ब्लड कैंसर के प्रकार और पहचान के तरीके

oncare team
Updated on Feb 28, 2026 11:36 IST

By Prashant Baghel

जब कोई व्यक्ति लगातार थकान, बार-बार संक्रमण, खून की कमी या बिना वजह वजन कम होने जैसी समस्याओं से जूझता है, तो अक्सर लोग इसे सामान्य कमजोरी समझकर टाल देते हैं। लेकिन कई बार ये लक्षण ब्लड कैंसर की ओर इशारा कर सकते हैं। ब्लड कैंसर सुनते ही डर लगना स्वाभाविक है, क्योंकि यह खून और शरीर की जड़ों से जुड़ी बीमारी होती है। 

अच्छी बात यह है कि आज ब्लड कैंसर के प्रकारों को बेहतर तरीके से समझा जा चुका है और सही समय पर पहचान हो जाए तो इलाज के अच्छे विकल्प मौजूद हैं। इस लेख में हम ब्लड कैंसर के प्रकार और उसकी पहचान के तरीकों को बहुत आसान भाषा में समझेंगे।

ब्लड कैंसर क्या होता है

ब्लड कैंसर वह बीमारी है जिसमें खून बनाने वाली कोशिकाएं या लिम्फ सिस्टम की कोशिकाएं असामान्य तरीके से बढ़ने लगती हैं। यह बढ़त सामान्य कोशिकाओं के काम में रुकावट डालती है, जिससे शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने, संक्रमण से लड़ने और खून को जमने में परेशानी होने लगती है। ब्लड कैंसर शरीर के किसी एक अंग तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे सिस्टम को प्रभावित कर सकता है।

ब्लड कैंसर कई प्रकार का होता है और हर प्रकार का व्यवहार, गति और इलाज अलग हो सकता है। इसलिए सही पहचान बहुत जरूरी होती है।

ब्लड कैंसर के मुख्य प्रकार

ब्लड कैंसर को आमतौर पर तीन बड़े प्रकारों में बांटा जाता है। हर प्रकार की अपनी अलग पहचान और लक्षण होते हैं।

ल्यूकेमिया क्या होता है

ल्यूकेमिया ब्लड कैंसर का एक आम प्रकार है, जो बोन मैरो यानी हड्डियों के अंदर बनने वाले खून पर असर डालता है। इसमें सफेद रक्त कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं।

इस बीमारी में शरीर संक्रमण से ठीक तरह से लड़ नहीं पाता। मरीज को बार-बार बुखार, कमजोरी, खून की कमी और खून बहने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ल्यूकेमिया धीरे-धीरे बढ़ने वाला भी हो सकता है और तेजी से बढ़ने वाला भी।

लिंफोमा कैंसर की पहचान

लिंफोमा लिम्फ सिस्टम से जुड़ा ब्लड कैंसर है। लिम्फ सिस्टम शरीर को संक्रमण से बचाने में अहम भूमिका निभाता है।

लिंफोमा में लिम्फ नोड्स यानी ग्रंथियां बढ़ने लगती हैं। गर्दन, बगल या जांघ में बिना दर्द की गांठ दिख सकती है। इसके साथ बुखार, रात को पसीना और वजन कम होना जैसे लक्षण भी हो सकते हैं।

मल्टीपल मायलोमा क्या है

मल्टीपल मायलोमा एक ऐसा ब्लड कैंसर है जो प्लाज्मा कोशिकाओं को प्रभावित करता है। ये कोशिकाएं शरीर में एंटीबॉडी बनाती हैं।

इस बीमारी में हड्डियों में दर्द, बार-बार संक्रमण, कमजोरी और किडनी से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। कई बार मरीज को हड्डियों में फ्रैक्चर भी हो सकता है।

ब्लड कैंसर के अन्य वर्गीकरण

ब्लड कैंसर को सिर्फ नाम के आधार पर ही नहीं, बल्कि उसकी गति और कोशिकाओं के प्रकार के आधार पर भी समझा जाता है।

तीव्र और धीमी गति से बढ़ने वाला कैंसर

कुछ ब्लड कैंसर तेजी से बढ़ते हैं और जल्दी लक्षण दिखाने लगते हैं। इन्हें तीव्र प्रकार कहा जाता है।

कुछ प्रकार धीरे-धीरे बढ़ते हैं और लंबे समय तक हल्के लक्षण देते हैं। कई बार मरीज को सालों तक पता ही नहीं चलता।

बच्चों और बड़ों में ब्लड कैंसर

ब्लड कैंसर बच्चों और वयस्कों दोनों में हो सकता है। बच्चों में कुछ खास प्रकार ज्यादा पाए जाते हैं, जबकि बड़ों में अन्य प्रकार अधिक देखे जाते हैं।

उम्र के हिसाब से इलाज की योजना और दवाएं भी अलग हो सकती हैं।

जोखिम के स्तर के आधार पर वर्गीकरण

डॉक्टर ब्लड कैंसर को कम जोखिम, मध्यम जोखिम और अधिक जोखिम वाले समूहों में भी बांटते हैं। इससे इलाज का तरीका तय करने में मदद मिलती है।

