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किशोरियों में ब्रेस्ट कैंसर: कारण और शुरुआती पहचान
जब हम “ब्रेस्ट कैंसर” के बारे में सुनते हैं, तो अक्सर हमारे मन में मध्यम या वृद्ध महिलाओं की छवि आती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कभी-कभी यह बीमारी किशोरियों में भी हो सकती है? यह सुनकर हैरानी होती है, लेकिन आज के बदलते जीवनशैली, हार्मोनल असंतुलन और पर्यावरणीय कारणों की वजह से किशोरियों में ब्रेस्ट कैंसर के मामले धीरे-धीरे बढ़ रहे हैं।
हालांकि किशोरियों में ब्रेस्ट कैंसर बहुत दुर्लभ होता है, फिर भी इस बारे में जागरूक रहना बेहद जरूरी है, क्योंकि यह बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है। कई बार लड़कियां अपने शरीर में होने वाले बदलावों को सामान्य समझकर नज़रअंदाज़ कर देती हैं, जबकि वही शुरुआती संकेत हो सकते हैं किसी गंभीर बीमारी के।
इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे किशोरियों में ब्रेस्ट कैंसर क्या है, इसके कारण, लक्षण, जोखिम कारक और शुरुआती पहचान के तरीके। साथ ही, यह भी समझेंगे कि समय पर जांच और इलाज क्यों जरूरी है।
ब्रेस्ट कैंसर क्या है? (What is Breast Cancer?)
ब्रेस्ट कैंसर तब होता है जब स्तन की कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं और नियंत्रण से बाहर हो जाती हैं। ये कोशिकाएं एक गांठ (tumor) का रूप ले सकती हैं और अगर इन्हें समय पर नहीं रोका गया, तो ये शरीर के अन्य हिस्सों में फैल सकती हैं।
किशोरियों में यह स्थिति बहुत दुर्लभ होती है, लेकिन असंभव नहीं। किशोर उम्र में शरीर में तेजी से हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिनकी वजह से स्तन ऊतकों में कई तरह के परिवर्तन आते हैं। कभी-कभी ये बदलाव सामान्य होते हैं, लेकिन कुछ मामलों में यह असामान्य कोशिकाओं के विकास का कारण बन सकते हैं।
क्या किशोरियों में ब्रेस्ट कैंसर संभव है? (Is Breast Cancer Possible in Teenagers?)
हाँ, हालांकि यह बहुत कम मामलों में देखा जाता है। शोध के अनुसार, 15 से 19 वर्ष की आयु के बीच ब्रेस्ट कैंसर के मामले बेहद दुर्लभ हैं, लेकिन चिकित्सा इतिहास में ऐसे उदाहरण मौजूद हैं। अधिकांश किशोरियों में यह सौम्य (non-cancerous) गांठों की वजह से होता है, जिन्हें “फाइब्रोएडेनोमा” कहा जाता है।
लेकिन अगर यह गांठें आकार में बढ़ें, दर्द दें, या स्तन के आकार में बदलाव दिखे, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है, ताकि किसी गंभीर स्थिति का समय पर पता लगाया जा सके।
किशोरियों में ब्रेस्ट कैंसर के कारण (Causes of Breast Cancer in Teenagers)
किशोरियों में ब्रेस्ट कैंसर दुर्लभ होता है, लेकिन यह पूरी तरह असंभव नहीं है। इस उम्र में शरीर में तेजी से बदलाव होते हैं, विशेषकर हार्मोनल और शारीरिक विकास में। इन बदलावों के कारण कभी-कभी ब्रेस्ट टिश्यू (Breast Tissue) में असामान्य वृद्धि होने लगती है, जो कैंसर का कारण बन सकती है। इसके अलावा, आनुवंशिक और पर्यावरणीय कारण भी इस बीमारी में योगदान कर सकते हैं।
नीचे किशोरियों में ब्रेस्ट कैंसर के प्रमुख कारणों को विस्तार से समझा गया है:
1. आनुवंशिक कारण (Genetic Factors)
किशोरियों में ब्रेस्ट कैंसर का सबसे महत्वपूर्ण कारण आनुवंशिक होता है। अगर परिवार में किसी महिला को ब्रेस्ट या ओवरी (अंडाशय) कैंसर हुआ है, तो अगली पीढ़ी में इसका खतरा बढ़ सकता है। विशेष रूप से BRCA1 और BRCA2 जीन म्यूटेशन कैंसर के जोखिम को कई गुना बढ़ा देते हैं।
BRCA जीन का मुख्य काम शरीर में कोशिकाओं की वृद्धि और मरने की प्रक्रिया को नियंत्रित करना है। अगर इनमें म्यूटेशन हो जाता है, तो कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं और ट्यूमर बन सकता है। इसलिए जिन किशोरियों के परिवार में ब्रेस्ट या ओवरी कैंसर का इतिहास है, उन्हें नियमित रूप से डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए। समय पर जीन टेस्टिंग और सावधानी जीवन को सुरक्षित बनाने में मदद कर सकती है।
2. हार्मोनल असंतुलन (Hormonal Imbalance)
किशोरावस्था में शरीर में हार्मोनल बदलाव बहुत तेज़ होते हैं। एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन स्तनों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कभी-कभी इन हार्मोन का स्तर असंतुलित हो जाता है।
हार्मोनल असंतुलन ब्रेस्ट टिश्यू में असामान्य कोशिकाओं के निर्माण को बढ़ावा दे सकता है। उदाहरण के लिए, अगर एस्ट्रोजन का स्तर बहुत ज्यादा होता है या टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम हो जाता है, तो स्तन ऊतक की कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ सकती हैं। मोटापा और कुछ दवाइयां भी हार्मोनल असंतुलन का कारण बन सकती हैं। इसलिए किशोरियों में हार्मोन स्तर पर ध्यान रखना और अनियमित बदलावों को नजरअंदाज न करना जरूरी है।
