर्च-बेस्ड और सही जानकारी मिलती है।
आज ही परामर्श ले
सीधी बात अगर दर्द बार-बार हो रहा है, तो उसे हल्के में मत लो।हर चीज कैंसर नहीं होती, लेकिन पता करना जरूरी होता है।समय पर जांच कई बार बड़ी समस्या को शुरू में ही रोक देती है।अगर आपको सही जगह पर जांच और इलाज चाहिए, तो Oncare Cancer Hospital में एक्सपर्ट डॉक्टर और अच्छी फैसिलिटी मिल जाती हैं।
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FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
ज्यादातर केस में एक्स-रे से शुरुआत होती है।
हाँ, बिना इसके कन्फर्म नहीं होता।
नहीं, लेकिन अगर लंबे समय तक रहे तो जांच जरूरी है।
हाँ, काफी फर्क पड़ता है।
Written and Verified by:
Dr. Gajendra Kumar Himanshu Exp: 10 Yr
Medical Officer
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