कैंसर का तीसरा चरण: पहचान और इलाज कैसे करें

oncare team
Updated on Feb 26, 2026 19:06 IST

By Prashant Baghel

जब किसी को यह पता चलता है कि कैंसर तीसरे चरण में पहुंच चुका है, तो यह खबर बहुत डराने वाली हो सकती है। इस समय मरीज और परिवार के मन में कई सवाल आते हैं। क्या इलाज संभव है, बीमारी कितनी गंभीर है, और आगे जीवन कैसा रहेगा। कैंसर का तीसरा चरण गंभीर जरूर होता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उम्मीद खत्म हो जाती है। सही समय पर इलाज और देखभाल से इस चरण में भी बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है और जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाई जा सकती है।

इस लेख में हम कैंसर के तीसरे चरण को बहुत आसान भाषा में समझेंगे। आप जानेंगे कि तीसरा चरण क्या होता है, इसके लक्षण कैसे दिखते हैं, जांच कैसे होती है, इलाज के क्या विकल्प हैं और इस दौरान मरीज को किस तरह की देखभाल की जरूरत होती है।

कैंसर का तीसरा चरण क्या होता है

कैंसर का तीसरा चरण तब माना जाता है जब कैंसर अपने मूल स्थान से आसपास के ऊतकों या पास के लिम्फ नोड्स तक फैल चुका होता है। इस चरण में कैंसर अभी शरीर के दूर के अंगों तक नहीं पहुंचता, लेकिन यह पहले और दूसरे चरण की तुलना में ज्यादा सक्रिय और गंभीर होता है।

तीसरे चरण का मतलब यह होता है कि बीमारी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, लेकिन इलाज के अच्छे विकल्प अभी भी मौजूद रहते हैं। कई मामलों में सही इलाज से कैंसर को लंबे समय तक नियंत्रित किया जा सकता है।

कैंसर का तीसरा चरण होने पर शरीर में दिखने वाले लक्षण

तीसरे चरण में कैंसर के लक्षण पहले की तुलना में ज्यादा साफ दिखाई देने लगते हैं। इस समय बीमारी केवल शुरुआती स्तर पर नहीं रहती, बल्कि आसपास के ऊतकों और लिम्फ नोड्स को भी प्रभावित करने लगती है। लक्षण व्यक्ति के शरीर, कैंसर के प्रकार और प्रभावित अंग के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन कुछ संकेत आम तौर पर देखे जाते हैं।

लगातार बढ़ता हुआ दर्द

तीसरे चरण में दर्द अक्सर बढ़ने लगता है और पहले की तरह हल्का नहीं रहता। यह दर्द उस हिस्से में ज्यादा महसूस होता है जहां कैंसर मौजूद होता है। कई मरीजों को यह दर्द दिन और रात दोनों समय परेशान करता है। आराम करने, दवा लेने या स्थिति बदलने से भी दर्द पूरी तरह ठीक नहीं होता, जिससे बेचैनी और तनाव बढ़ सकता है।

सूजन या गांठ का बढ़ना

इस चरण में कैंसर वाली जगह पर मौजूद गांठ या सूजन का आकार धीरे-धीरे बढ़ सकता है। आसपास के लिम्फ नोड्स भी प्रभावित हो सकते हैं, जो सूजकर सख्त हो जाते हैं। ये गांठें अक्सर छूने पर दर्द रहित होती हैं, लेकिन समय के साथ इनका आकार और असर बढ़ता जाता है।

थकान और कमजोरी

तीसरे चरण में मरीज को लगातार थकान महसूस होती है। बिना ज्यादा मेहनत किए भी शरीर कमजोर लगने लगता है। रोजमर्रा के काम जैसे चलना, खाना बनाना या सीढ़ियां चढ़ना भी मुश्किल हो सकता है। आराम करने के बाद भी ऊर्जा पूरी तरह वापस नहीं आती, जिससे जीवन की गुणवत्ता प्रभावित होने लगती है।

कैंसर के तीसरे चरण की पहचान कैसे होती है

तीसरे चरण की पहचान के लिए डॉक्टर कई तरह की जांच करते हैं ताकि बीमारी की सही स्थिति समझी जा सके।

शारीरिक जांच और लक्षणों का मूल्यांकन

डॉक्टर मरीज से लक्षणों के बारे में विस्तार से पूछते हैं और शरीर की जांच करते हैं। सूजन, गांठ और दर्द के स्थान को ध्यान से देखा जाता है।