3. रेडिएशन का प्रभाव (Radiation Exposure)
किशोरियों को किसी अन्य बीमारी के इलाज के दौरान छाती या गर्दन के पास रेडिएशन थेरेपी दी गई हो, तो यह भी ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम बढ़ा सकती है। रेडिएशन की किरणें शरीर में कोशिकाओं के डीएनए को प्रभावित कर सकती हैं। लंबे समय तक या उच्च मात्रा में रेडिएशन लेने से असामान्य कोशिकाओं का निर्माण बढ़ सकता है, जो भविष्य में कैंसर का कारण बन सकता है।
इसलिए रेडिएशन थेरेपी लेने वाली किशोरियों को नियमित अंतराल पर ब्रेस्ट चेकअप करवाना चाहिए और किसी भी असामान्य बदलाव पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
4. अस्वस्थ जीवनशैली (Unhealthy Lifestyle)
किशोरियों में अस्वस्थ जीवनशैली भी ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकती है। इसमें शामिल हैं:
- ज्यादा जंक फूड: अत्यधिक फास्ट फूड और प्रोसेस्ड फूड शरीर में वजन बढ़ा सकते हैं और हार्मोन असंतुलन पैदा कर सकते हैं।
- मोटापा: शरीर में अतिरिक्त वसा कोशिकाएं एस्ट्रोजन हार्मोन का उत्पादन बढ़ाती हैं। यह हार्मोनल बदलाव कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को बढ़ावा दे सकता है।
- शारीरिक गतिविधियों की कमी: नियमित व्यायाम न करने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है और वजन बढ़ता है।
- नींद की कमी: पर्याप्त नींद न लेने से हार्मोन असंतुलन बढ़ सकता है, जो कैंसर के खतरे को प्रभावित कर सकता है।
5. पर्यावरणीय कारक (Environmental Factors)
किशोरियों में ब्रेस्ट कैंसर के मामले में पर्यावरणीय कारणों का भी योगदान हो सकता है। इसमें शामिल हैं:
- रासायनिक पदार्थ: घर या स्कूल में मौजूद कुछ रसायन ब्रेस्ट टिश्यू में असामान्य कोशिकाओं को बढ़ावा दे सकते हैं।
- प्लास्टिक और BPA: प्लास्टिक की बोतलों या कंटेनरों में मौजूद BPA हार्मोनल असंतुलन का कारण बन सकता है।
- प्रदूषण: हवा और पानी में मौजूद हानिकारक तत्व भी शरीर में कैंसर कोशिकाओं के विकास को प्रभावित कर सकते हैं।
किशोरियों में ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण (Symptoms of Breast Cancer in Teenagers)
किशोरियों को अपने शरीर में होने वाले हर बदलाव पर ध्यान देना चाहिए। नीचे बताए गए लक्षणों में से कोई भी दिखाई दे, तो डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है:
- स्तन या उसके आसपास कोई गांठ महसूस होना
- निप्पल से असामान्य स्राव (खून या पारदर्शी तरल)
- निप्पल या स्तन की त्वचा का सिकुड़ना या लाल होना
- निप्पल का अंदर की ओर मुड़ना
- एक स्तन का आकार दूसरे की तुलना में बदलना
- बगल में सूजन या गांठ
- लगातार दर्द या भारीपन महसूस होना
ये लक्षण हमेशा कैंसर के नहीं होते, लेकिन जांच करवाना सुरक्षा का पहला कदम है।
शुरुआती पहचान क्यों जरूरी है? (Importance of Early Detection)
किशोरियों में ब्रेस्ट कैंसर के मामले अक्सर देर से पहचान में आते हैं क्योंकि वे अपने लक्षणों को सामान्य मान लेती हैं। लेकिन शुरुआती पहचान से इलाज आसान और प्रभावी हो जाता है। अगर कैंसर शुरुआती स्टेज में पकड़ लिया जाए, तो पूरी तरह ठीक होने की संभावना 90% से अधिक होती है।
आज ही परामर्श लें
किशोरियों में ब्रेस्ट कैंसर भले ही दुर्लभ हो, लेकिन यह पूरी तरह असंभव नहीं है। हर लड़की को अपने शरीर के बदलावों के प्रति जागरूक रहना चाहिए और किसी भी असामान्य लक्षण पर डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए।
समय पर जांच और सही उपचार से कैंसर का इलाज संभव है। अगर किसी किशोरी या महिला को ब्रेस्ट कैंसर से जुड़ी कोई समस्या हो, तो विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है। Oncare Cancer Hospital उन्नत तकनीक, अनुभवी ऑन्कोलॉजिस्ट और व्यक्तिगत उपचार योजनाओं के साथ ब्रेस्ट कैंसर के प्रभावी इलाज के लिए एक भरोसेमंद केंद्र है।
FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
नहीं, किशोरियों में ब्रेस्ट कैंसर बहुत दुर्लभ होता है, लेकिन असंभव नहीं। इसलिए किसी भी लक्षण को हल्के में न लें।
छाती में गांठ, दर्द, निप्पल से स्राव या त्वचा में बदलाव इसके शुरुआती संकेत हो सकते हैं।
हाँ, अगर इसे शुरुआती अवस्था में पहचान लिया जाए तो इलाज पूरी तरह संभव है।
संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और किसी भी असामान्य लक्षण पर तुरंत जांच करवाना बचाव के सबसे अच्छे उपाय हैं।
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