ब्लड कैंसर की पहचान क्यों जरूरी है

ब्लड कैंसर की पहचान जितनी जल्दी हो, इलाज उतना ही प्रभावी हो सकता है। शुरुआती चरण में बीमारी को नियंत्रित करना आसान होता है और शरीर इलाज को बेहतर तरीके से सहन कर पाता है।

कई लोग लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे बीमारी आगे बढ़ जाती है। सही समय पर जांच कराने से न सिर्फ जीवन बचता है, बल्कि इलाज का खर्च और मानसिक तनाव भी कम होता है।

ब्लड कैंसर की पहचान के तरीके

ब्लड कैंसर की पहचान में सबसे पहला और अहम कदम खून की जांच होती है। इस जांच से डॉक्टर यह समझने की कोशिश करते हैं कि खून की कोशिकाएं सामान्य तरीके से काम कर रही हैं या नहीं। खून की जांच में सफेद रक्त कोशिकाओं, लाल रक्त कोशिकाओं और प्लेटलेट्स की संख्या देखी जाती है।

अगर सफेद रक्त कोशिकाएं जरूरत से ज्यादा या बहुत कम हों, हीमोग्लोबिन का स्तर गिरा हुआ हो या प्लेटलेट्स कम हो जाएं, तो यह ब्लड कैंसर का संकेत हो सकता है। कई बार कोशिकाओं की बनावट भी सामान्य से अलग दिखती है, जिससे डॉक्टर को संदेह होता है कि अंदर कोई गंभीर समस्या हो सकती है। हालांकि सिर्फ खून की जांच से कैंसर की पुष्टि नहीं होती, लेकिन यह आगे की जांच का रास्ता जरूर खोलती है।

बोन मैरो टेस्ट क्या बताता है

जब खून की जांच से ब्लड कैंसर का शक होता है, तब बोन मैरो टेस्ट किया जाता है। बोन मैरो वह नरम हिस्सा होता है जो हड्डियों के अंदर पाया जाता है और जहां खून की कोशिकाएं बनती हैं। इस टेस्ट में हड्डी के अंदर से थोड़ा सा नमूना लिया जाता है और उसे लैब में जांचा जाता है।

बोन मैरो टेस्ट से यह साफ पता चलता है कि कैंसर है या नहीं और अगर है, तो किस प्रकार का है। यह जांच ब्लड कैंसर की पुष्टि करने का सबसे भरोसेमंद तरीका मानी जाती है। इसी जांच के आधार पर डॉक्टर यह भी तय करते हैं कि बीमारी किस स्तर पर है और इलाज का तरीका क्या होना चाहिए।

स्कैन और अन्य जांच

कुछ मामलों में डॉक्टर सीटी स्कैन, पीईटी स्कैन या अल्ट्रासाउंड जैसी जांच भी करवाते हैं। इन जांचों से यह पता चलता है कि कैंसर शरीर में कहां तक फैला है और कौन-कौन से अंग प्रभावित हुए हैं।

लिंफोमा जैसे ब्लड कैंसर में स्कैन बहुत उपयोगी होते हैं, क्योंकि इससे लिम्फ नोड्स की स्थिति और उनका आकार साफ दिखाई देता है। स्कैन की मदद से इलाज की योजना बनाई जाती है और यह भी देखा जाता है कि इलाज का असर हो रहा है या नहीं।

इन सभी जांचों को मिलाकर डॉक्टर ब्लड कैंसर की सही पहचान करते हैं, जिससे मरीज को समय पर और सही इलाज मिल सके।

लक्षणों के आधार पर कब जांच करानी चाहिए

अगर किसी व्यक्ति को लंबे समय तक थकान, बार-बार बुखार, बिना वजह वजन कम होना, खून बहना, हड्डियों में दर्द या गांठ महसूस हो रही हो, तो जांच कराना जरूरी है।

ये लक्षण हमेशा कैंसर के ही नहीं होते, लेकिन बिना जांच के सही कारण पता नहीं चल सकता।

मानसिक और भावनात्मक पहलू

ब्लड कैंसर की पहचान सुनकर मरीज और परिवार दोनों घबरा सकते हैं। डर, चिंता और अनिश्चितता होना स्वाभाविक है।

सही जानकारी, डॉक्टर से खुलकर बात करना और परिवार का साथ इस दौर को आसान बना सकता है। आज कई लोग ब्लड कैंसर से सफल इलाज के बाद सामान्य जीवन जी रहे हैं।

आज ही परामर्श लें

ब्लड कैंसर एक गंभीर लेकिन इलाज योग्य बीमारी है, अगर इसे सही समय पर पहचाना जाए। ल्यूकेमिया, लिंफोमा और मल्टीपल मायलोमा इसके मुख्य प्रकार हैं और हर प्रकार की पहचान और इलाज अलग होता है। खून की जांच, बोन मैरो टेस्ट और स्कैन से बीमारी की सही पहचान की जा सकती है। लक्षणों को नजरअंदाज न करना और समय पर डॉक्टर से मिलना सबसे अहम कदम है।

Oncare Cancer Hospital में अनुभवी डॉक्टर, आधुनिक जांच सुविधाएं और व्यक्तिगत इलाज की व्यवस्था है, जो ब्लड कैंसर की सही पहचान और बेहतर उपचार में मरीजों की मदद करता है।

FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

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