इमेजिंग जांच की भूमिका

सीटी स्कैन, एमआरआई, पेट स्कैन या एक्स-रे जैसी जांच से यह पता लगाया जाता है कि कैंसर कितना फैल चुका है और किन-किन हिस्सों को प्रभावित कर रहा है।

बायोप्सी और लैब टेस्ट

बायोप्सी के जरिए कैंसर की पुष्टि की जाती है और यह समझा जाता है कि कैंसर कितना आक्रामक है। खून की जांच से शरीर की सामान्य स्थिति का पता चलता है।

कैंसर के तीसरे चरण का इलाज कैसे किया जाता है

सर के तीसरे चरण का इलाज इस बात पर केंद्रित होता है कि बीमारी को काबू में रखा जाए, उसका फैलाव रोका जाए और मरीज को जितना हो सके उतना बेहतर और आरामदायक जीवन दिया जाए। इस चरण में इलाज थोड़ा गहन हो सकता है, लेकिन सही योजना और समय पर उपचार से अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। इलाज का तरीका मरीज की उम्र, सेहत, कैंसर के प्रकार और उसके फैलाव पर निर्भर करता है।

सर्जरी का महत्व इस चरण में भी बना रहता है। अगर कैंसर किसी सीमित हिस्से और आसपास के लिम्फ नोड्स तक फैला हो, तो सर्जरी के जरिए उसे निकालने की कोशिश की जाती है। इससे शरीर में मौजूद कैंसर कोशिकाओं की संख्या कम होती है और आगे के इलाज का असर बेहतर हो सकता है।

कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी तीसरे चरण के इलाज का अहम हिस्सा होती हैं। कीमोथेरेपी दवाओं के जरिए कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करती है, जबकि रेडिएशन थेरेपी खास जगह पर कैंसर को खत्म करने में मदद करती है। कई बार ये इलाज सर्जरी से पहले या बाद में दिए जाते हैं ताकि बीमारी को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सके।

आधुनिक इलाज और संयोजन थेरेपी भी अब तीसरे चरण में उपयोग की जाती हैं। टार्गेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी जैसे इलाज शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं और कैंसर से लड़ने में मदद करते हैं। कई मामलों में अलग-अलग इलाज को साथ में देकर बेहतर परिणाम हासिल किए जाते हैं।

इलाज के दौरान होने वाली परेशानियां और उनका समाधान

तीसरे चरण के इलाज के दौरान मरीज को शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानियां हो सकती हैं।

साइड इफेक्ट और कमजोरी

इलाज के दौरान थकान, मतली, बाल झड़ना या भूख न लगना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। सही दवाओं और देखभाल से इन लक्षणों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

दर्द और अन्य लक्षणों से राहत

दर्द प्रबंधन इस चरण में बहुत जरूरी होता है। आज ऐसी दवाएं और तकनीकें हैं जो दर्द को कम करके मरीज को आराम देती हैं।

मानसिक और भावनात्मक सहारा

डर, चिंता और उदासी महसूस होना सामान्य है। परिवार का साथ, काउंसलिंग और डॉक्टर से खुलकर बात करना मरीज को मानसिक रूप से मजबूत बनाता है।

सही अस्पताल और विशेषज्ञ डॉक्टर क्यों जरूरी हैं

कैंसर के तीसरे चरण में अनुभवी डॉक्टर और आधुनिक सुविधाओं वाला अस्पताल बहुत जरूरी होता है। सही इलाज योजना, समय पर जांच और अच्छी देखभाल से मरीज के नतीजे बेहतर हो सकते हैं।विशेषज्ञ डॉक्टर बीमारी के साथ-साथ मरीज की पूरी स्थिति को ध्यान में रखकर इलाज तय करते हैं।

आज ही परामर्श लें

कैंसर का तीसरा चरण गंभीर जरूर होता है, लेकिन यह इलाज के बाहर नहीं है। सही समय पर पहचान, आधुनिक इलाज और अच्छी देखभाल से इस चरण में भी बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है और जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाई जा सकती है। 

मरीज और परिवार का सहयोग, डॉक्टरों की सही सलाह और सकारात्मक सोच इस सफर को आसान बनाती है। Oncare Cancer Hospital में अनुभवी डॉक्टर, आधुनिक तकनीक और मरीज-केंद्रित देखभाल उपलब्ध है, जो कैंसर के तीसरे चरण में भी बेहतर इलाज और भरोसेमंद समर्थन प्रदान करता है।

FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

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